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वकालत में निपुणता से भविष्य उज्जवल : जस्टिस मुरारी

Sun, 14 May 2023 01:26 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 14 May 2023 01:26 AM IST
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Future bright with skill in advocacy: Justice Murari
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश कृष्ण मुरारी ने कहा कि वकालत में शुरुआती दिन मुश्किल हो सकते हैं, लेकिन अगर कोई इसे अच्छी तरह इसमें निपुणता हासिल कर लेता है, तो इसमें उभविष्य उज्ज्वल है। उन्होंने छात्रों को अध्ययन की आदत डालने की सलाह दी।
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एएमयू के विधि संकाय की ओर से सुप्रीम कोर्ट और भारतीय संविधान का विकास विषय पर आयोजित व्याख्यान में वह बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि सर सैयद अहमद खान और जस्टिस सैयद महमूद को श्रद्धांजलि अर्पित की, उन्हें ‘शिक्षा का दूत’ और ‘एएमयू में कानूनी शिक्षा का अग्रदूत’ बताया। उन्होंने रफी अहमद किदवई, बैरिस्टर चौधरी हैदर हुसैन, काजी सैयद करीमुद्दीन और हसरत मोहानी सहित संविधान सभा के विभिन्न सदस्यों के योगदान का भी उल्लेख किया और भारत के पूर्व राष्ट्रपति जाकिर हुसैन और पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी सहित राष्ट्र निर्माण में इस विश्वविद्यालय के कई पूर्व छात्रों के योगदान को रेखांकित किया। जस्टिस मुरारी ने फेडरल कोर्ट और प्रिवी काउंसिल सहित भारत के सर्वोच्च न्यायालय और इसके पूर्ववर्ती न्यायालयों के ऐतिहासिक विकास पर चर्चा की।
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उन्होंने एके गोपालन बनाम मद्रास राज्य, मेनका गांधी बनाम भारत संघ, गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य और केशवानंद भारती जैसे ऐतिहासिक मुकदमों की चर्चा की, जिसने बुनियादी संरचना का सिद्धांत पेश किया। उन्होंने भारत के पहले अटॉर्नी जनरल एमसी सीतलवाड़ जैसे बार के सदस्यों के योगदान की भी प्रशंसा की। संविधान में सन्निहित सर्वोच्च कानून यानी देश की जनता की भलाई के सिद्धांत को व्यक्त करता है, जैसा कि संविधान की प्रस्तावना द्वारा इंगित किया गया है, जो संविधान के चार उद्देश्यों में से प्रथम उद्देश्य ‘सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय’ को ऊपर रखती है।
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विधि संकाय के डीन प्रो. मोहम्मद जफर महफूज नोमानी ने हाल ही के दो फैसलों का भी जिक्र किया, जिनमें जस्टिस कृष्ण मुरारी बेंच का हिस्सा थे। उन्होंने कहा कि इन निर्णयों में एक हमारे देश के संघीय ढांचे और दोहरी राजनीतिक व्यवस्था से संबंधित है, जिसमें दिल्ली के एनजीटी के उपराज्यपाल की शक्तियों पर ध्यान केंद्रित किया गया है और दूसरा महाराष्ट्र सरकार के लिए शक्ति परीक्षण से संबंधित है।





इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति आदित्य नाथ मित्तल ने कहा कि भारतीय संविधान का सबसे आकर्षक खंड अनुच्छेद 21 है, जिसकी एके गोपालन बनाम मेनका गांधी मामले में विस्तार से व्याख्या की गई है। विधि विभाग के अध्यक्ष प्रो. मोहम्मद अशरफ ने धन्यवाद ज्ञापित किया। संचालन तान्या पांडेय व माहेलका अबरार ने किया। जस्टिस मुरारी ने विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक भवनों का दौरा किया और विश्वविद्यालय जामा मस्जिद के परिसर में संस्थापक सर सैयद अहमद खान के मजार पर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
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