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कजरौठी के प्राइमरी स्कूल में बंद किए 200 आवारा पशु, किसानों का हंगामा और नारेबाजी
Wed, 26 Dec 2018 02:14 PM IST
शाहरुख खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 26 Dec 2018 02:14 PM IST
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स्कूल में बंद आवारा पशु
- फोटो : अमर उजाला
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हाथरस में फसलों को तबाह कर रहे आवारा पशुओं के खिलाफ किसानों की जंग जारी है। गांव एदलपुर के बाद अब गांव कजरौठी में भी किसानों ने लगभग 200 की संख्या में आवारा पशुओं को प्राइमरी और पूर्व माध्यमिक विद्यालय में बंद कर बाहर से ताला जड़ दिया। गुस्साए किसानों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर हंगामा किया। किसानों के गुस्से को देखकर गांव कजरौठी में मौके पर तहसीलदार टीपी सिंह पहुंच गए। वहां स्कूल में बंद किए गए पशुओं को वाहनों के जरिए टुकसान स्थित गौशाला भेजा गया।
गौरतलब है कि, आए दिन आवारा पशु, गाय, सुअर आदि किसानों की दिन रात मेहनत से की गई फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। यह आवारा पशु खेतों में घुस जाते हैं, फिर पूरी तरह से फसल को बर्बाद कर देते हैं। इससे किसानों को भारी नुकसान सहना पड़ रहा है। इससे किसान बेहद परेशान हैं।
प्रशासनिक अनदेखी के कारण अब किसानों ने आवारा पशुओं को एकत्रित कर गांव के सरकारी स्कूलों में बांधना शुरू कर दिया है। पशु बांधने का यह सिलसिला एक के बाद एक गांव में शुरू हो चुका है। मंगलवार को सादाबाद क्षेत्र के गांव कजरौठी में किसानों ने करीब ३०० पशुओं को एकत्रित कर स्कूल में बंद कर दिया।
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गांव निवासी महाराज सिंह ने बताया कि इन पशुओं ने गांव के किसानों की आलू, गेहंू आदि की फसलों को रौंदकर काफी नुकसान कर दिया है। इससे किसानों में काफी आक्रोश है।
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गौरतलब है कि, आए दिन आवारा पशु, गाय, सुअर आदि किसानों की दिन रात मेहनत से की गई फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। यह आवारा पशु खेतों में घुस जाते हैं, फिर पूरी तरह से फसल को बर्बाद कर देते हैं। इससे किसानों को भारी नुकसान सहना पड़ रहा है। इससे किसान बेहद परेशान हैं।
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प्रशासनिक अनदेखी के कारण अब किसानों ने आवारा पशुओं को एकत्रित कर गांव के सरकारी स्कूलों में बांधना शुरू कर दिया है। पशु बांधने का यह सिलसिला एक के बाद एक गांव में शुरू हो चुका है। मंगलवार को सादाबाद क्षेत्र के गांव कजरौठी में किसानों ने करीब ३०० पशुओं को एकत्रित कर स्कूल में बंद कर दिया।
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गांव निवासी महाराज सिंह ने बताया कि इन पशुओं ने गांव के किसानों की आलू, गेहंू आदि की फसलों को रौंदकर काफी नुकसान कर दिया है। इससे किसानों में काफी आक्रोश है।
मौके पर पहुंचे पूर्व विधायक प्रताप चौधरी ने हंगामा कर रहे किसानों को समझाया और फोन कर पशुओं को स्कूलों में बंद करने की जानकारी प्रशासनिक अधिकारियों को दी, जिसके बाद मौके पर तहसीलदार टीपी सिंह पहुंच गए।
तहसीलदार ने पशुओं को वाहनों के जरिए टुकसान स्थित गौशाला में भिजवा दिया। इससे किसानों को आवारा पशुओं से राहत मिल गई। मौके पर आरआई डीसी पौरूष, राजेंद्र सिंह डीलर, नारायण सिंह प्रबंधक, प्रेमपाल सिंह, राजन सिंह, गुड्डन, जयपाल सिंह, हरिओम, दिंगबर सिंह सहित गांव के सभी किसान मौजूद थे।
धानौटी में भी बंद किए आवारा पशु
मंगलवार की शाम गांव धानौटी में किसानों ने करीब १०० आवारा पशुओं को प्राइमरी स्कूल और पूर्व माध्यमिक विद्यालय में बंद कर दिया। आक्रोशित ग्रामीणों ने नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। किसानों का कहना था कि अगर इन आवारा पशुओं की कोई व्यवस्था नहीं की गई तो वह इन आवारा पशुओं को साथ लेकर सड़कों पर उतर पडेंगे। आंदोलन करने पर भी उन्हें बाध्य होना पड़ेगा। इन पशुओं ने उनकी सैंकड़ों बीघा फसल को बर्बाद कर दिया है।
तहसीलदार ने पशुओं को वाहनों के जरिए टुकसान स्थित गौशाला में भिजवा दिया। इससे किसानों को आवारा पशुओं से राहत मिल गई। मौके पर आरआई डीसी पौरूष, राजेंद्र सिंह डीलर, नारायण सिंह प्रबंधक, प्रेमपाल सिंह, राजन सिंह, गुड्डन, जयपाल सिंह, हरिओम, दिंगबर सिंह सहित गांव के सभी किसान मौजूद थे।
धानौटी में भी बंद किए आवारा पशु
मंगलवार की शाम गांव धानौटी में किसानों ने करीब १०० आवारा पशुओं को प्राइमरी स्कूल और पूर्व माध्यमिक विद्यालय में बंद कर दिया। आक्रोशित ग्रामीणों ने नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। किसानों का कहना था कि अगर इन आवारा पशुओं की कोई व्यवस्था नहीं की गई तो वह इन आवारा पशुओं को साथ लेकर सड़कों पर उतर पडेंगे। आंदोलन करने पर भी उन्हें बाध्य होना पड़ेगा। इन पशुओं ने उनकी सैंकड़ों बीघा फसल को बर्बाद कर दिया है।
अब चैन से नहीं बैठेंगे किसान, प्रशासन को करनी होगी व्यवस्था
आवारा पशुओं को लेकर गांव मंस्या में भी किसानों की बैठक हुई। बैठक में पहुचे पूर्व विधायक प्रताप चौधरी ने कहा कि आवारा पशु हमारी फसलों को रौंद रहे हैं और अधिकारी चैन से सो रहे हैं। इन आवारा पशुओं का इंतजाम शासन प्रशासन को करना ही होगा, नहीं स्कूलों में आवारा पशुओं को बंद करने जैसी घटनाएं आए दिन गांवों में होंगी, क्यों कि फसल बर्बाद होने से किसान खासे आक्रोशित हैं। यही हाल रहा तो अन्नदाता पर भूखों मरने की नौबत आ जाएगी।