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किसानों को 38 करोड़ रुपये देना है, इसलिए ‘घर’ वालों से भी थोड़ा-थोड़ा लेना है
Sat, 04 May 2019 01:27 AM IST
राजेश सिंह
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
Published by: राजेश सिंह
Updated Sat, 04 May 2019 01:27 AM IST
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स्वर्ण जयंती विस्तार योजना के तहत कयाम पुर मोड़ के नजदीक तैयार किए गए फ्लैट।
- फोटो : Amar Ujala
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अलीगढ़ विकास प्राधिकरण के सामने 21 दिन के अंदर 38 करोड़ जुटाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। हाल ही में किसानों की रिट पर निर्णय देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्वर्ण जयंती नगर विस्तार परियोजना में किसानों को 2014 के नये भू अर्जन कानून के मुताबिक मुआवजा देने का फैसला दिया है। इस फैसले से प्राधिकरण को भू अर्जन से प्रभावित किसानों को करीब 17 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से अतिरिक्त मुआवजा देना होगा। ये रकम लगभग 38 करोड़ रुपये होती है। इससे पूर्व में प्राधिकरण ने दो हजार प्रति वर्गमीटर की दर से किसानों को दस करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था। तंगी से जूझ रहे प्राधिकरण के सामने अब 38 करोड़ जुटाने की चुनौती आ गई है। प्राधिकरण यह पैसा घर खरीदने वालों से वसूलना चाहता है।
किसानों को बढ़ा मुआवजा देने के संबंध में डीएम एवं प्राधिकरण उपाध्यक्ष चंद्रभूषण सिंह ने 50 आवंटियों की बैठक शुक्रवार दोपहर कलक्ट्रेट सभागार में बुलाई। डीएम ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के अनुसार एडीए द्वारा अधिग्रहीत जमीनों का प्रतिकर बढ़ी हुई दर से संबंधित किसानों को तीन हफ्ते में देना है। चूंकि एडीए के पास खुद का पैसा नहीं है अत: यह बढ़ा हुआ प्रतिकर सभी आवंटियों से लिया जाएगा। जो करीब 4425 प्रति वर्ग मीटर होगा।
यह सुनते ही आवंटी विरोध में आ गए। उनका तर्क था कि जब कोर्ट ने अपने आदेश में वर्ष 2005 में कहा था कि सभी किसानों को प्रतिकर वर्ष 2007 तक का दिया जाय तो एडीए ने समय सीमा के अंदर भुगतान क्यों नहीं किया। इसी वजह से किसानों को न्यायालय में जाना पड़ा। आवंटियों ने वर्ष 2012 तक सारा पैसा मय ब्याज जमा करा दिया है तो वह प्रतिकर क्यों दें..? आवंटियों ने एलान किया वह किसी भी सूरत में प्रतिकर नहीं देंगे और संघर्ष करेंगे। जरूरत पड़ने पर वह भी अदालत की शरणा लेंगे। आवंटियों के इस रुख से फिलहाल एडीए प्रशासन सकते में है।
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वर्ष 2001 में रखी थी परियोजना की नींव
विकास प्राधिकरण ने वर्ष 2001 में स्वर्ण जयंती नगर विस्तार योजना की नींव 14 हेक्टेयर क्षेत्र में रखी थी। इसमें करीब 1200 फ्लैट एवं 300 प्लाट काटे गए। इन सभी का आवंटन भी कर दिया गया। उस समय सर्किल रेट के हिसाब से प्रभावित करीब आठ किसानों को भूमि के एवज में मुआवजा दिया गया। लेकिन दो किसान नेम सिंह एवं नत्थी सिंह इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चले गए। वर्ष 2016 में न्यायालय के आदेश पर किसानों को दो हजार रुपये प्रति स्क्वायर मीटर के हिसाब से करीब दस करोड़ रुपया मुआवजा बांट दिया गया। मुआवजे से किसान संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने फिर न्यायालय की शरण ली और वर्ष 2013-14 में बने भूमि अधिग्रहण कानून का हवाला देते हुए उसके हिसाब से मुआवजे की मांग की। हाल ही में उच्चतम न्यायालय ने फैसला देते हुए भू अधिग्रहण कानून के हिसाब से तीन सप्ताह के अंदर मुआवजा देने के आदेश दिये।
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किसानों को बढ़ा मुआवजा देने के संबंध में डीएम एवं प्राधिकरण उपाध्यक्ष चंद्रभूषण सिंह ने 50 आवंटियों की बैठक शुक्रवार दोपहर कलक्ट्रेट सभागार में बुलाई। डीएम ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के अनुसार एडीए द्वारा अधिग्रहीत जमीनों का प्रतिकर बढ़ी हुई दर से संबंधित किसानों को तीन हफ्ते में देना है। चूंकि एडीए के पास खुद का पैसा नहीं है अत: यह बढ़ा हुआ प्रतिकर सभी आवंटियों से लिया जाएगा। जो करीब 4425 प्रति वर्ग मीटर होगा।
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यह सुनते ही आवंटी विरोध में आ गए। उनका तर्क था कि जब कोर्ट ने अपने आदेश में वर्ष 2005 में कहा था कि सभी किसानों को प्रतिकर वर्ष 2007 तक का दिया जाय तो एडीए ने समय सीमा के अंदर भुगतान क्यों नहीं किया। इसी वजह से किसानों को न्यायालय में जाना पड़ा। आवंटियों ने वर्ष 2012 तक सारा पैसा मय ब्याज जमा करा दिया है तो वह प्रतिकर क्यों दें..? आवंटियों ने एलान किया वह किसी भी सूरत में प्रतिकर नहीं देंगे और संघर्ष करेंगे। जरूरत पड़ने पर वह भी अदालत की शरणा लेंगे। आवंटियों के इस रुख से फिलहाल एडीए प्रशासन सकते में है।
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वर्ष 2001 में रखी थी परियोजना की नींव
विकास प्राधिकरण ने वर्ष 2001 में स्वर्ण जयंती नगर विस्तार योजना की नींव 14 हेक्टेयर क्षेत्र में रखी थी। इसमें करीब 1200 फ्लैट एवं 300 प्लाट काटे गए। इन सभी का आवंटन भी कर दिया गया। उस समय सर्किल रेट के हिसाब से प्रभावित करीब आठ किसानों को भूमि के एवज में मुआवजा दिया गया। लेकिन दो किसान नेम सिंह एवं नत्थी सिंह इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चले गए। वर्ष 2016 में न्यायालय के आदेश पर किसानों को दो हजार रुपये प्रति स्क्वायर मीटर के हिसाब से करीब दस करोड़ रुपया मुआवजा बांट दिया गया। मुआवजे से किसान संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने फिर न्यायालय की शरण ली और वर्ष 2013-14 में बने भूमि अधिग्रहण कानून का हवाला देते हुए उसके हिसाब से मुआवजे की मांग की। हाल ही में उच्चतम न्यायालय ने फैसला देते हुए भू अधिग्रहण कानून के हिसाब से तीन सप्ताह के अंदर मुआवजा देने के आदेश दिये।