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Atresia Ani: बछिया के नहीं था मल द्वार, पशु शल्य चिकित्सक डॉ विराम ने ऐसे बचाई उसकी जान
Fri, 16 Feb 2024 12:07 AM IST
चमन शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: चमन शर्मा
Updated Fri, 16 Feb 2024 12:07 AM IST
सार
एक बछिया पैदा हुई। दो दिन गुज़र गए, तो उन्होंने देखा कि बछिया पीछे मल द्वार की तरफ बार-बार जोर लगा रही थी। ऐसा प्रतीत हो रहा था कि उसे मल त्याग करना है। उन्होंने उसकी पूँछ उठाकर देखा, तो हैरान रह गए कि उसका मल द्वार ही नहीं था। बछिया काफी परेशान हो रही थी, साथ ही पेट भी फूल रहा था। उसको इलाज के लिए कई जगह दिखाया, पर कोई फायदा नहीं हुआ।
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सर्जरी के बाद बछिया, साथ में चिकित्सक और पशु पालक
- फोटो : स्वयं
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विस्तार
एक बछिया पैदा हुई। दो दिन बाद ही उसकी हालत बिगड़ने लगी। पशु पालक ने देखा कि बछिया के जन्माजात मल द्वार ही नहीं था। पशु पालक बछिया को पशु शल्य चिकित्सक के पास ले गया। पशु शल्य चिकित्सक डॉ विराम वार्ष्णेय ने बछिया की शल्य चिकित्सा कर उसकी जान बचाई।
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अलीगढ़ के पशु शल्य चिकित्सक डॉ विराम वार्ष्णेय ने नगला डालचंद निवासी सोनू की पांच दिन की बछिया में एट्रेसिया एनी समस्या का सफल शल्य चिकित्सा से निदान किया। पशु मालिक सोनू ने बताया कि एक बछिया पैदा हुई। दो दिन गुज़र गए, तो उन्होंने देखा कि बछिया पीछे मल द्वार की तरफ बार-बार जोर लगा रही थी। ऐसा प्रतीत हो रहा था कि उसे मल त्याग करना है। उन्होंने उसकी पूँछ उठाकर देखा, तो हैरान रह गए कि उसका मल द्वार ही नहीं था। बछिया काफी परेशान हो रही थी, साथ ही पेट भी फूल रहा था। उसको इलाज के लिए कई जगह दिखाया, पर कोई फायदा नहीं हुआ।
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पशु पालक बछिया को डॉ विराम वार्ष्णेय के पास लेकर गए। डॉ विराम वार्ष्णेय ने दो घंटे की कड़ी मेहनत कर सर्जरी द्वारा बछिया का मल द्वारा बना दिया और सर्जरी के तुरंत बाद से ही बछिया ने मल त्याग करना शुरू कर दिया। जिससे बछिया की जान बच गई। डॉ विराम वार्ष्णेय ने बताया कि यदि इसका इलाज नहीं किया जाता, तो पेट में गड़बड़ी, आंतों में संक्रमण और मृत्यु भी हो सकती थी। एट्रेसिया एनी भ्रूण के विकास के दौरान होता है, जब गुदा द्वार ठीक से नहीं बन पाता है। जिसके कारण नवजात मल त्यागने में असमर्थ हो जाता है, जिससे आंतों के भीतर अपशिष्ट पदार्थ जमा हो जाता है।
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डॉ विराम वार्ष्णेय ने बताया कि एट्रेसिया एनी, एक जन्मजात स्थिति है, जो गुदा की अनुपस्थिति या बंद होना है। यह नवजात बछड़ों के स्वास्थ्य और अस्तित्व के लिए एक महत्वपूर्ण खतरा पैदा करती है। यह एक दुर्लभ स्थिति है। गंभीर जटिलताओं को रोकने और प्रभावित जानवर की भलाई सुनिश्चित करने के लिए शीघ्र इसकी पहचान होना जरूरी है।