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हिंदी हैं हमः सरकारी दायित्व निभाने के साथ-साथ केडी सिंह कर रहे साहित्य सृजन
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आरटीओ केडी सिंह।
- फोटो : CITY OFFICE
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सरकारी दायित्व बखूबी निभाने के साथ-साथ अलीगढ़ के संभागीय परिवहन अधिकारी (आरटीओ) केडी सिंह साहित्य सृजन में भी खासा दखल रखते हैं। अब तक विभिन्न विधाओं में वे छह पुस्तकें लिख चुके हैं। उनकी सातवीं पुस्तक ‘कंधे’ शीर्षक से उपन्यास के रूप में जल्द सामने आएगी। इलाहाबाद में सरकारी नौकरी के लिए प्रतियोगिताओं की तैयारी करने वाले तीन युवा पात्रों के जीवन संघर्ष पर लिखा यह उपन्यास डिजिटल संस्करण में भी मिलेगा। उपन्यास को ऑडियो के तौर पर सुन सकते हैं और ई-बुक भी पढ़ सकेंगे। ऐसे में यह उपन्यास बड़ी सहजता से युवा पीढ़ी को हिंदी साहित्य की ओर आकर्षित करेगा।
बांदा जिले के पिपहरी गांव में 21 मार्च 1975 को जन्मे केडी सिंह ने उच्च शिक्षा के लिए इलाहाबाद का रुख किया था। पढ़ाई के दौरान उन्होंने कविता, व्यंग्य लेखन आदि के जरिये कई पुरस्कार जीते। केडी सिंह ने बताया कि ‘कंधे’ उपन्यास दरअसल एक लेखक के तौर पर तटस्थ वीडियोग्राफी है, जिसमें वह सिर्फ पात्रों के पीछे चलते रहे हैं। यह कहानी गढ़ी नहीं, बल्कि कही गई है। उन्होंने बताया कि जिंदगी आपके हिसाब से नहीं चलती, बल्कि आपको इसके हिसाब से चलना होता है। इसकी कहानी तीन मुख्य पुरुष पात्रों और एक नायिका की जिंदगी का दस्तावेज है। इसका विमोचन सितंबर में ही होगा।
उन्होंने बताया कि सरकारी नौकरी के लिए इलाहाबाद में प्रतियोगिताओं की तैयारी करने वाले युवा संघर्षभरा जीवन जीते हैं। इस संघर्ष को संजोए हुए यह दस्तावेज पुरानी किताबों के बीच किसी सूखे गुलाब की तरह दबा रह गया। इसके बावजूद, उस फूल की खुशबू कहीं न कहीं इस कहानी के पात्रों के जेहन में तैरती है। जिंदगी की किताब में दबे रह गए इन फूलों को उपलब्ध कराया मेरे मित्र और अग्रज जितेंद्र सिंह ने। वही इस कथा के सूत्रधार भी हैं। इन स्मृति पुष्पों पर, संवेदनाओं का अर्क छिड़ककर मैं इसे एक कहानी के रूप में ढाल सका हूं।
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सम्मान और पुरस्कार
- 1991 में कविता के लिए महाकवि निराला संस्थान इलाहाबाद द्वारा पुरस्कृत।
- 1992 में लेख, निबंध और व्यंग्य लेखन हेतु साहित्यिक संस्था उदीयमान के तत्वावधान में युवा रचनाकार उदीयमान सम्मान।
- 1992 में आकाशवाणी इलाहाबाद से युववाणी कार्यक्रम में कविता पाठ की एक नियमित श्रंखला से जुड़े रहे।
- 1991 से 2003 तक अध्ययन के साथ- साथ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कविता, व्यंग्य व निबंधों का प्रकाशन।
- वर्ष 2004 में प्रकाशित पुस्तक ‘शेष अगले पृष्ठ पर’ के लिए उप्र हिंदी संस्थान द्वारा बालकृष्ण शर्मा नामित पुरस्कार।
- वर्ष 2012 में प्रकाशित व्यंग्य संग्रह हाशिये पर के लिए उप्र हिंदी संस्थान द्वारा शरद जोशी सर्जना सम्मान।
प्रकाशित पुस्तकें
शेष अगले पृष्ठ (व्यंग्य संग्रह), हाशिये पर (व्यंग्य संग्रह), लिखना नया कुछ (कविता एवं गजल संग्रह), होते करते (व्यंग्य संग्रह), एतद्द्वारा (व्यंग्य संग्रह), जब जिंदगी मुस्कुरा दी (संस्मरण)।
नई पीढ़ी को आत्मिक तौर पर जोड़ेगा ‘हिंदी हैं हम’ अभियान
अमर उजाला के ‘हिंदी हैं हम’ अभियान की सराहना करते हुए केडी सिंह गौर ने कहा कि हर भाषा को युगीन परंपराओं और साधनों के साथ समायोजित होना ही होता है। यही एक भाषा की उत्तरजीविता है। आज के युग में तकनीक, मीडिया और संप्रेषण के नए साधनों के साथ हिंदी भाषा का प्रसार उत्साहजनक है। अमर उजाला के हिंदी अभियान से न केवल हिंदी को, बल्कि हिंदी भाषियों को भी बल मिला है। यह महा अभियान नई पीढ़ी को भी हिंदी भाषा से आत्मिक तौर पर जोड़ेगा, ऐसा पूर्ण विश्वास है।
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बांदा जिले के पिपहरी गांव में 21 मार्च 1975 को जन्मे केडी सिंह ने उच्च शिक्षा के लिए इलाहाबाद का रुख किया था। पढ़ाई के दौरान उन्होंने कविता, व्यंग्य लेखन आदि के जरिये कई पुरस्कार जीते। केडी सिंह ने बताया कि ‘कंधे’ उपन्यास दरअसल एक लेखक के तौर पर तटस्थ वीडियोग्राफी है, जिसमें वह सिर्फ पात्रों के पीछे चलते रहे हैं। यह कहानी गढ़ी नहीं, बल्कि कही गई है। उन्होंने बताया कि जिंदगी आपके हिसाब से नहीं चलती, बल्कि आपको इसके हिसाब से चलना होता है। इसकी कहानी तीन मुख्य पुरुष पात्रों और एक नायिका की जिंदगी का दस्तावेज है। इसका विमोचन सितंबर में ही होगा।
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उन्होंने बताया कि सरकारी नौकरी के लिए इलाहाबाद में प्रतियोगिताओं की तैयारी करने वाले युवा संघर्षभरा जीवन जीते हैं। इस संघर्ष को संजोए हुए यह दस्तावेज पुरानी किताबों के बीच किसी सूखे गुलाब की तरह दबा रह गया। इसके बावजूद, उस फूल की खुशबू कहीं न कहीं इस कहानी के पात्रों के जेहन में तैरती है। जिंदगी की किताब में दबे रह गए इन फूलों को उपलब्ध कराया मेरे मित्र और अग्रज जितेंद्र सिंह ने। वही इस कथा के सूत्रधार भी हैं। इन स्मृति पुष्पों पर, संवेदनाओं का अर्क छिड़ककर मैं इसे एक कहानी के रूप में ढाल सका हूं।
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सम्मान और पुरस्कार
- 1991 में कविता के लिए महाकवि निराला संस्थान इलाहाबाद द्वारा पुरस्कृत।
- 1992 में लेख, निबंध और व्यंग्य लेखन हेतु साहित्यिक संस्था उदीयमान के तत्वावधान में युवा रचनाकार उदीयमान सम्मान।
- 1992 में आकाशवाणी इलाहाबाद से युववाणी कार्यक्रम में कविता पाठ की एक नियमित श्रंखला से जुड़े रहे।
- 1991 से 2003 तक अध्ययन के साथ- साथ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कविता, व्यंग्य व निबंधों का प्रकाशन।
- वर्ष 2004 में प्रकाशित पुस्तक ‘शेष अगले पृष्ठ पर’ के लिए उप्र हिंदी संस्थान द्वारा बालकृष्ण शर्मा नामित पुरस्कार।
- वर्ष 2012 में प्रकाशित व्यंग्य संग्रह हाशिये पर के लिए उप्र हिंदी संस्थान द्वारा शरद जोशी सर्जना सम्मान।
प्रकाशित पुस्तकें
शेष अगले पृष्ठ (व्यंग्य संग्रह), हाशिये पर (व्यंग्य संग्रह), लिखना नया कुछ (कविता एवं गजल संग्रह), होते करते (व्यंग्य संग्रह), एतद्द्वारा (व्यंग्य संग्रह), जब जिंदगी मुस्कुरा दी (संस्मरण)।
नई पीढ़ी को आत्मिक तौर पर जोड़ेगा ‘हिंदी हैं हम’ अभियान
अमर उजाला के ‘हिंदी हैं हम’ अभियान की सराहना करते हुए केडी सिंह गौर ने कहा कि हर भाषा को युगीन परंपराओं और साधनों के साथ समायोजित होना ही होता है। यही एक भाषा की उत्तरजीविता है। आज के युग में तकनीक, मीडिया और संप्रेषण के नए साधनों के साथ हिंदी भाषा का प्रसार उत्साहजनक है। अमर उजाला के हिंदी अभियान से न केवल हिंदी को, बल्कि हिंदी भाषियों को भी बल मिला है। यह महा अभियान नई पीढ़ी को भी हिंदी भाषा से आत्मिक तौर पर जोड़ेगा, ऐसा पूर्ण विश्वास है।

आरटीओ केडी सिंह द्वारा लिखा गया कंधे उपन्यास का कवर फोटो।- फोटो : CITY OFFICE