जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कालेज में सरकारी अस्पतालों में कराई गई मरीजों की जांच रिपोर्ट को नहीं माना जा रहा है। ऐसे मरीज जो सरकारी अस्पतालों से जेएन मेडिकल कालेज जा रहे हैं, उन्हें वहां दोबारा जांच करानी पड़ रही है, जिससे उन्हें परेशानी हो रही है। मेडिकल कालेज का कहना है कि उन्हें सिर्फ अपने यहां पर कराई गई जांच पर ही भरोसा है।
सीटी स्कैन, ब्लड सैंपल, शुगर, ईसीजी आदि अन्य प्रकार की जांच में अब मेडिकल कालेज के डाक्टर सिर्फ अपने यहां की जांच पर भरोसा कर रहे हैं। वहां पहुंच रहे मरीजों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों की जांच रिपोर्ट तो वहां पर देखी तक नहीं जाती है। सरकारी अस्पतालों में जांच नि:शुल्क होती है। मेडिकल कालेज में इसका पैसा देना होता है। इससे मरीजों को दोबारा लाइन में लगने के साथ ही जेब भी ढीली करनी होती है। जांच आदि कराने के बाद इलाज शुरू होने के बाद दवाईयां भी बाहर से खरीदनी पड़ती है। इस संबंध में एएमयू मेडिकल कालेज के अधीक्षक प्रो. हारिस कहते हैं कि दिल्ली में जब यहां से मरीज जाता है तो वह लोग वहां अपनी जांच कराते हैं। इसी तरह मेडिकल कालेज के प्रोफेसर अपने यहां की रिपोर्ट पर भरोसा करते हैं। इसी के चलते मरीज को दोबारा जांच करानी पड़ जाती है। इससे परेशानी हो सकती है लेकिन उपचार बेहद सटीक तरीके से हो पाना संभव होता है।