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जीएसटी का जाल, व्यापारी और व्यापार बेहाल
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राजीव वार्ष्णेय वरिष्ठ चार्टड अकाउंटेंट
- फोटो : CITY OFFICE
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तीन साल पहले एक जुलाई को लागू हुई जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) छोटे प्लेटफार्म पर काम करने वाले व्यापारी और दुकानदारों के लिए गले की फांस बन कर रह गई है। इनका कहना है कि इस प्रणाली से व्यापार करने में सुगमता कम और जटिलता अधिक हुई है। इसके अलावा अभी जीएसटी की जटिलताओं से उबरने की स्थिति बनी भी नहीं थी कि महामारी के चलते हुए लॉकडाउन में कमर तोड़ के रख दी।
दूसरी ओर ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर अपने उत्पाद बेचने वालों का कहना है कि इस कर प्रणाली में ई-कॉमर्स प्लेटफार्म के विषय में सोचा ही नहीं गया है। अगर कोई दुकानदार एक वर्ष में 40 लाख रुपये का टर्नओवर करता है तो वह जीएसटी के दायरे से बाहर रहेगा। लेकिन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर कोई 400 रुपये का भी कारोबार कर लेता है तो वह इस प्रणाली के दायरे में आ जाएगा। यह यह घोर विरोधाभासी स्थिति है। ई-कॉमर्स विक्रेताओं के लिए यह स्थिति कमर तोड़ने वाली है। महामारी के दौरान एक और जहां सरकार डिजिटल गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की बात कह रही है, वहीं, इस प्रणाली के माध्यम से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कारोबार करने वालों के लिए कोई उम्मीद की किरण नहीं है।
क्या कहते हैं व्यापारी
मेरा कॉस्मेटिक का व्यापार है। लेकिन जीएसटी ने व्यापार को पूरी तरह ठप करके रख दिया है। खरीदे गए सामान पर हम अपना टैक्स चुका दें लेकिन अगर दूसरा व्यापारी अपने यहां एंट्री करना भूल जाए तो हमें हमारा रिटर्न नहीं मिलेगा। भला इसमें अब टैक्स देने वाला क्या कर सकता है। जीएसटी के जटिल दांवपेच में कारोबार फंसकर रह गया है। - मोहम्मद शारिक, व्यापारी, आमिर निशा
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मेरा टाई बेल्ट का छोटा सा काम है। स्कूलों को सप्लाई जाती है। जीएसटी के बाद 15 दिन तो रिटर्न भरने में लग जाते हैं और 15 दिन आर्डर पूरा करने में। अब महामारी के चलते सारा काम ठप है। स्कूल खुलने की उम्मीद नजर नहीं आ रही है। ऑर्डर बिल्कुल नहीं आ रहे हैं। लेकिन रिटर्न भी भरना है। कारोबार तबाह हो कर रह गया है। आगे उम्मीद भी नहीं आ रही है। - अब्दुल शफी, व्यापारी
क्या कहते हैं जानकार
यह सही है कि जीएसटी के बाद खासतौर से छोटे और मध्यम दर्जे के व्यापारियों की मुश्किल में बहुत बढ़ गई है। जीएसटी के कुछ प्रावधान बिल्कुल बेतुके और आधारहीन हैं। यह बात सरकार भी मानती आई है और समय-समय पर संशोधन भी कर रही है। भारत में जो जीएसटी लागू की गई है, वह दुनिया की सबसे जटिलतम और खराब स्थिति वाली जीएसटी प्रणाली है। कई प्रावधान अस्पष्ट हैं। सरकार ने इसको इतनी जल्दबाजी और हड़बड़ी के साथ लागू किया है कि जिसके लिए भारत के पास ढांचागत व्यवस्था तक नहीं है और यह कारोबारी सुगमता के लिए नहीं बल्कि कारोबारियों को तबाह करने के लिए जिम्मेदार हो रही है। - राजीव वार्ष्णेय, वरिष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेंट
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दूसरी ओर ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर अपने उत्पाद बेचने वालों का कहना है कि इस कर प्रणाली में ई-कॉमर्स प्लेटफार्म के विषय में सोचा ही नहीं गया है। अगर कोई दुकानदार एक वर्ष में 40 लाख रुपये का टर्नओवर करता है तो वह जीएसटी के दायरे से बाहर रहेगा। लेकिन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर कोई 400 रुपये का भी कारोबार कर लेता है तो वह इस प्रणाली के दायरे में आ जाएगा। यह यह घोर विरोधाभासी स्थिति है। ई-कॉमर्स विक्रेताओं के लिए यह स्थिति कमर तोड़ने वाली है। महामारी के दौरान एक और जहां सरकार डिजिटल गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की बात कह रही है, वहीं, इस प्रणाली के माध्यम से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कारोबार करने वालों के लिए कोई उम्मीद की किरण नहीं है।
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क्या कहते हैं व्यापारी
मेरा कॉस्मेटिक का व्यापार है। लेकिन जीएसटी ने व्यापार को पूरी तरह ठप करके रख दिया है। खरीदे गए सामान पर हम अपना टैक्स चुका दें लेकिन अगर दूसरा व्यापारी अपने यहां एंट्री करना भूल जाए तो हमें हमारा रिटर्न नहीं मिलेगा। भला इसमें अब टैक्स देने वाला क्या कर सकता है। जीएसटी के जटिल दांवपेच में कारोबार फंसकर रह गया है। - मोहम्मद शारिक, व्यापारी, आमिर निशा
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मेरा टाई बेल्ट का छोटा सा काम है। स्कूलों को सप्लाई जाती है। जीएसटी के बाद 15 दिन तो रिटर्न भरने में लग जाते हैं और 15 दिन आर्डर पूरा करने में। अब महामारी के चलते सारा काम ठप है। स्कूल खुलने की उम्मीद नजर नहीं आ रही है। ऑर्डर बिल्कुल नहीं आ रहे हैं। लेकिन रिटर्न भी भरना है। कारोबार तबाह हो कर रह गया है। आगे उम्मीद भी नहीं आ रही है। - अब्दुल शफी, व्यापारी
क्या कहते हैं जानकार
यह सही है कि जीएसटी के बाद खासतौर से छोटे और मध्यम दर्जे के व्यापारियों की मुश्किल में बहुत बढ़ गई है। जीएसटी के कुछ प्रावधान बिल्कुल बेतुके और आधारहीन हैं। यह बात सरकार भी मानती आई है और समय-समय पर संशोधन भी कर रही है। भारत में जो जीएसटी लागू की गई है, वह दुनिया की सबसे जटिलतम और खराब स्थिति वाली जीएसटी प्रणाली है। कई प्रावधान अस्पष्ट हैं। सरकार ने इसको इतनी जल्दबाजी और हड़बड़ी के साथ लागू किया है कि जिसके लिए भारत के पास ढांचागत व्यवस्था तक नहीं है और यह कारोबारी सुगमता के लिए नहीं बल्कि कारोबारियों को तबाह करने के लिए जिम्मेदार हो रही है। - राजीव वार्ष्णेय, वरिष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेंट

अब्दुल शफीक टाई बेल्ट व्यापारी।- फोटो : CITY OFFICE

मोहम्मद शारिक टाई बेल्ट व्यापारी।- फोटो : CITY OFFICE