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अरे यहां तो मात्र दो सब्जियां हैं...
आशीष श्रीवास्तव
Updated Wed, 16 Nov 2016 01:38 AM IST
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शादी विवाह हो और तरह-तरह के व्यंजन न हों, ऐसा तो हो ही नहीं सकता। कई खानपान के शौकीन तो इंतजार करते हैं कि किसी परिचित एवं रिश्तेदार की शादी का न्योता आए तो वे अपने शौक को पूरा करें। लेकिन बड़ी करंसी बंद होने व बैंकों से नकदी की कम निकासी समेत अन्य दिक्कतों ने शादी विवाहों की शान दावत का मजा भी किरकिरा कर दिया है। परेशान मेजबान व्यंजनों में कटौती पर मजबूर हैं तो मेहमान भी हताश हैं।
सोमवार को रामघाट रोड स्थित एक वैंक्युट हाल का दृश्य। दावत खाकर अपने परिवार के साथ लौट रहे सज्जन अपनी पत्नी से कह रहे हैं कि यार दावत में तो कुछ था ही नहीं। मैं तो भूखा रह गया। दो कायदे की सब्जी थी तो मिठाई के भी मात्र एक दो आइटम।
लगता है ....साहब ने सारा पैसा दावत के व्यंजनों में कटौती कर ही बचाया है। पास से निकल रहे एक और सज्जन बोले सही कह रहे हैं। मैं तो सोचकर आया था कि आज कम से कम मिठाइयों का मजा लूंगा। लेकिन गाजर के हलवे के सिवाय कुछ था ही नहीं जो गला तर कर सके।
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अग्रवाल साहब ने ढाई महीने पहले बुकिंग की थी। उस समय जो मैन्यु बना था। उसे ऐन मौके पर कटवा दिया। गीली व सूखी कुल मिलाकर सात-आठ तरह की सब्जियों के बजाय मात्र चार सब्जियां बनवाईं और मिठाई में सोन हलुआ, सफेद रसगुल्ला व गाजर का हलवा ही रखा।
बाल किशन, एटा चुंगी, हलवाई
दो महीने पहले बुकिंग कराने वाले साहब अब व्यंजनों के साथ हमारे पैसों में भी कटौती की बात कह रहे हैं। मैंने तो साफ कह दिया है शादी आपके यहां है। बराती एवं घरातियों को चाहे जो खिलाओ। पर हमारी मेहनत की कमाई में कटौती नहीं चलेगी।
सुरेश, शंकर विहार हलवाई
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सोमवार को रामघाट रोड स्थित एक वैंक्युट हाल का दृश्य। दावत खाकर अपने परिवार के साथ लौट रहे सज्जन अपनी पत्नी से कह रहे हैं कि यार दावत में तो कुछ था ही नहीं। मैं तो भूखा रह गया। दो कायदे की सब्जी थी तो मिठाई के भी मात्र एक दो आइटम।
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लगता है ....साहब ने सारा पैसा दावत के व्यंजनों में कटौती कर ही बचाया है। पास से निकल रहे एक और सज्जन बोले सही कह रहे हैं। मैं तो सोचकर आया था कि आज कम से कम मिठाइयों का मजा लूंगा। लेकिन गाजर के हलवे के सिवाय कुछ था ही नहीं जो गला तर कर सके।
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अग्रवाल साहब ने ढाई महीने पहले बुकिंग की थी। उस समय जो मैन्यु बना था। उसे ऐन मौके पर कटवा दिया। गीली व सूखी कुल मिलाकर सात-आठ तरह की सब्जियों के बजाय मात्र चार सब्जियां बनवाईं और मिठाई में सोन हलुआ, सफेद रसगुल्ला व गाजर का हलवा ही रखा।
बाल किशन, एटा चुंगी, हलवाई
दो महीने पहले बुकिंग कराने वाले साहब अब व्यंजनों के साथ हमारे पैसों में भी कटौती की बात कह रहे हैं। मैंने तो साफ कह दिया है शादी आपके यहां है। बराती एवं घरातियों को चाहे जो खिलाओ। पर हमारी मेहनत की कमाई में कटौती नहीं चलेगी।
सुरेश, शंकर विहार हलवाई