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हाथरस के स्कूल में कत्ल: एक और नया खुलासा, दांव पर थी बच्चों की जिंदगी, रात में हॉस्टल में आते थे तांत्रिक
Sun, 29 Sep 2024 01:24 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 29 Sep 2024 01:24 PM IST
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Hathras Murder Case
- फोटो : अमर उजाला
कृतार्थ तो कत्ल हो गया...पर बात यहीं खत्म होने वाली नहीं थी। पुलिस पूछताछ में पता चला एक के बाद एक कई बलि देने का मंसूबा था। अगर पहले ही कत्ल में मामला खुल न जाता तो और अनर्थ होता।
Hathras Murder
- फोटो : अमर उजाला
हॉस्टल में मौजूदा समय में 24 बच्चे रह रहे हैं। इनमें कुछ कक्षा दो और कुछ कक्षा पांच व आठ तक के छात्र हैं। तुरसेन गांव निवासी कृष्ण का बेटा कृतार्थ कक्षा दो का छात्र था। कृतार्थ की बहन युविका यहां एलकेजी में पढ़ रही है। लेकिन वह बस से रोज घर आती जाती है। बच्चों ने जो पुलिस को बयान दिए और आरोपियों ने जो पूछताछ में स्वीकार किया है उसके मुताबिक प्रबंधक दिनेश बघेल के पिता जो तांत्रिक हैं वह अक्सर रात को अपने साथ कुछ तांत्रिक लेकर स्कूल में आते थे। वह बच्चों के हॉस्टल में भी जाते थे। प्रबंधक के कमरे में देर रात तक तंत्र मंत्र की क्रिया होती थी।
Hathras Murder Case
- फोटो : अमर उजाला
बच्चों ने बताया कि रात को अक्सर प्रबंधक के कमरे से काफी धुआं आता था। एक बार इसकी जानकारी जब हमने शिक्षकों को दी तो डांटा गया था। इतना ही नहीं रात के समय किसी को भी हॉल से बाहर जाने की अनुमति नहीं थी। कभी-कभी तो काफी डर भी लगता था। बच्चों ने इसकी जानकारी अपने परिवार वालों को भी दी थी।
गिरफ्तार आरोपियों ने पुलिस को बताया कि यहां तीन से चार बच्चों की बलि देने की योजना थी। जसोदन उन लोगों से कहता था कि जो भी इसमें शामिल रहेगा उसका भाग्य बदल जाएगा। पैसे की कोई कमी नहीं रहेगी। लिहाजा वह लोग भी बातों में आ गए।
गिरफ्तार आरोपियों ने पुलिस को बताया कि यहां तीन से चार बच्चों की बलि देने की योजना थी। जसोदन उन लोगों से कहता था कि जो भी इसमें शामिल रहेगा उसका भाग्य बदल जाएगा। पैसे की कोई कमी नहीं रहेगी। लिहाजा वह लोग भी बातों में आ गए।
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Hathras Murder Case
- फोटो : अमर उजाला
पैसा तो बेकार गया, अब बच्चों का भविष्य खराब होने की भी चिंता
गांव रसगवां के डीएल पब्लिक स्कूल में आसपास के 20 गांवों के करीब 700 बच्चे पढ़ते थे। गांवों के अलावा जिला अलीगढ़, सिकंदराराऊ, मथुरा एवं राजस्थान के बच्चे भी पढ़ते थे। अभिभावकों को बच्चों की पढ़ाई की चिंता सता रही है। इनमें से कुछ अभिभावकों ने स्कूल को पूरे साल की फीस का अग्रिम भुगतान कर दिया था।
अभिभावकों का कहना है कि उन्होंने इस स्कूल की किताब और यूनिफॉर्म दिलवा दी है और पूरे साल की फीस एकमुश्त जमा कर दी। अब किसी दूसरे स्कूल में प्रवेश दिलाना होगा तो वहां भी पूरे साल की फीस जमा करनी होगी। रसगवां निवासी बलवीर का कहना है कि उनके नाती एवं नातिन दो बच्चे इस स्कूल में पढ़ते थे।
गांव रसगवां के डीएल पब्लिक स्कूल में आसपास के 20 गांवों के करीब 700 बच्चे पढ़ते थे। गांवों के अलावा जिला अलीगढ़, सिकंदराराऊ, मथुरा एवं राजस्थान के बच्चे भी पढ़ते थे। अभिभावकों को बच्चों की पढ़ाई की चिंता सता रही है। इनमें से कुछ अभिभावकों ने स्कूल को पूरे साल की फीस का अग्रिम भुगतान कर दिया था।
अभिभावकों का कहना है कि उन्होंने इस स्कूल की किताब और यूनिफॉर्म दिलवा दी है और पूरे साल की फीस एकमुश्त जमा कर दी। अब किसी दूसरे स्कूल में प्रवेश दिलाना होगा तो वहां भी पूरे साल की फीस जमा करनी होगी। रसगवां निवासी बलवीर का कहना है कि उनके नाती एवं नातिन दो बच्चे इस स्कूल में पढ़ते थे।
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Hathras Murder Case
- फोटो : अमर उजाला
अब देखते हैं कि कब तक यह स्कूल खुलता है। यदि स्कूल को खुलने में समय लगता है तो किसी अन्य स्कूल में उनका दाखिला कराएंगे। इसी गांव के सोनू का कहना है कि उनका बच्चा शौर्य कक्षा पांच में पढ़ता था। वह तीन साल से इस स्कूल का छात्र था। अब उसे सादाबाद भेजने का विचार बना रहा हूं।
आर्थिक हानि तो हो गई है। इसी गांव निवासी अंकित का कहना है कि उन्होंने तो इसी साल इस स्कूल में बच्चे का दाखिला कराया था। अब यह घटना घटित हो गई। अब किसी दूसरे स्कूल में उसको प्रवेश दिलाना पड़ेगा।। इस स्कूल में दाखिला कराने पर पैसा खर्च हुआ, अब दूसरे स्कूल में भी पैसा देना पड़ेगा।
आर्थिक हानि तो हो गई है। इसी गांव निवासी अंकित का कहना है कि उन्होंने तो इसी साल इस स्कूल में बच्चे का दाखिला कराया था। अब यह घटना घटित हो गई। अब किसी दूसरे स्कूल में उसको प्रवेश दिलाना पड़ेगा।। इस स्कूल में दाखिला कराने पर पैसा खर्च हुआ, अब दूसरे स्कूल में भी पैसा देना पड़ेगा।