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शहादत से पांच दिन पहले राजीव अलीगढ़ में थे

Tue, 21 May 2019 01:12 AM IST
राजेश सिंह दीपक शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़।
दीपक शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़। Published by: राजेश सिंह Updated Tue, 21 May 2019 01:12 AM IST
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Five days before Shahadat, Rajeev was in Aligarh
राजीव गांधी - फोटो : file photo
 ‘जब हमारी सरकार सत्ता में आएगी तो खेत में पान लगा रहा किसान भी मोबाइल पर अपने रिश्तेदारों से बात कर रहा होगा’। यह शब्द थे 15 मई 1991 में लोकसभा चुनाव की रैली में संबोधन करने आए तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के। इस रैली के पांच दिन बाद  21 मई 1991 को कोएंबटूर में हुए आतंकी हमले का वह शिकार हो गए। इसके बाद यह दिन राष्ट्रीय आतंकवाद निरोधी दिवस के रूप में मनाया जाता है।
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राजीव गांधी दो बार अलीगढ़ आए थे। वरिष्ठ कांग्रेसी सुबोध नंदन कहते हैं कि राजीव गांधी ने 1989 में पूर्व सांसद चौ. बिजेंद्र सिंह के पक्ष में इगलास में चुनावी जनसभा को संबोधित किया था। इस चुनाव में बिजेेंद्र सिंह को जीत भी हासिल हुई। इसके बाद 1991 में चौ. बिजेंद्र सिंह के पक्ष में ही वह नुमाइश मैदान में जनसभा को संबोधित करने आए थे। तेज गर्मी में भी लोग नुमाइश के तहसील के सामने वाले हिस्से में राजीव को सुनने के लिए जमे हुए थे।
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जनता के बीच उनका संबोधन आज भी लोगों को याद है। ऐ पीली शर्ट वाले भाई साहब, ये नीले कुर्ते वाले भाई, करके उन्होंने जनता के बीच संवाद किया था। उनकी यह आखिरी अलीगढ़ की यात्रा साबित हुई। सुबध नंदन कहते हैं कि राजीव तो नहीं रहे लेकिन सूचना और संचार क्रांति में उनका सपना जरूर साकार हुआ। यह और बात कि रैली में मौजूद कुछ लोगों को छोड़कर मोबाइल पर बात करने वाली बात ज्यादा किसी को समझ नहीं आई थी। 
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अलीगढ़ के संदर्भ में बात करें तो 1977 में अलीगढ़ में सिमी (स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट आफ इंडिया) की स्थापना से पहले किसी भी अतिवादी संगठन से किसी जुड़ाव का जिक्र नहीं मिलता। (आजादी के बाद) इसके बाद कश्मीरी शाल के गट्ठर में प्रतिबंधित एके 56 राइफल मिलने के बाद अलीगढ़ का नाम आतंकी गतिविधि से जुड़ा।  गत वर्ष हिजबुल मुजाहिद्दीन के आतंकी मन्नान वानी इस क्रम में ताजा कड़ी था। आतंक की इन कड़ियों के बाद भी पुलिस प्रशासन के स्तर पर आतंकी गतिविधियों की टोह लेने के लिए खुफिया तंत्र ही एक प्रमुख माध्यम है। 
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