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गुड्डू ने 25 साल में चार पार्टी बदलीं, एक बार जीते जिला पंचायत अध्यक्षी
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अलीगढ़ की सियासी दुनिया में चर्चित नाम पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष तेजवीर सिंह गुड्डू एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार गैंगेस्टर के तहत हुई उनकी गिरफ्तारी चर्चा में है। बीते ढाई दशक से राजनीति में सक्रिय तेजवीर सिंह ने चार पार्टियां बदलीं, लेकिन वह सिर्फ एक बार ही जिला पंचायत अध्यक्ष बन पाए। बाकी चुनावों में उनको सफलता नहीं मिली। इन चार पार्टियों में सपा, रालोद, भाजपा और प्रसपा शामिल हैं। वर्तमान में वह न तो सपा में न ही प्रसपा में सक्रिय बताए जा रहे हैं। दोनों दलों के प्रमुख स्थानीय नेताओं ने उनके पार्टी में होने से इंकार कर दिया है।
बहरहाल, तेजवीर के राजनीतिक सफर पर गौर करें तो उन्होंने वर्ष 1996 में सक्रिय राजनीति में कदम रखा और इगलास विधानसभा सीट से सपा (चंद्रशेखर के नेतृत्व वाली पार्टी) के उम्मीदवार बने। पहला ही चुनाव हार गए। मूल रूप से क्वार्सी क्षेत्र के सुखरावली के रहने वाले तेजवीर सिंह का कार्यक्षेत्र बेशक अलीगढ़ शहर रहा, लेकिन जाट बाहुल्य इगलास में ससुराल होने और खुद जाट होने के नाते वह इगलास से राजनीति में सक्रिय हुए। इसके बाद वर्ष 2000 जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव रालोद से लड़े, इनके सामने चौ. प्रेम सिंह हार गये थे। जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी संभालने के बाद तेजवीर का सियासी कद और राजनीति में दखल बढ़ गया।
वर्ष 2004 में लोकसभा चुनाव उन्होंने रालोद से टिकट मांगा, लेकिन घोषणा के बाद टिकट काट दिया गया। इससे नाराज तेजवीर समर्थकों ने रालोद मुखिया चौ.अजित सिंह के दिल्ली स्थित आवास पर जमकर हंगामा किया। जिससे अजित सिंह खासे नाराज हुए और उन्होंने तेजवीर सिंह से दूरी बना ली। इसी चुनाव में जब कांग्रेस नेता चौ. बिजेंद्र सिंह चुनाव जीत कर संसद पहुंचे तो इगलास विधानसभा सीट खाली हो गई। उस वक्त तेजवीर सिंह गुड्डू ने अपनी पहली पत्नी नीरा चौधरी को भाजपा के टिकट पर इगलास का उपचुनाव लड़वाया था, हालांकि वह हार गई थीं। रालोद से नाराजगी के कारण तेजवीर सिंह ने भाजपा का दामन थामा था, लेकिन बात नहीं बन पाई।
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एक साल बाद वर्ष 2005 में जिला पंचायत अध्यक्ष पद आरक्षित हुआ तो उन्होंने अपने ही घर परिवार की करीबी विश्वासनीय चंपा देवी को अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ाया। जिसमें चंपा देवी के सामने उतरी संयुक्त मोर्चा की प्रत्याशी रामसखी कठेरिया चुनाव जीतीं और जिला पंचायत अध्यक्ष बनीं।
इसके बाद पूर्व विधायक मलखान सिंह हत्याकांड में जेल चले जाने के कारण तेजवीर सिंह वर्ष 2010 में जिला पंचायत के चुनावों में वे सक्रिय नहीं हो सके। वर्ष 2015 में घर के पांच सदस्यों को उन्होंने जिला पंचायत का चुनाव लड़वाया। जिसमें वह खुद, उनकी दूसरी पत्नी शिखा सिंह, दोनों बेटे दीपक व कार्तिक और दीपक की पत्नी चुनाव लड़ीं। जिसमें दीपक और शिखा जीते, बाकी तीन सदस्य हार गए। इसी चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए पहले दीपक सपा से उम्मीदवार घोषित हुआ, लेकिन बाद में उसका नाम कट गया। सपा ने तत्कालीन छर्रा विधायक ठा. राकेश सिंह की पत्नी जिला पंचायत सदस्य नीतू सिंह को चुनाव लड़वाया, लेकिन वह हार गईं। इसके बाद वर्ष 2019 में प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया के टिकट पर दीपक ने चुनाव लड़ा और हार गया।
न सपा में न प्रसपा में
अलीगढ़। सपा जिलाध्यक्ष गिरीश यादव ने बताया कि वर्तमान में तेजवीर सिंह गुडडू सपा में सक्रिय नहीं हैं। महीनों से उनका पार्टी की किसी गतिविधि से कोई लेना देना नहीं रहा है। इधर, प्रसपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. रक्ष्पाल सिंह ने बताया कि वह प्रसपा में नहीं हैं। उनका बेटा दीपक वर्ष 2019 में प्रसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था उसके बाद से वह भी पार्टी में सक्रिय नहीं है।
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बहरहाल, तेजवीर के राजनीतिक सफर पर गौर करें तो उन्होंने वर्ष 1996 में सक्रिय राजनीति में कदम रखा और इगलास विधानसभा सीट से सपा (चंद्रशेखर के नेतृत्व वाली पार्टी) के उम्मीदवार बने। पहला ही चुनाव हार गए। मूल रूप से क्वार्सी क्षेत्र के सुखरावली के रहने वाले तेजवीर सिंह का कार्यक्षेत्र बेशक अलीगढ़ शहर रहा, लेकिन जाट बाहुल्य इगलास में ससुराल होने और खुद जाट होने के नाते वह इगलास से राजनीति में सक्रिय हुए। इसके बाद वर्ष 2000 जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव रालोद से लड़े, इनके सामने चौ. प्रेम सिंह हार गये थे। जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी संभालने के बाद तेजवीर का सियासी कद और राजनीति में दखल बढ़ गया।
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वर्ष 2004 में लोकसभा चुनाव उन्होंने रालोद से टिकट मांगा, लेकिन घोषणा के बाद टिकट काट दिया गया। इससे नाराज तेजवीर समर्थकों ने रालोद मुखिया चौ.अजित सिंह के दिल्ली स्थित आवास पर जमकर हंगामा किया। जिससे अजित सिंह खासे नाराज हुए और उन्होंने तेजवीर सिंह से दूरी बना ली। इसी चुनाव में जब कांग्रेस नेता चौ. बिजेंद्र सिंह चुनाव जीत कर संसद पहुंचे तो इगलास विधानसभा सीट खाली हो गई। उस वक्त तेजवीर सिंह गुड्डू ने अपनी पहली पत्नी नीरा चौधरी को भाजपा के टिकट पर इगलास का उपचुनाव लड़वाया था, हालांकि वह हार गई थीं। रालोद से नाराजगी के कारण तेजवीर सिंह ने भाजपा का दामन थामा था, लेकिन बात नहीं बन पाई।
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एक साल बाद वर्ष 2005 में जिला पंचायत अध्यक्ष पद आरक्षित हुआ तो उन्होंने अपने ही घर परिवार की करीबी विश्वासनीय चंपा देवी को अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ाया। जिसमें चंपा देवी के सामने उतरी संयुक्त मोर्चा की प्रत्याशी रामसखी कठेरिया चुनाव जीतीं और जिला पंचायत अध्यक्ष बनीं।
इसके बाद पूर्व विधायक मलखान सिंह हत्याकांड में जेल चले जाने के कारण तेजवीर सिंह वर्ष 2010 में जिला पंचायत के चुनावों में वे सक्रिय नहीं हो सके। वर्ष 2015 में घर के पांच सदस्यों को उन्होंने जिला पंचायत का चुनाव लड़वाया। जिसमें वह खुद, उनकी दूसरी पत्नी शिखा सिंह, दोनों बेटे दीपक व कार्तिक और दीपक की पत्नी चुनाव लड़ीं। जिसमें दीपक और शिखा जीते, बाकी तीन सदस्य हार गए। इसी चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए पहले दीपक सपा से उम्मीदवार घोषित हुआ, लेकिन बाद में उसका नाम कट गया। सपा ने तत्कालीन छर्रा विधायक ठा. राकेश सिंह की पत्नी जिला पंचायत सदस्य नीतू सिंह को चुनाव लड़वाया, लेकिन वह हार गईं। इसके बाद वर्ष 2019 में प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया के टिकट पर दीपक ने चुनाव लड़ा और हार गया।
न सपा में न प्रसपा में
अलीगढ़। सपा जिलाध्यक्ष गिरीश यादव ने बताया कि वर्तमान में तेजवीर सिंह गुडडू सपा में सक्रिय नहीं हैं। महीनों से उनका पार्टी की किसी गतिविधि से कोई लेना देना नहीं रहा है। इधर, प्रसपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. रक्ष्पाल सिंह ने बताया कि वह प्रसपा में नहीं हैं। उनका बेटा दीपक वर्ष 2019 में प्रसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था उसके बाद से वह भी पार्टी में सक्रिय नहीं है।