AMU: यूनिवर्सिटी के अल्पसंख्यक दर्जे को लेकर सुनवाई 12 अक्टूबर को, एएमयू इंतजामिया कर रही मंथन
न्यायालय में एएमयू के अल्पसंख्यक दर्जे के मामले में एएमयू बनाम डॉ. नरेश अग्रवाल व अन्य के बीच वाद चल रहा है। भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में सात सदस्यीय पीठ इसकी सुनवाई कर रही है।
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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के अल्पसंख्यक दर्जे को लेकर उच्चतम न्यायालय में सात जजों की पीठ 12 अक्तूबर को सुनवाई करेगी। इस मसले को लेकर सोमवार को एएमयू इंतजामिया के लोगों ने घंटों मंथन किया।
न्यायालय में एएमयू के अल्पसंख्यक दर्जे के मामले में एएमयू बनाम डॉ. नरेश अग्रवाल व अन्य के बीच वाद चल रहा है। भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में सात सदस्यीय पीठ इसकी सुनवाई कर रही है। रविवार को एएमयू के प्रशासनिक भवन में ईसी सदस्य, कुलपति, कुलसचिव, सभी संकायों के डीन, निदेशक, वित्त अधिकारी, परीक्षा नियंत्रक, डीएसडब्ल्यू सहित अन्य शिक्षकों की बैठक हुई। इसमें न्यायालय में अल्पसंख्यक दर्जे को लेकर चल रहे मामले पर मंथन किया गया। पैरवी के लिए क्या रणनीति होगी, इस पर रायशुमारी ली गई।
फरवरी 2019 में संविधान पीठ को सौंपा था अल्पसंख्यक प्रकरण
सुप्रीम कोर्ट ने एएमयू को अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा देने का प्रकरण फरवरी 2019 में सात सदस्यीय संविधान पीठ को सौंप दिया था। तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एल. नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने शिक्षण संस्थाओं को अल्पसंख्यक दर्जा देने के लिए मापदंड परिभाषित करने का मुद्दा संविधान पीठ को सौंपा। संयुक्त प्रगति गठबंधन (यूपीए) की केंद्र सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के 2006 के फैसले के खिलाफ अपील दायर की थी। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि यह विश्वविद्यालय अल्पसंख्यक संस्थान नहीं है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी हाईकोर्ट के फैसले को अलग से शीर्ष अदालत में चुनौती दे रखी थी।
हलफनामे को चुनौती
एएमयू के पूर्व जनसंपर्क अधिकारी डॉ. राहत अबरार ने बताया कि वर्ष 1981 में एएमयू संस्थान अल्पसंख्यक स्वरूप की बहाली के बाद वर्ष 2004 में मनमोहन सिंह की सरकार की ओर से एक पत्र में कहा गया कि यह अल्पसंख्यक संस्थान है, इसलिए वह अपनी दाखिला नीति में परिवर्तन कर सकता है। तत्कालीन केंद्र सरकार की अनुमति के बाद विश्वविद्यालय ने एमडी-एमएस के विद्यार्थियों के लिए प्रवेश नीति बदलकर आरक्षण प्रदान किया। यूनिवर्सिटी के खिलाफ पीड़ित डॉ. नरेश अग्रवाल व अन्य उच्च न्यायालय इलाहाबाद चले गए। एकल पीठ का फैसला विवि के खिलाफ आया। युगल पीठ का फैसला भी विवि के खिलाफ था। उसके बाद विवि ने उच्चतम न्यायालय की शरण ली, जहां आदेश दिया गया कि जब तक कोई सुबूत नहीं मिलता, तब तक यथा स्थिति बनी रहेगी, लेकिन भाजपा सरकार ने एएमयू पक्ष में दाखिल हलफनामे को चुनौती दी।
पैनल की उठी मांग
एएमयू के अल्पसंख्यक दर्जे को लेकर बुलाई गई बैठक में कुलपति पैनल की मांग उठी। साथ ही कुछ शिक्षकों को उनके विभाग को संबोधित करके बुलाया गया था, जबकि वह शिक्षक संघ अध्यक्ष और सचिव हैं। इसको लेकर भी मुद्दा उठा।