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अभी तक शुरू नहीं गैस चलित शवदाह गृह का काम
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नुमाइश मैदान स्थित मुक्तिधाम में गैस चलित शवदाह गृह संयंत्र की स्थापना का कार्य अभी तक शुरू नहीं हुआ है। कोरोना की दूसरी लहर में जब यहां शवों की लाइन लगनी शुरू हुई तो ये मुद्दा उठा, लेकिन इसके बाद भी कोई खास प्रगति नहीं हुई है। अभी तक इसको लेकर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। अगर ये शवदाह गृह बन जाएं तो अज्ञात शवों के साथ निराश्रित और बेसहारा लोगों का अंतिम संस्कार अपेक्षाकृत कम खर्च में किया जा सकेगा।
मुक्तिधाम का कामकाज संभालने वाली संस्था मानव उपकार संस्था के अध्यक्ष विष्णु कुमार बंटी ने बताया कि अभी तक इसको लेकर कोई काम शुरू नहीं हुआ है। किसी अधिकारी ने निरीक्षण भी नहीं किया है। कोरोना संक्रमित शवों का अंतिम संस्कार यहां होने के कारण कोई यहां झांकने भी नहीं आना चाहता है।
इन परिस्थितियों में गैस चलित शव दाह गृह की स्थापना होना फिलहाल मुश्किल है। अमर उजाला ने बीती 26 अप्रैल के अंक में इस गंभीर मुद्दे को उठाया भी था, लेकिन लगभग एक महीना गुजर रहा है। अभी तक कोई काम नहीं हुआ है। 25 अप्रैल को सांसद सतीश गौतम ने कहा था कि वह इसके निर्माण की अड़चन दूर कराएंगे, लेकिन अब उनकी तरफ से कोई नया जवाब नहीं मिला है।
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इस शवदाह गृह के वास्ते दो बार प्रस्ताव बना। इसकी कीमत 25 से बढ़ कर 85 लाख तक पहुंच गई। अप्रैल से 22 मई के बीच यहां लगभग 500 से अधिक शवों का संस्कार हुआ है। इसके बाद भी गैस चलित शवदाह गृह कागजों से जमीन पर नहीं आया है।
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मुक्तिधाम का कामकाज संभालने वाली संस्था मानव उपकार संस्था के अध्यक्ष विष्णु कुमार बंटी ने बताया कि अभी तक इसको लेकर कोई काम शुरू नहीं हुआ है। किसी अधिकारी ने निरीक्षण भी नहीं किया है। कोरोना संक्रमित शवों का अंतिम संस्कार यहां होने के कारण कोई यहां झांकने भी नहीं आना चाहता है।
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इन परिस्थितियों में गैस चलित शव दाह गृह की स्थापना होना फिलहाल मुश्किल है। अमर उजाला ने बीती 26 अप्रैल के अंक में इस गंभीर मुद्दे को उठाया भी था, लेकिन लगभग एक महीना गुजर रहा है। अभी तक कोई काम नहीं हुआ है। 25 अप्रैल को सांसद सतीश गौतम ने कहा था कि वह इसके निर्माण की अड़चन दूर कराएंगे, लेकिन अब उनकी तरफ से कोई नया जवाब नहीं मिला है।
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इस शवदाह गृह के वास्ते दो बार प्रस्ताव बना। इसकी कीमत 25 से बढ़ कर 85 लाख तक पहुंच गई। अप्रैल से 22 मई के बीच यहां लगभग 500 से अधिक शवों का संस्कार हुआ है। इसके बाद भी गैस चलित शवदाह गृह कागजों से जमीन पर नहीं आया है।