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एएमयू दीक्षांत समारोह : 12 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लिए हर भारतीय को मिले मिनी पैड : चंद्रशेखरन

Mon, 15 Nov 2021 11:55 PM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 15 Nov 2021 11:55 PM IST
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Every Indian should get mini pad for 12 trillion dollar economy: Chandrasekaran
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के ऑनलाइन विशेष दीक्षांत समारोह में सोमवार को टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखरन को डीएससी की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। यह उपाधि कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने प्रदान की। विश्वविद्यालय ने चंद्रशेखरन को मानद उपाधि भारत के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के नियोक्ता व टाटा समूह के अध्यक्ष के रूप में उनके उल्लेखनीय योगदान, उदार, परोपकारी कार्यों एवं राष्ट्रहित की उपलब्धियों के लिए दी है। इस मौके पर उन्होंने कहा कि यदि भारत तीन ट्रिलियन डॉलर से 12 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनना चाहता है तो हर भारतीय को ‘मिनी पैड’ प्रदान किया जाना चाहिए, जो डेटा और कनेक्टिविटी से लैस एक स्मार्ट डिवाइस है, जिससे उनकी पहुंच शिक्षा, स्वास्थ्य तक आसानी से संभव हो।
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चंद्रशेखरन ने कहा कि टाटा समूह में मेरे सभी सहयोगियों की ओर से इस सम्मान को स्वीकार करना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। इस समूह के मशाल वाहक हमारे संस्थापक, जमशेदजी टाटा का दृढ़ विश्वास था कि व्यवसाय में समुदाय न केवल एक हितधारक है, बल्कि वास्तव में किसी भी उद्यम के अस्तित्व का कारण है। उन्होंने कहा कि 28 मार्च 2020 को महामारी के शुरुआती प्रकोप के दौरान, टाटा समूह के एमेरिटस अध्यक्ष रतन टाटा के अनुसार टाटा ट्रस्ट और टाटा समूह की कंपनियां अतीत में राष्ट्र की जरूरतों की पूर्ति के लिए आगे रही हैं, लेकिन यह समय किसी भी अन्य दौर की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण है। उनके मार्गदर्शन में टाटा समूह ने महामारी के खिलाफ हमारी सामूहिक लड़ाई में भारत सरकार और नागरिकों के समर्थन से परिस्थिति पर काबू पाने के लिए त्वरित कार्रवाई की।
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किसी भी देश की रीढ़ की हड्डी है शिक्षा
चंद्रशेखरन ने कहा कि किसी भी देश की रीढ़ की हड्डी शिक्षा होती है। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी तेजी से विकसित हो रही है। पर्यावरण और सतत मानक हमारे जीने और काम करने के तरीके को प्रभावित कर रहे हैं। यह नवाचार और अनुसंधान की सीमाओं को बढ़ा रहे हैं। यह अभिनव नवाचार विभिन्न क्षेत्रों के मध्य भी हो रहा है और एक नई अर्थव्यवस्था विकसित हो रही है। इसमें भारत के लिए एक रोमांचक अवसर है, लेकिन इस प्रतिस्पर्धा में न केवल भाग लेने के लिए, बल्कि विश्व नेता बनने के लिए अपनी शिक्षा प्रणाली को उन्नत करने की आवश्यकता है। हमें पारिस्थितिकी तंत्र और खुलेपन और सहयोग की संस्कृति के निर्माण के लिए अनुसंधान और अभिनव नवाचार में निवेश करना होगा। यदि हम ऐसा कर सकते हैं, तो मानव संसाधन के बडे़ पूल के साथ, हम न केवल दसियों लाख नौकरियां पैदा कर सकते हैं बल्कि दशक के अंत तक हमारे सकल घरेलू उत्पाद को प्रति व्यक्ति 5000 डॉलर से अधिक तक पहुंचाया जा सकता है। हम लोगों को कैसे शिक्षित, प्रशिक्षित और प्रेरित करते हैं, यह हमारे देश की समृद्धि की कुंजी होगी।
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प्रौद्योगिकी और बौद्धिक संपदा स्वामित्व में हो निवेश
चंद्रशेखरन ने कहा कि भारत को अपने अनुसंधान और विकास खर्च में वृद्धि करनी चाहिए। साथ ही प्रौद्योगिकी और बौद्धिक संपदा स्वामित्व में निवेश करना चाहिए। भारतीय विश्वविद्यालयों को आपस में और अन्य विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ साझेदारी करने के लिए प्रोत्साहित करें। हमें कनेक्टिविटी, स्किल ईको सिस्टम और रिस्क कैपिटल तक पहुंच बनाने के साथ टेक सिटी क्लस्टर बनाने की आवश्यकता है, जहां भारतीय प्रतिभाएं भारत में ही प्रशिक्षण प्राप्त करें और देश को बदल दें। हमें अब आधुनिक तकनीकों और डेटा पर ध्यान देने की जरूरत है। भारत साफ्टवेयर सेवाओं में अग्रणी है और इसे इस क्षेत्र में विश्व में अग्रणी बनना चाहिए। हमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, 5जी, क्वांटम कंप्यूटिंग और इलेक्ट्रानिक्स पर जोर देने और गोपनीयता, डेटा स्टोरेज, टैक्सेशन, मार्केट एक्सेस, इमिग्रेशन और साइबर सिक्योरिटी जैसे विषयों पर पार्टनरशिप के लिए सामान्य मानक और प्रोटोकॉल बनाने की जरूरत है।
अकादमिक और निजी क्षेत्र के बीच सहयोग का आह्वान
चंद्रशेखरन ने मजबूत अनुसंधान और विकास संस्कृति विकसित करने के लिए अकादमिक और निजी क्षेत्र के बीच अधिक सहयोग का आह्वान किया, जो नवाचार की जबरदस्त शक्ति को आंदोलित कर सके। भारतीय शिक्षा की एक ऐसी ही प्रणाली की कल्पना करें, जो चुस्त और डिजिटल रूप से देशी समस्या-समाधानकर्ताओं को पोषित करती है, भारत के भविष्य के लिए हम सबसे बड़ा निवेश कर सकते हैं। उन्होंने इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए माननीय एएमयू चांसलर, डॉक्टर सैय्यदना मुफद्दल सैफुद्दीन, कुलपति, प्रोफेसर तारिक मंसूर और एएमयू का आभार व्यक्त किया।
टाटा समूह से काफी उम्मीदें हैं : कुलपति
कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर ने कहा कि कई वर्षों से एएमयू के कई छात्रों को टीसीएस सहित टाटा समूह की विभिन्न कंपनियों में नियोजित किया जा रहा है। एएमयू के छात्रों के लिए निरंतर सहयोग व संरक्षण के लिए विश्वविद्यालय आशान्वित है। अपने छात्रों की उद्यमशीलता क्षमता का उपयोग करने और इंजीनियरिंग और प्रबंधन अध्ययन में इन्क्यूबेशन और स्टार्टअप सेल को समर्थन देने में चेयरमैन के मार्गदर्शन के लिए आशान्वित हैं। कुलपति ने कहा कि एएमयू को आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए विशेष शैक्षिक उपाय करने का गौरव प्राप्त है। यह विश्वविद्यालय देश में सबसे कम फीस स्ट्रक्चर वाले विश्वविद्यालयों में से एक है और चंद्रशेखरन से टाटा समूह की कारपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी परियोजनाओं के तहत विश्वविद्यालय को सहयोग करने का अनुरोध करता हूं। उन्होंने कहा कि एएमयू लगातार विभिन्न रैंकिंग एजेंसियों से उच्च रैंक प्राप्त कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 दिसंबर 2020 को अपने शताब्दी समारोह के भाषण के दौरान एएमयू को ‘मिनी इंडिया’ की संज्ञा दी थी।
राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री को मिल चुकी है मानद उपाधि
कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने कहा कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय द्वारा पूर्व में मानद उपाधि दिए जाने वाले महानुभावों में चंद्रशेखरन को शामिल करने का विश्वविद्यालय को गौरव प्राप्त हुआ है। इससे पहले भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू, भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद, पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री, वैज्ञानिक डॉ. सीवी रमन, पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, सऊदी अरब, मलेशिया, जर्मनी, ईरान, मिस्र आदि जैसे देशों के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और राजाओं को यह गौरव प्राप्त हुआ है।

चांसलर डॉ. सैयदना ने किया चंद्रशेखरन का स्वागत
एएमयू के चांसलर डॉ. सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन ने चंद्रशेखरन का स्वागत करते हुए कहा कि शिक्षा मनुष्य के अंतर्मन को स्वच्छ करती है और उसे और उसके परिवार को जीविका प्राप्त करने में मदद करती है। उन्होंने कहा कि अल्लाह उन लोगों को पसंद करता है, जो मानव समाज के लाभ के लिए कार्य करते हैं और व्यापार को अल्लाह द्वारा मानव जाति को प्रदान किया गया एक वरदान कहा गया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा पवित्र और संतुष्ट जीवन जीने का मंत्र है और इसे प्राप्त करना सभी पुरुषों और महिलाओं का कर्तव्य है। कार्यक्रम में एएमयू कोषाध्यक्ष पद्मश्री प्रोफेसर (हकीम) सैयद जिल्लुर रहमान भी उपस्थित थे। परीक्षा नियंत्रक मुजीब उल्लाह जुबैरी ने चंद्रशेखरन के लिए प्रशस्ति पत्र पढ़ा, जबकि संचालन रजिस्ट्रार अब्दुल हमीद ने किया।

दीक्षांत समारोह में संबोधित करते एएमयू कुलाधिपति सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन।

दीक्षांत समारोह में संबोधित करते एएमयू कुलाधिपति सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन। - फोटो : CITY OFFICE

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