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अलीगढ़ः कैसे बनें मीराबाई, सिंधु... न कोच हैं न सुविधाएं
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महारानी अहिल्याबाई होल्कर स्पोर्ट्स स्टेडियम के बॉक्सिंग रिंग में नही है व्यवस्था।
- फोटो : CITY OFFICE
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इकराम वारिस
खेलों के महाकुंभ ओलंपिक में पीवी सिंधु, मीराबाई चानू और लवलीना ने पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है। लेकिन पदक तालिका में भारत का निचला स्थान खेल प्रेमियों को निराश करता है। इसका प्रमुख कारण खेलों के प्रति सरकारी तंत्र और खेल विभाग का उदासीन रवैया है। इसका उदाहरण, जिले का महारानी अहिल्याबाई होल्कर स्पोर्ट्स स्टेडियम है, जहां ज्यादातर खेलों में न तो कोच हैं और न ही सुविधाएं हैं। बॉक्सिंग रिंग बदहाल है। धावकों के लिए स्थायी एथलेटिक्स ट्रैक भी नहीं है। शूटिंग रेंज, टेबल टेनिस, टेनिस, बास्केटबाल कोर्ट उखड़ चुके हैं। ऐसे में किसी खिलाड़ी से मेडल जीतने की उम्मीद करना बेमानी है।
महारानी अहिल्याबाई होल्कर स्पोर्ट्स स्टेडियम में हॉकी, फुटबॉल, धावक एक ही मैदान पर एक साथ प्रैक्टिस करते हैं। ऐसे में उन्हें एक-दूसरे से बचकर खेलना होता है। जब वह कहीं मैच खेलते हैं तो इस बचाव का दबाव उनके खेल पर भी दिखता है। कोरोना संक्रमण के चलते मार्च 2020 में स्टेडियम बंद हो गया था। जनवरी-2021 में खुला लेकिन मार्च में फिर बंद हो गया। जुलाई-2021 में कोविड प्रोटोकाल के तहत स्टेडियम को खोला गया है। लेकिन खेलों में कोच न होने से खिलाड़ी मायूस हैं। खिलाड़ियों का भी कहना है कि यदि उन्हें सुविधाएं और स्तरीय प्रशिक्षण मिले तो वह भी देश के लिए पदक जीत सकते हैं।
इन खेलों में नहीं हैं कोच
हॉकी, फुटबॉल, टेनिस, कुश्ती, बॉक्सिंग, एथलेटिक्स, क्रिकेट, शूटिंग, हैंडबॉल, वालीबॉल, ताइक्वांडो आदि।
केवल दो खेलों में हैं कोच
इस बार खेल निदेशालय की बजाय एजेंसी ने अंशकालिक कोच की नियुक्ति की है, जिसमें मीनाक्षी रानी गौड़ भारोत्तोलन की अंशकालिक कोच हैं। खेल प्रोत्साहन समिति की ओर से बैडमिंटन में विकास चौहान कोच हैं। हालांकि, उप क्रीड़ा अधिकारी विजय सिंह टेबल टेनिस विशेषज्ञ हैं।
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स्वीमिंग पूल की दरकार
स्टेडियम में स्वीमिंग पूल की दरकार वर्षों से है। कई बार स्वीमिंग पूल के लिए क्रीड़ा अधिकारी ने जमीन तलाश की, लेकिन बात नहीं बनी। जिले के दौरे पर आए तत्कालीन खेल व युवा विकास मंत्री चेतन चौहान से भी स्वीमिंग पूल के लिए खेल प्रेमियों ने बात रखी थी।
खिलाड़ियों का पंजीकरण
जुलाई-2021 में स्टेडियम खुलने के बाद एथलेटिक्स, टेबल टेनिस, जिम में 4-4, भारोत्तोलन व बैडमिंटन में 15-15 खिलाड़ियों का पंजीकरण है। जनवरी-2019 से लेकर दिसंबर 2019 में हॉकी, बॉक्सिंग, एथलेटिक्स, टेनिस, टेबल टेनिस, फुटबाल, कुश्ती, शूटिंग सहित अन्य खेलों में 375 से ज्यादा खिलाड़ी पंजीकृत थे।
स्टेडियम में अंशकालिक कोच व खेलों में सुविधाओं के संबंध में खेल निदेशालय प्रस्ताव मांगता है। उसी के अनुरूप हम प्रस्ताव भेज देते हैं। खेल निदेशालय ही तय करता है कि संबंधित जिले को कितने कोच व सुविधाएं देनी हैं।
- रानी प्रकाश, क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी
मेडल जीतने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर महत्वपूर्ण नहीं, बल्कि खिलाड़ियों का समर्पण जरूरी है। ट्रेनिंग के लिए सिस्टम अच्छा होना चाहिए। अगर इंफ्रास्ट्रक्चर महत्वपूर्ण होता तो तलवारबाजी, नौकायन में ओलंपिक के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाते।
- मजहर उल कमर, अध्यक्ष, जिला ओलंपिक संघ
खेल सुविधाएं बढ़ेंगी तो बेहतर परिणाम सामने आएंगे। खिलाड़ी पूरी निष्ठा और ईमानदारी से खेलते हैं। बस, उन्हें बेहतर मार्गदर्शन और सुविधाओं की जरूरत है।
- पूर्णिमा शर्मा, एथलीट
अब खेलों में और सुविधाओं का इजाफा करना होगा। अगर ऐसा हुआ तो आने वाले ओलंपिक में देश की झोली में ज्यादा मेडल आएंगे।
- युसरा इरम, एथलीट
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खेलों के महाकुंभ ओलंपिक में पीवी सिंधु, मीराबाई चानू और लवलीना ने पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है। लेकिन पदक तालिका में भारत का निचला स्थान खेल प्रेमियों को निराश करता है। इसका प्रमुख कारण खेलों के प्रति सरकारी तंत्र और खेल विभाग का उदासीन रवैया है। इसका उदाहरण, जिले का महारानी अहिल्याबाई होल्कर स्पोर्ट्स स्टेडियम है, जहां ज्यादातर खेलों में न तो कोच हैं और न ही सुविधाएं हैं। बॉक्सिंग रिंग बदहाल है। धावकों के लिए स्थायी एथलेटिक्स ट्रैक भी नहीं है। शूटिंग रेंज, टेबल टेनिस, टेनिस, बास्केटबाल कोर्ट उखड़ चुके हैं। ऐसे में किसी खिलाड़ी से मेडल जीतने की उम्मीद करना बेमानी है।
महारानी अहिल्याबाई होल्कर स्पोर्ट्स स्टेडियम में हॉकी, फुटबॉल, धावक एक ही मैदान पर एक साथ प्रैक्टिस करते हैं। ऐसे में उन्हें एक-दूसरे से बचकर खेलना होता है। जब वह कहीं मैच खेलते हैं तो इस बचाव का दबाव उनके खेल पर भी दिखता है। कोरोना संक्रमण के चलते मार्च 2020 में स्टेडियम बंद हो गया था। जनवरी-2021 में खुला लेकिन मार्च में फिर बंद हो गया। जुलाई-2021 में कोविड प्रोटोकाल के तहत स्टेडियम को खोला गया है। लेकिन खेलों में कोच न होने से खिलाड़ी मायूस हैं। खिलाड़ियों का भी कहना है कि यदि उन्हें सुविधाएं और स्तरीय प्रशिक्षण मिले तो वह भी देश के लिए पदक जीत सकते हैं।
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इन खेलों में नहीं हैं कोच
हॉकी, फुटबॉल, टेनिस, कुश्ती, बॉक्सिंग, एथलेटिक्स, क्रिकेट, शूटिंग, हैंडबॉल, वालीबॉल, ताइक्वांडो आदि।
केवल दो खेलों में हैं कोच
इस बार खेल निदेशालय की बजाय एजेंसी ने अंशकालिक कोच की नियुक्ति की है, जिसमें मीनाक्षी रानी गौड़ भारोत्तोलन की अंशकालिक कोच हैं। खेल प्रोत्साहन समिति की ओर से बैडमिंटन में विकास चौहान कोच हैं। हालांकि, उप क्रीड़ा अधिकारी विजय सिंह टेबल टेनिस विशेषज्ञ हैं।
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स्वीमिंग पूल की दरकार
स्टेडियम में स्वीमिंग पूल की दरकार वर्षों से है। कई बार स्वीमिंग पूल के लिए क्रीड़ा अधिकारी ने जमीन तलाश की, लेकिन बात नहीं बनी। जिले के दौरे पर आए तत्कालीन खेल व युवा विकास मंत्री चेतन चौहान से भी स्वीमिंग पूल के लिए खेल प्रेमियों ने बात रखी थी।
खिलाड़ियों का पंजीकरण
जुलाई-2021 में स्टेडियम खुलने के बाद एथलेटिक्स, टेबल टेनिस, जिम में 4-4, भारोत्तोलन व बैडमिंटन में 15-15 खिलाड़ियों का पंजीकरण है। जनवरी-2019 से लेकर दिसंबर 2019 में हॉकी, बॉक्सिंग, एथलेटिक्स, टेनिस, टेबल टेनिस, फुटबाल, कुश्ती, शूटिंग सहित अन्य खेलों में 375 से ज्यादा खिलाड़ी पंजीकृत थे।
स्टेडियम में अंशकालिक कोच व खेलों में सुविधाओं के संबंध में खेल निदेशालय प्रस्ताव मांगता है। उसी के अनुरूप हम प्रस्ताव भेज देते हैं। खेल निदेशालय ही तय करता है कि संबंधित जिले को कितने कोच व सुविधाएं देनी हैं।
- रानी प्रकाश, क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी
मेडल जीतने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर महत्वपूर्ण नहीं, बल्कि खिलाड़ियों का समर्पण जरूरी है। ट्रेनिंग के लिए सिस्टम अच्छा होना चाहिए। अगर इंफ्रास्ट्रक्चर महत्वपूर्ण होता तो तलवारबाजी, नौकायन में ओलंपिक के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाते।
- मजहर उल कमर, अध्यक्ष, जिला ओलंपिक संघ
खेल सुविधाएं बढ़ेंगी तो बेहतर परिणाम सामने आएंगे। खिलाड़ी पूरी निष्ठा और ईमानदारी से खेलते हैं। बस, उन्हें बेहतर मार्गदर्शन और सुविधाओं की जरूरत है।
- पूर्णिमा शर्मा, एथलीट
अब खेलों में और सुविधाओं का इजाफा करना होगा। अगर ऐसा हुआ तो आने वाले ओलंपिक में देश की झोली में ज्यादा मेडल आएंगे।
- युसरा इरम, एथलीट

महारानी अहिल्याबाई होल्कर स्पोर्ट्स स्टेडियम में अभ्यास करते धावक। - फोटो : CITY OFFICE