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हिंदू जागरण मंच का फरमान: स्कूलों में न मनाएं क्रिसमस

Mon, 18 Dec 2017 01:33 AM IST
ब्यूूराे, अमर उजाला, अलीगढ़।
ब्यूूराे, अमर उजाला, अलीगढ़। Updated Mon, 18 Dec 2017 01:33 AM IST
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Hindu Jagaran Forum Decree: Do not Celebrate Christmas in Schools
निजी विद्यालयों को नोटिस जारी करते हिंदू जागरण मंच के नेता - फोटो : Amar Ujala
हिंदू जागरण मंच के नेताओं ने महानगर के उन विद्यालयों में 25 दिसंबर को क्रिसमस का त्यौहार नहीं मनाने का फरमान जारी किया है, जहां हिंदू विद्यार्थियों की बहुलता है। मंच द्वारा इससे संबंधित पत्र भी महानगर के स्कूल संचालकों के पास भेजे जा रहे हैं। इसकी जानकारी मिलने के बाद स्कूल संचालक भी दुविधा में फंसे नजर आ रहे हैं। दूसरी ओर मंच के नेताओं का कहना है कि विद्यालय संचालक इसे चेतावनी समझें या निवेदन, यह उनके ऊपर निर्भर है। 
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कई स्कूल संचालकों का कहना है कि लोग बच्चों को स्कूल में विज्ञान के साथ-साथ धर्म, सभ्यता एवं संस्कृति आदि को समझने एवं सीखने के लिए भेजते हैं, ताकि वह एक अच्छे एवं वैश्विक नागरिक बन सकें। भविष्य में किसी भी देश में नौकरी एवं व्यापार करने जाए तो उसे परेशानी नहीं हो। होली, दीपावली, ईद, क्रिसमस, वैशाखी आदि त्यौहारों पर विद्यालयों में कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं जिसमें बच्चे उत्साह से भाग लेते हैं।
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हिंदू जागरण मंच के नेता तालिबानी फरमान जारी कर स्कूलों में क्रिसमस का त्यौहार मनाने पर रोक लगाने का प्रयास कर रहे हैं। मंच के महानगर अध्यक्ष सोनू सविता, विभाग संयोजक अमित राजा, महानगर महामंत्री पुनीत शर्मा एवं जिला उपाध्यक्ष राजेश पंडित एवं विशाल चौधरी का कहना है कि इससे संबंधित पत्र सभी   विद्यालयों में दो दिनों के अंदर पहुंच जाएगा। विद्यालय संचालक इसे चेतावनी समझें या निवेदन, यह उनके ऊपर निर्भर है। उल्लेखनीय है कि तीन दिन पहले मंच नेताओं ने बैठक कर विद्यालयों में क्रिसमस का त्यौहार मनाने पर रोक लगाने का निर्णय लिया था। अब देखना यह है कि स्कूल संचालक एवं जिला प्रशासन इस फरमान को किस रूप से लेता है।  
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स्कूलों में रूटीन के तहत विभिन्न त्यौहारों को मनाया जाता है। यह शिक्षा का हिस्सा है। देश व व्यक्ति के विकास के लिए जाति व धर्म से ऊपर उठकर सोचना चाहिए। अभी किसी का पत्र नहीं आया है, लेकिन त्यौहार का विरोध उचित नहीं है। बच्चों को अच्छा नागरिक बनाना स्कूलों का ध्येय होता है। 

- प्रवीण अग्रवाल, अध्यक्ष, पब्लिक स्कूल डेवलपमेंट सोसाइटी 
हम बच्चों को कुछ सीखने के लिए स्कूल में भेजते हैं। हमारे बच्चों को यदि विदेश में नौकरी लग जाए और वहां के रिवाजों व संस्कृति को नहीं समझेंगे तो कैसे रह पाएंगे। स्कूलों में कट्टरता पहुंचाना ठीक नहीं है। इससे हमारे बच्चे भी प्रभावित होंगे। यह तालिबानी फरमान ही है।
- अनुराग गुप्ता, प्रभारी, अभिभावक एसोसिएशन 
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