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Aligarh News: कभी पिता ने अलीगढ़ में बनाए थे मशीनरी के पार्ट, अब बेटा बनाएगा मेट्रो के द्वार
Fri, 04 Apr 2025 03:45 PM IST
चमन शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: चमन शर्मा
Updated Fri, 04 Apr 2025 03:45 PM IST
सार
संजीव सचदेव बताते हैं कि उनके पिता स्व.ओमप्रकाश सचदेव एएमयू से इंजीनियरिंग किए थे। रघुवीरपुरी में उनका पुराना घर था। उन्होंने खुद ओएलएफ से दसवीं तक की पढ़ाई की। पिता ने 1962 से 82 तक दुबे पड़ाव पर मशीनरी पार्ट बनाने का कारखाना चलाया। बाद में हम बच्चों की अच्छी शिक्षा व कारोबार को बढ़ाने के इरादे से गाजियाबाद में कारखाना लगाया।
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मेट्रो
- फोटो : ANI
विस्तार
कभी पिता द्वारा जिस शहर में मशीनरी पार्ट बनाने का कारखाना चलाया गया। उस इंजीनियर पिता के बेटे ने अब अलीगढ़ में मेट्रो ट्रेन के दरवाजे बनाने का कारखाना लगाने पर करार किया है। इस कंपनी के एमडी ने खयामई में बन रहे इंडस्ट्रियल स्टेट में यूनिट लगाने के लिए 100 करोड़ के निवेश का करार किया है।
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गाजियाबाद की ओरियन प्रो सोल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड के एमडी संजीव सचदेव ने इस संबंध में उद्योग विभाग के संयुक्त आयुक्त वीरेंद्र सिंह से मुलाकात कर उन्हें अपना प्रस्ताव दिया। जिसमें उन्होंने 40 हजार वर्ग मीटर भूमि मांगी है। गाजियाबाद की यह कंपनी मेट्रो ट्रेन के दरवाजे बनाने के साथ-साथ बसों मेंं टिकट जारी करने वाली डिवाइस-मशीन भी बनाती है। कंपनी के एमडी संजीव सचदेव की ओर से दिए गए प्रस्ताव में कहा गया है कि यहां अगर भूमि मिलती है तो वे इन दो उत्पादों के साथ-साथ यहां कुछ अन्य नए उत्पाद बनाने पर भी काम करेंगे।
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उन्होंने बताया कि उनकी यूनिट बुलंदशहर में है। जहां जगह कम पड़ने के कारण वे उड़ीसा में इकाई लगाने की योजना पर काम कर रहे थे। मगर जब खबर मिली कि अलीगढ़ के खयामई में इंडस्ट्रियल स्टेट बन रहा है तो वे यहां प्रस्ताव पर करार किया है। उन्होंने बताया कि अधिकारियों ने उन्हें जमीन देने का भरोसा दिलाया है। अब वे अपना ले आउट डिजाइन आदि पर काम कर रहे हैं। इस विषय में वीरेंद्र सिंह ने बताया कि खयामई में भूमि आवंटन होने में अभी समय है। जब भूमि आवंटन शुरू होगा, तब उन्हें भूमि देने पर विचार किया जाएगा।
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दुबे पड़ाव पर पिता चलाते थे कारखाना
संजीव सचदेव बताते हैं कि उनके पिता स्व.ओमप्रकाश सचदेव एएमयू से इंजीनियरिंग किए थे। रघुवीरपुरी में उनका पुराना घर था। उन्होंने खुद ओएलएफ से दसवीं तक की पढ़ाई की। पिता ने 1962 से 82 तक दुबे पड़ाव पर मशीनरी पार्ट बनाने का कारखाना चलाया। बाद में हम बच्चों की अच्छी शिक्षा व कारोबार को बढ़ाने के इरादे से गाजियाबाद में कारखाना लगाया। तब हम सभी लोग अलीगढ़ से गाजियाबाद पहुंच गए। तब से यहां अपने कारोबार को बढ़ा रहे हैं। हालांकि अपनी यूनिट का विस्तार उड़ीसा में करने का मन था। मगर अलीगढ़ में जमीन का प्रस्ताव मिलने पर पुराना परिचित शहर होने के चलते यहां चले आए।