महज हादसा नहीं, है प्रशासनिक लापरवाही: 100 साल पुरानी इमारत के पास हो रही थी खोदाई, पहले भी दी गई थी चेतावनी
अनहोनी के संकेत तीन दिन पहले ही मिल गए थे। तब काम कर रहे मजदूरों से मिलने आए एक युवक पर भी मिट्टी का हिस्सा गिर गया था। उस समय स्थानीय लोगों ने नगर निगम के अधिकारियों को हादसे की आशंका पर सचेत किया था। अधिकारियों ने आशंका को यह कहकर खारिज कर दिया कि हम हैं, आप चिंता न करें।
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अलीगढ़ के रेलवे रोड पर 25 अप्रैल को हुए दर्दनाक हादसे ने सुरक्षा दावों को सतह पर ला दिया है। स्थानीय निवासियों और व्यापारियों का आरोप है कि यह महज एक हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा है। जिस जगह पर 20 फीट गहरा गड्ढा खोदा गया, उसके ठीक बगल में 100 साल पुरानी जर्जर इमारत खड़ी है, जिससे हर समय बड़े खतरे की आशंका बनी हुई थी।
स्थानीय निवासी सानू ने बताया कि अनहोनी के संकेत तीन दिन पहले ही मिल गए थे। तब काम कर रहे मजदूरों से मिलने आए एक युवक पर भी मिट्टी का हिस्सा गिर गया था। उस समय स्थानीय लोगों ने नगर निगम के अधिकारियों को हादसे की आशंका पर सचेत किया था। अधिकारियों ने आशंका को यह कहकर खारिज कर दिया कि हम हैं, आप चिंता न करें। आज अधिकारियों का यही अति-आत्मविश्वास एक मजदूर की जान पर भारी पड़ गया।
मौके पर मौजूद शानू ने बताया कि इतनी गहरी खोदाई और बगल में पुरानी बिल्डिंग होने के बावजूद गड्ढे की दीवारों को रोकने के लिए कोई सपोर्ट नहीं लगाया गया था। काम कर रहे श्रमिकों के पास हेलमेट अथवा अन्य कोई सुरक्षा साधन उपलब्ध नहीं थे। सीवर लाइन के लिए खोदाई बिल्कुल बिल्डिंग के सहारे की जा रही थी, जिससे मिट्टी धंसने का खतरा बना हुआ था। यदि तीन दिन पहले जताई गई आशंका पर गौर कर लिया जाता और खोदाई के दौरान उचित तकनीकी मानकों का पालन होता, तो महेंद्र सिंह की जान बच सकती थी।
एक साथ तीन काम, वह भी धीमी गति से
रेलवे रोड पर एक साथ तीन निर्माण कार्य (नाला निर्माण, सड़क निर्माण और सीवर लाइन की खोदाई) चल रहे हैं। इन कामों की कछुआ चाल और असुरक्षित तालमेल ने इस सड़क को मौत का जाल बना दिया है। स्थानीय निवासी शान ने बताया कि यहां समस्या पुरानी है। चार महीने पहले भी इसी जगह पाइप लाइन टूट गई थी, लेकिन प्रशासन ने स्थायी समाधान के बजाय काम चलाऊ व्यवस्था को ही प्राथमिकता दी।
नगर आयुक्त ने बिठाई जांच, तीन दिन में मांगी रिपोर्ट
अलीगढ़ नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने कहा कि घटना अत्यंत दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है। पूरे मामले की गहन जांच के आदेश दिए हैं। अपर नगर आयुक्त की अध्यक्षता में एक तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। इस समिति में अधिशासी अभियंता (निर्माण) और कर निर्धारण अधिकारी को भी शामिल किया गया है। यह समिति अगले 72 घंटों (3 दिन) के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। मृतक के परिवार को किसान दुर्घटना योजना के अंतर्गत पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिलाई जा रही है। संबंधित ठेकेदार को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वह पीड़ित परिवार को तत्काल अतिरिक्त सहायता प्रदान करे। कार्य स्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था। जनता को पानी की किल्लत न हो, इसलिए जलकल विभाग प्राथमिकता पर मरम्मत कार्य करा रहा था। कार्यस्थल पर ठेकेदार द्वारा बेरिकेडिंग, चेतावनी संकेत और सुरक्षा उपकरणों का इंतजाम किया गया था। श्रमिक हेलमेट व अन्य सुरक्षा उपकरणों का उपयोग कर रहे थे।
मेडिकल कॉलेज में हड़ताल के चलते ले गए जिला अस्पताल
रेलवे रोड पर हादसे के बाद घायल मजदूर महेंद्र सिंह को पहले जेएन मेडिकल कॉलेज ले जाया गया था। वहां पर हड़ताल के चलते इमरजेंसी बंद होने पर मलखान सिंह जिला अस्पताल लाया गया था। नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने बताया कि हादसे के तुरंत बाद जीएम (जल) और अवर अभियंता ने मौके पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू कराया। घायल श्रमिक को पहले मेडिकल कॉलेज और फिर मलखान सिंह जिला चिकित्सालय ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया था। कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए सभी निर्माण और मरम्मत स्थलों पर अतिरिक्त सावधानी और सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।