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हाथरस हादसा: मां-बेटे सहित चार शव पहुंचे पिलखना, तिरपाल तानकर किया अंतिम संस्कार
Thu, 04 Jul 2024 06:01 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Updated Thu, 04 Jul 2024 06:01 AM IST
सार
पिलखना से करीब 50 महिला-पुरुष अपने परिजनों के साथ नारायण साकार हरि उर्फ भोले बाबा के सत्संग में शामिल होने पहुंचे थे। इनमें छोटेलाल की पत्नी मंजू देवी, उनका छह साल का इकलौता पुत्र पंकज, शांति देवी और प्रेमवती की भगदड़ के दौरान गड्ढे में गिरने से मौत हो गई।
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मरघट में तिरपाल तानकर शवों का अंतिम संस्कार करते लोग
- फोटो : संवाद
विस्तार
हाथरस जनपद के सिकंदराराऊ तहसील के गांव फुलरई मुगलगढ़ी में सत्संग के हुए हादसे में मृत मां-बेटे सहित चार शव 3 जून की सुबह पिलखना पहुंचे। शवों को देखते ही परिजन बिलख-बिलख कर रो पड़े। आस-पड़ोस के निवासी और रिश्तेदार उन्हें धीरज बंधाते रहे। गमगीन माहौल में सुबह करीब 11 बजे सभी शवों का अंतिम संस्कार किया गया।
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पिलखना से करीब 50 महिला-पुरुष अपने परिजनों के साथ नारायण साकार हरि उर्फ भोले बाबा के सत्संग में शामिल होने पहुंचे थे। इनमें छोटेलाल की 35 वर्षीय पत्नी मंजू देवी, उनका छह साल का इकलौता पुत्र पंकज, 65 वर्षीय शांति देवी पत्नी विजय सिंह और 60 वर्षीय प्रेमवती पत्नी रमेश चंद्र की भगदड़ के दौरान गड्ढे में गिरने से मौत हो गई थी। दो महिलाएं घायल हुई थीं। पोस्टमार्टम के बाद 3 जुलाई की सुबह करीब पांच बजे चारों के शव एंबुलेंस से एक साथ उनके घरों पर पहुंचे। पड़ोसी और रिश्तेदार रात से ही शवों के घर आने का इंतजार कर रहे थे। शांति देवी के शव का परिजनों ने अपने खेत पर जबकि प्रेमवती, मंजू देवी और उनके बेटे पंकज के शव का गांव के मरघट में अंतिम संस्कार किया गया है।
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बेटियों के विवाह के लिए बाबा का आशीर्वाद लेने गई थीं मंजू देवी
पिलखना निवासी छोटेलाल के अनुसार उनके चार बेटियां हैं। एक ही पुत्र पंकज था। पत्नी के कहने पर पति 2 जुलाई को बेटे व पत्नी सहित बेटियों की शादी के लिए बाबा का आशीर्वाद लेने गए थे। क्या पता था कि यह सत्संग उनके परिवार की बर्बादी का कारण बन जाएगा। हादसे में जान गंवाने वाली शांति देवी के पुत्र जितेंद्र कुमार ने बताया कि उनका परिवार करीब दस साल से नारायण सकार हरि के सत्संग से जुड़ा है। मंगलवार को वह अपने तीनों भाई कमल सिंह, नितिन कुमार व जितेंद्र अपनी मां के साथ सत्संग में शामिल होने पहुंचे थे। वहां मची भगदड़ में उनकी मां की मौत हो गई। प्रेमवती के पति का पूर्व में निधन हो चुका है। परिवार में सात बच्चे बेटा पप्पू, मुकेश, विजेंद्र, बंटी और तीन बेटियां हैं। सभी बेटियां शादीशुदा हैं।
बूंदाबांदी के बीच तिरपाल तानकर किया अंतिम संस्कार
बारिश के कारण मरघट के रास्ते पर कीचड़ था। मरघट में टीनशेड भी नहीं था। अंतिम संस्कार के दौरान बूंदाबांदी होने लगी। इससे लोगों के मरघट में दूर तक खड़े रहने की भी सुरक्षित जगह नहीं थी। बारिश से चिता जलने में दिक्कत न हो इसके लिए परिजनों सहित अन्य लोग तिरपाल तानकर खड़े हो गए।
अंतिम संस्कार के बाद परिजनों से मिले एसडीएम
एसडीएम कोल दिग्विजय सिंह बुधवार की दोपहर अंतिम संस्कार के बाद मृतकों के परिजनों से मिले। उनसे बात की। आश्रितों को मुआवजे के लिए रिपोर्ट शासन को भेजने की बात कही। इसी दौरान उन्हें बताया गया कि पिलखना निवासी ऊषा देवी पत्नी तानसेन और मीना देवी पत्नी अशोक कुमार घायल हुईं थीं।