महानगर से निजी बसों के बाहर होने पर अंतिम मुहर, अॉपरेटरों ने जमकर हंगामा काटा
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मंडलायुक्त की अध्यक्षता में गुरुवार को कमिश्नरी सभाकक्ष में हुई संभागीय परिवहन प्राधिकरण की बैठक में निजी बसों के महानगर से बाहर होने के जिला प्रशासन के निर्णय पर अंतिम मुहर लग गई। हंगामे के बीच निजी बस संचालकों के परमिट रिवाइज हो गए। उन्हें इन्हीं शर्तों पर बसों का संचालन प्रशासन द्वारा निर्धारित बस अड्डों से करने अथवा परमिट सरेंडर करने की हिदायत दी गई। महानगर में मात्र 32 सीटर स्कूली बसें चलाने का निर्णय लिया गया। 100 बाइक टैक्सी के संचालन का निर्णय लिया गया।
मौके पर बस आपरेटरों ने जमकर हंगामा काटा, लेकिन अफसरों के आगे उनकी एक न चली
इस अति महत्वपूर्ण बैठक में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा प्राइवेट बसों को महानगर से बाहर किये जाने का रहा। हालांकि आपरेटरों के अधिवक्ता ने आपरेटरों का पक्ष रखने की पुरजोर कोशिश की, लेकिन प्रशासन के आगे उनकी एक न चली। डीएम चंद्रभूषण सिंह ने बताया कि आपरेटरों को प्रशासन द्वारा निर्धारित बस अड्डों पर रूटों से ही बसों का संचालन करने को कहा गया है। कोई भी बस किसी भी सूरत में महानगर के अंदरूनी इलाकों में प्रवेश नहीं करेगी। उनके परमिट भी रिवाइज कर दिये गए हैं।
इस मौके पर मृतक आश्रितों नवी आलम की पत्नी नजमा बेगम, मो. जाहिद के पुत्र आदिल, अब्दुल रशीद पुत्र सौदी सहित 7 के परमिट उनके उत्तराधिकरियों के नाम ट्रांसफर किये गए। वहीं एटा-ओनघाट-कादरचौक-बदायूं मार्ग के 18 परमिट, सिकंदराराऊ-हाथरस जंक्शन वाया जलेसर मार्ग के 6, अतरौली-हरदोई के 2, अवागढ़-सादाबाद के 2, मथुरा-अवागढ़-जुगसना सादाबाद मार्ग के 5, गोरहा-कादरगंज मार्ग के 5, अलीगढ़-गोंडा, खैर इगलास, हाथरस जलेसर मार्ग के 5 व अलीगढ़-कासिमपुर के 2 परमिट स्वीकृत किए गए। वहीं स्कूलों में चलने वाली प्राइवेट बसों के संचालन में केवल 32 सीटर वाहन चलाने का निर्णय लिया गया। साथ ही एक माह के भीतर इनका सत्यापन कराने के निर्देश दिए। करीब दो माह तक चलने वाले शादी-विवाह में बसों के संचालन पर भी निर्णय लिया गया। 100 बाइक टैक्सी के संचालन का निर्णय लिया गया।
बस ऑपरेटर अजय सिंह ने बताया कि अधिकारियों के समक्ष हमने जो मांगे रखीं उनका निस्तारण नहीं हुआ है। बैठक में अधिकारियों ने अपनी मनमर्जी चलाई है।
- राधेश्याम शर्मा, आरटीओ, अलीगढ़
बैठक में हंगामे जैसा कुछ भी नहीं हुआ है। अधिवक्ताओं का काम है बहस करने का। उन्होंने बस ऑपरेटरों की बात को उच्चाधिकारियों के समक्ष रखा। डीएम ने अधिवक्ताओं, बस ऑपरेटरों सभी की बात सुनी है।