Aligarh: दिवाली पर 200 करोड़ से ज्यादा की आतिशबाजी स्वाहा, लोगों ने जमकर फोड़े पटाखे
दिवाली पर सोमवार की शाम से शुरू हुआ आतिशबाजी का सिलसिला शाम से देर रात तक जारी रहा। इससे शहर में प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ गया है। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण कार्यालय की ओर से प्रदूषण की लगातार मानीटरिंग की जा रही है।
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यहां सोमवार की रात ही माल खत्म होने की स्थिति पैदा हो गई थी। छुट-मुट उत्पादों को छोड़ दें तो बड़े पटाखे नहीं मिल रहे थे। बाजार के जानकार बताते हैं कि जिले में थोक के पांच लाइसेंस हैं, जिनके स्तर से 5 करोड़ के आसपास आतिशबाजी की आपूर्ति दी गई है। इसके अलावा कासगंज, हाथरस, आगरा व दिल्ली से भी इतनी कीमत का माल लाकर अपने जिले में बेचा गया है। हालांकि अभी आज गोवर्धन के दिन भी आतिशबाजी होगी।
धूमधड़ाके से निकला पर्यावरण का दिवाला, घातक स्तर पर पहुंचा शहर में प्रदूषण
दिवाली पर सोमवार की शाम से शुरू हुआ आतिशबाजी का सिलसिला शाम से देर रात तक जारी रहा। इससे शहर में प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ गया है। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण कार्यालय की ओर से प्रदूषण की लगातार मानीटरिंग की जा रही है। शहर में पहले से प्रदूषण स्तर बेहद खराब है, अब दिवाली पर वायु और ध्वनि प्रदूषण में और बढ़ोत्तरी हो गई है। यह सामान्य से चार गुना तक जा पहुंचा है।
आतिशबाजी से शहर की आबोहवा खराब हो गई है। 413 माइक्रो ग्राम पर मीटर क्यू का प्रदूषण का स्तर बेहद घातक स्तर पर जा पहुंचा है। आवासीय क्षेत्र में ध्वनि प्रदूषण 70 से 80 डेसीबल तक मापा गया है। एयर क्वालिटी इंडेक्स (आईक्यू) न्यूनतम से 43 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक पर पहुंच गया है।
कोरोना काल से तीन साल पहले पीएम -10 (पार्टिकुलेट मेटर) बेहद घातक स्थिति में जा पहुंचा था, इसमें नाइट्रोजन डाईऑक्साइड एवं सल्फर डाई ऑक्साइड और कार्बनमोनो ऑक्साइड उत्सर्जन के माप से कई गुना तक बढ़ गया था। कई दिनों तक स्कूल, कॉलेजों में इसके चलते अवकाश भी रहा था। हालांकि इस बार पिछले साल दिवाली की अपेक्षा प्रदूषण का स्तर कुछ कम रहा। बीते साल यह 430 माइक्रोग्राम पर मीटर क्यू था।
मंगलवार की सुबह भी आसमान में धुंध छाई रही। इससे सांस रोगियों को बेहद परेशानियों का सामना करना पड़ा। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार प्रदूषण अगले दो-तीन दिन तक वातावरण को प्रभावित करेगा। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी जेपी सिंह ने बताया कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से वायु एवं ध्वनि प्रदूषण की निगरानी की जा रही है।
उन्होंने बताया कि एयर क्वालिटी इंडेक्स का सामान्य मापक 100 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक है। इसके बढ़ने पर वायु प्रदूषण का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि शहर के आवासीय क्षेत्र ज्ञान सरोवर, एएमयू समेत कई स्थानों पर पीएम -10 को मापने के लिए मैन्युअल सैंपलर मशीन से सैंपल कराया जा रहा है। इसकी 31 अक्तूबर तक मॉनीटरिंग की जा रही है।
यह है मानक का स्तर
क्षेत्रीय अधिकारी जेपी सिंह ने बताया कि प्रदूषण बोर्ड ने आईक्यू मानक तय कर रखा है। अगर यह स्तर 0.50 आईक्यू है तो वह अच्छी गुणवत्ता यानी ग्रीन श्रेणी में है। अगर यह 51 से 100 की श्रेणी में होता है, तो यह तोतई कलर की श्रेणी में माना जाएगा। इसका असर पहले से बीमार व्यक्तियों पर देखने को मिलेगा।
उन्हें सांस लेने में परेशानी होगी। 101 से 200 तक यह चेतावनी का प्रतीक येलो कलर की श्रेणी में होगा। इसका असर फेफड़ों पर पड़ता है। सांस की बीमारी से पीड़ित मरीजों को दिक्कत होती है। 201 से 300 तक यह बेहद खराब स्थिति पैदा कर देता है। यह ऑरेंज श्रेणी में आता है और यह लोगों का स्वास्थ्य को प्रभावित करेगा।
301 से 400 का आईक्यू बेहद घातक स्थिति में है और यह रेड श्रेणी में आता है। 401 से 500 आईक्यू डार्क रेड की श्रेणी में आता है। यह राहगीरों की आंखों को प्रभावित करेगा। उन्होंने बताया कि वायु गुणवत्ता की निगरानी की जा रही है। 31 अक्तूबर तक शहर के आवासीय, व्यवसायिक क्षेत्र में वायु प्रदूषण एवं ध्वनि प्रदूषण को मापा जा रहा है।