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गोपाल दास नीरज का 101वां बर्थडे: पुत्र गुंजन की भर आईं आंखें, बोले-घर की दीवारों से आज भी गूंजते पापा के गीत

Sun, 04 Jan 2026 10:54 AM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Sun, 04 Jan 2026 10:54 AM IST
सार

मिलन प्रभात ने वह दौर भी याद किया जब इसी घर में साहित्य के दिग्गजों का आना-जाना लगा रहता था। उन्होंने बताया कि इसी आंगन में उन्होंने राही मासूम रजा और प्रो. शहरयार जैसे महान रचनाकारों को अपने पिता के साथ घंटों साहित्य चर्चा करते देखा था।

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Gopal Das Neeraj 101st birthday
गोपाल दास नीरज के जन्मदिन पर उनके आवास पर पहुंचे उनके पुत्र मिलन प्रभात गुंजन - फोटो : संवाद

विस्तार

स्वप्न झरे फूल से, मीत चुभे शूल से... जैसी कालजयी रचनाएं देने वाले महाकवि पद्मभूषण गोपाल दास नीरज का ''जनकपुरी'' स्थित आवास 3 जनवरी को एक बार फिर यादों के उजाले से भर उठा। मौका था कवि नीरज के 101वें जन्मदिन (4 जनवरी) का, जिसके उपलक्ष्य में उनके पुत्र मिलन प्रभात गुंजन गुरुग्राम से अपने पैतृक घर पहुंचे।

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1960 में नीरज जी द्वारा बनवाए गए इस घर की दीवारें आज भी उनके गीतों की गवाह हैं। अपने बचपन के गलियारों में घूमते हुए मिलन प्रभात भावुक हो उठे। उन्होंने पुरानी यादें साझा करते हुए बताया, पापा को धूप बहुत पसंद थी। बरामदे में जैसे-जैसे धूप आगे बढ़ती थी, उनकी लिखने वाली कुर्सी भी उसी के साथ आगे सरकती जाती थी। आज भी घर के कोने-कोने को देखकर याद आता है कि किस जगह बैठकर उन्होंने किस गीत का मुखड़ा लिखा था। जब पापा घर में घूमते थे, तो अक्सर गुनगुनाते रहते थे। आज भले ही वह हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन साहित्य और गीतों के संसार में जब भी कोई बात होगी, नीरज का नाम सबसे पहले आएगा।

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वह हमारे पास नहीं है, लेकिन हर पल लगता है कि वह हमारे आसपास ही हैं। मेरे लिए उनके परिवार से जुड़ना बेहद सौभाग्यशाली रहा। अलीगढ़ आना यादों के गलियारे में जाने जैसा है। - रंजना सक्सेना, नीरज की पुत्रवधू

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महारथियों का जमावड़ा और गीतों की महफिल

मिलन प्रभात ने वह दौर भी याद किया जब इसी घर में साहित्य के दिग्गजों का आना-जाना लगा रहता था। उन्होंने बताया कि इसी आंगन में उन्होंने राही मासूम रजा और प्रो. शहरयार जैसे महान रचनाकारों को अपने पिता के साथ घंटों साहित्य चर्चा करते देखा था। एएमयू से अपनी शिक्षा पूरी करने वाले मिलन के लिए यह घर सिर्फ ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं, बल्कि गीतों की एक जीवंत पाठशाला है।

नीरज के लिखे कुछ कालजयी गीत

  • कारवां गुजर गया- नई उमर की नई फसल
  • फूलों के रंग से दिल की कलम से - प्रेम पुजारी
  • रंगीला रे तेरे रंग में यूं रंगा है मेरा मन- प्रेम पुजारी
  • लिखे जो खत तुझे, वो तेरी याद में - कन्यादान
  • ए भाई जरा देख के चलो - मेरा नाम जोकर
  • दिल आज शायर है गम आज नगमा है - गैंबलर
  • शोखियों में घोला जाए फूलों का शबाब - प्रेम पुजारी
  • बस यही अपराध मैं हर बार करता हूं - पहचान
  • खिलते हैं गुल यहां, खिल के बिखरने को - शर्मीली
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