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हिंदी हैं हमः हिंदी से महकता है सारा चमन हमारा...

Fri, 17 Sep 2021 09:52 PM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 17 Sep 2021 09:52 PM IST
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Hindi Hain Hum
कवि सम्मेलन में कविता पाठ करते प्रेम किशोर पटाखा। - फोटो : CITY OFFICE
अमर उजाला हिंदी हैं हम अभियान के तहत कृष्णा इंटरनेशनल स्कूल में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। स्कूल के सभागार में कवियों, कवयित्री व शायरा ने रचना और कलाम पेश करके श्रोताओं को तालियां बजाने पर विवश कर दिया। सम्मेलन की अध्यक्षता स्कूल के निदेशक प्रवीन अग्रवाल ने की।
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बृहस्पतिवार को कवि सम्मेलन में कोविड-19 प्रोटोकाल का पालन किया गया। सभागार में विद्यार्थी एक-दूसरे से दूर-दूर बैठे। उनके चेहरे पर मास्क था। सम्मेलन में कवि प्रेम किशोर पटाखा, शायर जॉनी फॉस्टर, शायरा रिहाना शाहीन, ओज कवि हरीश बेताब व कवयित्री डॉ. ममता वार्ष्णेय ने अपनी रचनाओं में हिंदी की महिमा और जन-जन की भाषा को शामिल किया। सरस्वती के पुत्रों व पुत्रियों ने अपनी रचनाओं पर श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी।
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एएमयू के संगीत विभाग के पूर्व शिक्षक, गीतकार व शायर जॉनी फॉस्टर ने खुदा से मां-बाप के लिए यूं दुआ की ‘शराफत खून में भर दे दिलो को तू वफा दे दे, हमारी नस्ल को या रब अदब शरमो-हया दे दे, मुझे मां-बाप ने पाला बड़ी कुर्बानियां देकर, मेरे हिस्से की सब बरकत, खुशी उनको खुदा दे दे’।
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सभागार में फैली संजीदगी को ठहाकों से तोड़कर हास्य व्यंग्य व बाल कवि प्रेम किशोर पटाखा ने क ख ग घ की स्वरलहरी भी छेड़ते हुए हिंदी की प्रशंसा की ‘हिंदी हैं हम वतन है हिंदोस्ता हमारा, हिंदी से महकता है सारा चमन हमारा, मैं हिंदी हूं, मेरी हिंदी के साथ उर्दू, उर्दू के साथ हिंदी, शृंगार करती सखियां काजल है एक बिंदी’।
हिंदी-उर्दू की जुगलबंदी को मशहूर शायरा रिहाना ने इस तरह बयां किया ‘मैं हिंदी हूं मेरी आंखों में उर्दू का उजाला है, मेरी आवाज दिलकश है मेरा लहजा निराला है, मेरी हर सांस हिंदी है के उर्दू है मेरी धड़कन, के हिंदी-उर्दू वाले दोस्तो ने मुझको पाला है’।
सभागार में बैठे श्रोताओं में ओज रचनाओं से ऊर्जा का संचार करने वाले ओज कवि हरीश बेताब ने हिंदी को लेकर कहा ‘सारे जगत में हिंदी की पहचान है हिंदी, साहित्यकार के लिए सम्मान है हिंदी, मीरा के भजन हों या जायसी की लेखनी, दोनों के लिए एक सा वरदान है हिंदी, भाषा की राजनीति आप कर रहे हैं क्यों, हिंदू नहीं औ न ही मुसलमान है हिंदी’।
सत्य का सारथी अमर उजाला की लोकप्रियता को कवयित्री डॉ. ममता वार्ष्णेय ने यूं प्रस्तुत किया ‘मैं अमर कर दूं उजाला ऐसा इक अखबार हूं, मातृभाषा में समेटे पूरा मैं संसार हूं, लोकहित की बात करना सच बताना काम है, इसलिए तो हर किसी के मैं गले का हार हूं’।

स्कूल में कवि सम्मेलन का सफल आयोजन कराने के लिए अमर उजाला और कवि व कवयित्रियों को धन्यवाद देता हूं। विद्यार्थियों को हिंदी में पारंगत होना चाहिए, ताकि उन्हें हिंदी पढ़ने में कोई परेशानी न हो। हिंदी की तुलना किसी भी भाषा से नहीं हो सकती। इसमें भावनाएं सहजता से व्यक्त की जा सकती हैं।
-प्रवीन अग्रवाल, निदेशक, कृष्णा इंटरनेशनल स्कूल
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