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अलीगढ़ : उज्ज्वल भविष्य से हैं कोसों दूर, बाल विवाह को मजबूर
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अभिषेक तायल
जिले में 15 फीसदी किशोरियों की पढ़ाई लिखाई की उम्र में ही शादी कर दी जाती है। बाल विवाह को लेकर सरकार ने तमाम कानून लागू करने के साथ बंदिशें भी लगा रखी हैं। बावजूद इसके बाल विवाह नहीं रुक पा रहे हैं। कच्ची उम्र में ही मां बन जाने से उनके स्वास्थ्य पर भी विपरीत असर पड़ रहा है। बाल विवाह की रोकथाम के लिए जिले में सक्रिय सामाजिक संगठनों ने इस पर चिंता जताई है।
कम उम्र में किशोरियों की शादी करने का चलन भले ही कम हो गया हो, लेकिन अभी भी जिले में 15.8 प्रतिशत किशोरियां बाल विवाह करने को मजबूर हैं। पारिवारिक हालात और दबाव के चलते उनके सपने बिखर जाते हैं और उन्हें हालात से समझौता करना पड़ता है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2019-21 के आंकड़ों के अनुसार जिले की 15.8 फीसदी किशोरियों की शादी 18 वर्ष से पहले ही हो जाती है। इसका सीधा असर उनके स्वास्थ्य व मानसिक विकास पर पड़ता है।
पांच साल में 7.4 फीसदी कम हुई बाल विवाह की दर
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2019-21 के आंकड़ों के अनुसार 15.8 फीसदी किशोरियां बाल विवाह के लिए मजबूर हैं। वर्ष 2015-16 में ये आंकड़ा 23.2 फीसदी था। पिछले पांच साल में 7.4 फीसदी की गिरावट आई है। मतलब 100 में से 15 किशोरियां अब भी बाल विवाह को मजबूर हैं। तमाम जागरूकता अभियान के बाद भी आंकड़े चौंकाने वाले हैं।
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असुरक्षा की भावना के चलते करा देते हैं जल्दी शादी
चाइल्ड लाइन संस्था के निदेशक ज्ञानेंद्र मिश्रा बताते हैं कि किशोरियों की जल्दी शादी करने के पीछे एक कारण है बेटियों को लेकर मन में असुरक्षा की भावना। रेस्क्यू के दौरान जब किशोरियों की काउंसिलिंग होती है तो माता पिता उनकी सुरक्षा को लेकर ही सवाल खड़ा करते हैं। देहात क्षेत्र में किशोरियों को लेकर लोगों में ज्यादा चिंता है। चाइल्ड लाइन द्वारा कई वर्षों से बाल विवाह पर काम किया जा रहा है। हर सूचना पर पुलिस के साथ पहुंचकर बाल विवाह रुकवाए जाते हैं।
तीन साल में 62 बाल विवाह रुकवाए
चाइल्ड लाइन संस्था ने प्रशासन व पुलिस की मदद से तीन साल में करीब 62 बाल विवाह रुकवाएं हैं। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019-20 में चाइल्ड लाइन संस्था ने 10 बाल विवाह रुकवाए। वर्ष 2020-21 में कोरोना काल में सबसे ज्यादा बाल विवाह की सूचनाएं आईं, जिसके कारण 29 बाल विवाह रुकवाए गए। वहीं वर्ष 2021-22 में 23 बाल विवाह रुकवाए।
बाल विवाह में अभी तक कोई मुकदमा नहीं
जिला प्रोवेशन अधिकारी स्मिता सिंह बताती हैं कि जिले में जब भी बाल विवाह की सूचना मिलती है तो टीम भेजकर सामाजिक संस्था का सहयोग किया जाता है। सूचना पर बाल विवाह रुकवाए तो गए हैं, लेकिन अभी तक कोई मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है। बाल विवाह होने के बाद अगर कोई शिकायत करता है, ऐसी स्थिति में मुकदमा दर्ज किया जाता है।
सबसे ज्यादा बाल विवाह कोरोना काल में रुकवाए
चाइल्ड लाइन निदेशक ज्ञानेंद्र मिश्रा बताते हैं कि सबसे ज्यादा बाल विवाह की सूचनाएं कोरोना काल में आईं थीं। कोरोना काल में दो साल में 52 बाल विवाह रुकवाए गए। उन्होंने बताया कि कोरोना काल में सरकार ने पाबंदियां लगा रखी थीं। शादी में कम लोगों को अनुमति के चलते लोगों ने घर में ही शादियां कर लीं। लॉकडाउन में लोगों का रोजगार छिन गया था। ऐेेसे में लड़कियां उन्हें बोझ लगने लगीं थीं।
आंकड़े का बाक्स
वर्ष बाल विवाह के आंकड़े
2015-16 23.2 फीसदी
2019-21 15.8 फीसदी
कितने बाल विवाह रुकवाए
वर्ष संख्या
2019-20 10
2020-21 29
2021-22 23
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जिले में 15 फीसदी किशोरियों की पढ़ाई लिखाई की उम्र में ही शादी कर दी जाती है। बाल विवाह को लेकर सरकार ने तमाम कानून लागू करने के साथ बंदिशें भी लगा रखी हैं। बावजूद इसके बाल विवाह नहीं रुक पा रहे हैं। कच्ची उम्र में ही मां बन जाने से उनके स्वास्थ्य पर भी विपरीत असर पड़ रहा है। बाल विवाह की रोकथाम के लिए जिले में सक्रिय सामाजिक संगठनों ने इस पर चिंता जताई है।
कम उम्र में किशोरियों की शादी करने का चलन भले ही कम हो गया हो, लेकिन अभी भी जिले में 15.8 प्रतिशत किशोरियां बाल विवाह करने को मजबूर हैं। पारिवारिक हालात और दबाव के चलते उनके सपने बिखर जाते हैं और उन्हें हालात से समझौता करना पड़ता है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2019-21 के आंकड़ों के अनुसार जिले की 15.8 फीसदी किशोरियों की शादी 18 वर्ष से पहले ही हो जाती है। इसका सीधा असर उनके स्वास्थ्य व मानसिक विकास पर पड़ता है।
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पांच साल में 7.4 फीसदी कम हुई बाल विवाह की दर
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2019-21 के आंकड़ों के अनुसार 15.8 फीसदी किशोरियां बाल विवाह के लिए मजबूर हैं। वर्ष 2015-16 में ये आंकड़ा 23.2 फीसदी था। पिछले पांच साल में 7.4 फीसदी की गिरावट आई है। मतलब 100 में से 15 किशोरियां अब भी बाल विवाह को मजबूर हैं। तमाम जागरूकता अभियान के बाद भी आंकड़े चौंकाने वाले हैं।
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असुरक्षा की भावना के चलते करा देते हैं जल्दी शादी
चाइल्ड लाइन संस्था के निदेशक ज्ञानेंद्र मिश्रा बताते हैं कि किशोरियों की जल्दी शादी करने के पीछे एक कारण है बेटियों को लेकर मन में असुरक्षा की भावना। रेस्क्यू के दौरान जब किशोरियों की काउंसिलिंग होती है तो माता पिता उनकी सुरक्षा को लेकर ही सवाल खड़ा करते हैं। देहात क्षेत्र में किशोरियों को लेकर लोगों में ज्यादा चिंता है। चाइल्ड लाइन द्वारा कई वर्षों से बाल विवाह पर काम किया जा रहा है। हर सूचना पर पुलिस के साथ पहुंचकर बाल विवाह रुकवाए जाते हैं।
तीन साल में 62 बाल विवाह रुकवाए
चाइल्ड लाइन संस्था ने प्रशासन व पुलिस की मदद से तीन साल में करीब 62 बाल विवाह रुकवाएं हैं। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019-20 में चाइल्ड लाइन संस्था ने 10 बाल विवाह रुकवाए। वर्ष 2020-21 में कोरोना काल में सबसे ज्यादा बाल विवाह की सूचनाएं आईं, जिसके कारण 29 बाल विवाह रुकवाए गए। वहीं वर्ष 2021-22 में 23 बाल विवाह रुकवाए।
बाल विवाह में अभी तक कोई मुकदमा नहीं
जिला प्रोवेशन अधिकारी स्मिता सिंह बताती हैं कि जिले में जब भी बाल विवाह की सूचना मिलती है तो टीम भेजकर सामाजिक संस्था का सहयोग किया जाता है। सूचना पर बाल विवाह रुकवाए तो गए हैं, लेकिन अभी तक कोई मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है। बाल विवाह होने के बाद अगर कोई शिकायत करता है, ऐसी स्थिति में मुकदमा दर्ज किया जाता है।
सबसे ज्यादा बाल विवाह कोरोना काल में रुकवाए
चाइल्ड लाइन निदेशक ज्ञानेंद्र मिश्रा बताते हैं कि सबसे ज्यादा बाल विवाह की सूचनाएं कोरोना काल में आईं थीं। कोरोना काल में दो साल में 52 बाल विवाह रुकवाए गए। उन्होंने बताया कि कोरोना काल में सरकार ने पाबंदियां लगा रखी थीं। शादी में कम लोगों को अनुमति के चलते लोगों ने घर में ही शादियां कर लीं। लॉकडाउन में लोगों का रोजगार छिन गया था। ऐेेसे में लड़कियां उन्हें बोझ लगने लगीं थीं।
आंकड़े का बाक्स
वर्ष बाल विवाह के आंकड़े
2015-16 23.2 फीसदी
2019-21 15.8 फीसदी
कितने बाल विवाह रुकवाए
वर्ष संख्या
2019-20 10
2020-21 29
2021-22 23