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Aligarh: सामूहिक विवाह योजना में फर्जीवाड़ा, विवाहित जोड़ों की ही करा दी गई शादी, नौ शादियां संदेह के घेरे में
Sat, 22 Mar 2025 10:02 AM IST
चमन शर्मा
अभिषेक श्रीवास्तव, अमर उजाला, अलीगढ़
अभिषेक श्रीवास्तव, अमर उजाला, अलीगढ़
Published by: चमन शर्मा
Updated Sat, 22 Mar 2025 10:02 AM IST
सार
इगलास में एक फार्म हाउस पर 38 जोड़ों का विवाह कराया गया, जिसमें से 32 ने सात फेरे लिए तो छह का निकाह हुआ था। विवाह के बाद जब उप निदेशक कार्यालय से जांच हुई तो इनमें नौ जोड़े संदिग्ध मिले। जब इसकी जानकारी अधिकारियों को हुई तो उनके हाथ पांव फूल गए।
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सामूहिक विवाह
- फोटो : संवाद
विस्तार
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में फर्जीवाड़ा सामने आया है। अलीगढ़ के समाज कल्याण विभाग ने बीते दिसंबर में 38 जोड़ों की शादी तो करा दी, लेकिन इनमें से तीन की शादी पहले हो चुकी थी, जबकि दो की शादी गर्मी में होनी है। इस तरह की नौ शादियां संदेह के घेरे में हैं। यही नहीं दो ऐसे लाभार्थी भी मिले हैं जिनकी शादी तो कराई गई, मगर उन्हें शृंगार व गृहस्थी का सामान और नियमानुसार धनराशि उपलब्ध नहीं कराई गई।
दरअसल सात दिसंबर (2024) को इगलास में एक फार्म हाउस पर 38 जोड़ों का विवाह कराया गया, जिसमें से 32 ने सात फेरे लिए तो छह का निकाह हुआ था। विवाह के बाद जब उप निदेशक कार्यालय से जांच हुई तो इनमें नौ जोड़े संदिग्ध मिले। जब इसकी जानकारी अधिकारियों को हुई तो उनके हाथ पांव फूल गए। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत प्रत्येक शादी पर सरकार 51,000 रुपये खर्च करती है। जिसमें से 35,000 रुपये कन्या के बैंक खाते में ट्रांसफर किए जाते हैं। बाकी की राशि घरेलू सामान और अन्य व्यवस्थाओं पर खर्च की जाती है। इस योजना का उद्देश्य नवविवाहित जोड़ों के जीवन को खुशहाल बनाना है।
ये शादियां संदेह के घेरे में
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दरअसल सात दिसंबर (2024) को इगलास में एक फार्म हाउस पर 38 जोड़ों का विवाह कराया गया, जिसमें से 32 ने सात फेरे लिए तो छह का निकाह हुआ था। विवाह के बाद जब उप निदेशक कार्यालय से जांच हुई तो इनमें नौ जोड़े संदिग्ध मिले। जब इसकी जानकारी अधिकारियों को हुई तो उनके हाथ पांव फूल गए। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत प्रत्येक शादी पर सरकार 51,000 रुपये खर्च करती है। जिसमें से 35,000 रुपये कन्या के बैंक खाते में ट्रांसफर किए जाते हैं। बाकी की राशि घरेलू सामान और अन्य व्यवस्थाओं पर खर्च की जाती है। इस योजना का उद्देश्य नवविवाहित जोड़ों के जीवन को खुशहाल बनाना है।
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सामूहिक विवाह योजना में कराई गई शादियों में अगर कोई खामी है तो इसकी जांच कराई जाएगी। शासन की तरफ से पात्रों को घरेलू सामान दिया जाता है। 35 हजार रुपये कन्या के खाते में भेजे जाते हैं।-रामकृष्ण वर्मा, डीडी समाज कल्याण।
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ये शादियां संदेह के घेरे में
- मडराक शिवाजी नगर की संध्या व बेबी की शादी संदेह के घेरे में है। एक की शादी 18 फरवरी को दोबारा हुई। दूसरी की शादी फरवरी में हुई। मोहल्ले के एक व्यक्ति ने बताया कि दोनों की शादी फरवरी में हुई थी। वह खुद गया था। इनका पहले सामूहिक विवाह हो चुका है।
- अकराबाद के गांव गोपी निवासी सुनीता की शादी साल भर पहले हो चुकी है।
- अकराबाद भिनौली की गिरिजा की शादी भी पहले हो चुकी है।
- धनीपुर बुढ़ासी की मुस्कान की शादी एक महीने पहले हुई थी।
- धनीपुर के साबिया व फिरदौस की भी शादी संदेह के घेरे में है।
- मडराक शिवाजी नगर की प्रियंका को सरकार से मिलने वाला घरेलू सामान नहीं मिला।
- अकराबाद के गांव सुहावली की विवाहिता पायल को भी घरेलू सामान नहीं मिला। पायल की मां ने कहा कि ब्लॉक से एक व्यक्ति ने 20 हजार रुपये घर पर आकर दिए थे।