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हाथरस : देश के लिए किया सबकुछ कुर्बान, आज तक नहीं मिला सम्मान

Fri, 05 Aug 2022 12:15 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 05 Aug 2022 12:15 AM IST
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Hathras: sacrificed everything for the country, till date not received respect
राजा महेंद्र प्रताप का फाइल फोटो। संवाद - फोटो : MURSAN
रवि शर्मा
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मुरसान। जिस व्यक्ति ने देश की आजादी के लिए अपना सबकुछ न्योछावर कर दिया उन्हें आज तक वह सम्मान नहीं मिला, जिसके वह हकदार थे। आजाद हिंद के सपने को साकार करने के लिए राजा महेंद्र प्रताप ने अपना काफी वक्त विदेशों में गुजारा। वहां से आजादी के लिए हमेशा संघर्षरत रहे। आजादी के 75 वर्ष पूरा होने के उपलक्ष्य में उनके प्रपौत्र कुंवर चरत प्रताप ने अब उन्हें भारत रत्न देने की मांग की है।
चरत प्रताप ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह जैसे क्रांतिकारियों ने देश के लिए अपनी कुर्बानियां दी तो राजा साहब ने जिंदगी भर यातनाएं सहन कर देश की खातिर संघर्ष को चुना था। वह चाहते तो अंग्रेजों के प्रस्ताव को चुन कर अपनी जिंदगी को बेहतर ढंग से गुजार सकते थे, लेकिन सारे प्रलोभनों को त्याग कर उन्होंने देश की आजादी के लिए संघर्ष किया।
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अंग्रेजी हुकूमत के अत्याचार और दुराचारों को देखकर बचपन से ही उन्होंने आजाद भारत का स्वप्न देखा था। आजाद भारत के लिए हजारों देश भक्तों ने अपनी जिंदगियां न्यौछावर की। सुभाषचंद्र बोस से मिलकर ही उन्होंने आजाद हिंद की नींव रखी थी और आजादी की मशाल लाए।
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विदेश में ही रहकर उन्होंने आजाद भारत की पहली सरकार का गठन किया। जिसके स्वयं राष्ट्रपति बने। स्वतंत्रता के बाद वह स्वदेश लौटे और आजाद भारत में लोकतंत्र की आधारशिला में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। देश और समाज की सेवा करते हुए वह वर्ष 1979 में पंचतत्व में विलीन हो गए। संवाद
अंग्रेज अफसर ने दी थी राजा बहादुर की उपाधि
राजा महेंद्र प्रताप का जन्म एक दिसंबर 1886 को मुरसान में नरेश बहादुर घनश्याम सिंह के यहां हुआ था। बाद में उन्हें हाथरस के राजा हरिनारायण सिंह ने गोद ले लिया। पिता के देहांत के बाद मात्र 20 वर्ष की उम्र में हाथरस रियासत के राजा के रूप में उनकी ताजपोशी हुई। उनके बेबाक विचार और अंदाज के कारण ही अंग्रेज अफसर ने उन्हें राजा बहादुर की उपाधि से नवाजा था। वृंदावन में महाराज दयाराम के महल में प्रेम महाविद्यालय की स्थापना कर उन्होंने औद्योगिक शिक्षालय खुलने के संकल्प को पूर्ण कर दिया था। बाद में वह आजादी की लड़ाई में कूद गए और उनके 32 वर्ष विदेश में आजादी की पहल करने में गुजर गए।

दादा जी ने हमेशा संघर्ष और सच्चाई को दिया महत्व
मेरे दादा जी ने अपने जीवन में संघर्ष और सत्यता को सबसे ज्यादा महत्व दिया। अगर उनके विचारों पर हमें चलना है तो सत्य के रास्ते पर चलाना होगा। जो कि रास्ता कठिन हो सकता है, लंबा हो सकता है, समय लग सकता है। लेकिन सत्य का रास्ता ही सबसे बेहतर रास्ता है। मैं इसी पर चल रहा हूं। मैं महसूस कर रहा हूं कि वृंदावन में प्रेम महाविद्यालय का दुरुपयोग हो रहा है। पुरानी संस्थाओं को पावर और पैसे से लोग कब्जा करना चाहते हैं। उसका विरोध कर रहा हूं। हमने अलीगढ़ यूनिवर्सिटी (एएमयू) को जमीन दान दी है। दान देते हुए मैंने यह नहीं सोचा कि यह कि समाज के लिए जा रही है और क्यों जा रही है। हाथरस जिले के लिए कुछ जमीनों में कार्य कर रहा हूं। जल्द ही वह फ्री हो जाएंगी तो शिक्षा के लिए यूनिवर्सिटी बनाने का काम करेंगे। दादा जी ने बहुत महान कार्य किए हैं। उनके लिए भारत रत्न की मांग करते चले आ रहे हैं। उन्हें भारत रत्न मिलता है तो उनका सम्मान होगा। मुरसान के सादाबाद रोड़, ब्लॉक रोड़ के निकट में राजा महेंद्र प्रताप पार्क बनाने के लिए पहले से ही में डीएम से मांग कर चुका हूं। सादाबाद क्षेत्र के गांव मई में राजा महेंद्र प्रताप पार्क बनाने के लिए काम चल रहा है। संवाद
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