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Janmashtami 2020: मंगलवार को ग्रहस्थी और बुधवार को वैष्णव जन्माष्टमी के हैं संयोग
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कृष्ण जन्माष्टमी इस बार 11 और 12 अगस्त को दोनों दिन पड़ रही है। शैव (स्मार्त) मत को मानने वाले लोगों के लिए 11 अगस्त को जन्माष्टमी मनाने का मुहूर्त है तो वैष्णव मत से 12 अगस्त को जन्माष्टमी मनाई जाएगी। ऐसे में शहर में दोनों दिन कान्हा जन्मोत्सव की परंपराएं निर्वहन की जाएंगी। श्रद्धालु अपने घरों में तो मंदिरों में पुजारी, सेवायत यह आयोजन करेंगे। शहर में भले ही कोरोना के चलते धूमधाम नहीं रहेगी, लेकिन अधिकांश संख्या में श्रद्धालु हर्षोल्लास के साथ जन्माष्टमी मनाएंगे।
कृष्ण जन्माष्टमी को मनाने वाले दो अलग-अलग संप्रदाय के लोग होते हैं। शैव (स्मार्त) और वैष्णव। इनके विभिन्न मतों के कारण दो तिथियां बनती हैं। वैष्णव'- जिन लोगों ने किसी विशेष संप्रदाय के धर्माचार्य से दीक्षा लेकर कंठी तुलसी माला, तिलक आदि धारण करते हुए तप्त मुद्रा से शंख चक्र अंकित करवाए हों, वे सभी 'वैष्णव' के अंतर्गत आते हैं। जो श्रद्धालु वेद पुराणों के पाठक, आस्तिक, पंच देवों (गणेश, विष्णु, शिव, सूर्य व दुर्गा) के उपासक व गृहस्थी हैं। स्मार्त मत के नियमों का पालन करते हैं। वहीं श्रद्धालु किसी विशेष संप्रदाय के धर्माचार्य से दीक्षा लेकर कंठी, तुलसी माला, तिलक आदि धारण करते हुए तप्त मुद्रा से शंख चक्र अंकित करवाते हैं। वे वैष्णव मतों का पालन करते हैं। वहीं शहर में देखा गया है कि लड्डू गोपाल और कान्हा के उपासक भी वैष्णव नियमों का पालन करते हैं। ऐसे में शैव मत के हिसाब से मंगलवार और वैष्णव मत के अनुसार बुधवार को जन्माष्टमी मान्य रहेगी।
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पूजन का यह है समय
शैव मत के अनुसार मंगलवार मध्य रात्रि में अभिषेक, पूजा पाठ का मुहूर्त रहेगा। जबकि वैष्णव मत के लिए 12 अगस्त दिन बुधवार को शुभ मुहूर्त रात्रि 23:58 से 00:44 मिनट तक करीब 45 मिनट का है। जन्माष्टमी का पारण अगले दिन 13 अगस्त दिन गुरुवार को सूर्योदय के पश्चात ही होगा।
-वैष्णव मत के अनुसार जन्माष्टमी का पर्व 12 अगस्त को मनाया जाएगा। क्योंकि अष्टमी और नवमी तिथि आपस में मिल रही हैं। श्री कृष्ण जन्माष्टमी व्रत उसी दिन उत्तम माना जाता है। जिस दिन अष्टमी और नवमी तिथि का मिलन होता है।
-पं. हृदय रंजन शास्त्री, अध्यक्ष श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान।
- 11 अगस्त को सुबह 09 बजकर 06 मिनट के बाद अष्टमी तिथि आरंभ हो जाएगी। जो 12 अगस्त को 11 बजकर 16 मिनट तक रहेगी। शैव (स्मार्त) मत से 11 अगस्त को जन्माष्टमी का पर्व मनाना सही रहेगा।
-महामंडलेश्वर स्वामी पूर्णानंदपुरी महाराज।
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कृष्ण जन्माष्टमी को मनाने वाले दो अलग-अलग संप्रदाय के लोग होते हैं। शैव (स्मार्त) और वैष्णव। इनके विभिन्न मतों के कारण दो तिथियां बनती हैं। वैष्णव'- जिन लोगों ने किसी विशेष संप्रदाय के धर्माचार्य से दीक्षा लेकर कंठी तुलसी माला, तिलक आदि धारण करते हुए तप्त मुद्रा से शंख चक्र अंकित करवाए हों, वे सभी 'वैष्णव' के अंतर्गत आते हैं। जो श्रद्धालु वेद पुराणों के पाठक, आस्तिक, पंच देवों (गणेश, विष्णु, शिव, सूर्य व दुर्गा) के उपासक व गृहस्थी हैं। स्मार्त मत के नियमों का पालन करते हैं। वहीं श्रद्धालु किसी विशेष संप्रदाय के धर्माचार्य से दीक्षा लेकर कंठी, तुलसी माला, तिलक आदि धारण करते हुए तप्त मुद्रा से शंख चक्र अंकित करवाते हैं। वे वैष्णव मतों का पालन करते हैं। वहीं शहर में देखा गया है कि लड्डू गोपाल और कान्हा के उपासक भी वैष्णव नियमों का पालन करते हैं। ऐसे में शैव मत के हिसाब से मंगलवार और वैष्णव मत के अनुसार बुधवार को जन्माष्टमी मान्य रहेगी।
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पूजन का यह है समय
शैव मत के अनुसार मंगलवार मध्य रात्रि में अभिषेक, पूजा पाठ का मुहूर्त रहेगा। जबकि वैष्णव मत के लिए 12 अगस्त दिन बुधवार को शुभ मुहूर्त रात्रि 23:58 से 00:44 मिनट तक करीब 45 मिनट का है। जन्माष्टमी का पारण अगले दिन 13 अगस्त दिन गुरुवार को सूर्योदय के पश्चात ही होगा।
-वैष्णव मत के अनुसार जन्माष्टमी का पर्व 12 अगस्त को मनाया जाएगा। क्योंकि अष्टमी और नवमी तिथि आपस में मिल रही हैं। श्री कृष्ण जन्माष्टमी व्रत उसी दिन उत्तम माना जाता है। जिस दिन अष्टमी और नवमी तिथि का मिलन होता है।
-पं. हृदय रंजन शास्त्री, अध्यक्ष श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान।
- 11 अगस्त को सुबह 09 बजकर 06 मिनट के बाद अष्टमी तिथि आरंभ हो जाएगी। जो 12 अगस्त को 11 बजकर 16 मिनट तक रहेगी। शैव (स्मार्त) मत से 11 अगस्त को जन्माष्टमी का पर्व मनाना सही रहेगा।
-महामंडलेश्वर स्वामी पूर्णानंदपुरी महाराज।