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Aligarh: हर महीने खर्च हो रही 7 लाख की रकम...फिर भी नहीं निकल रहा मच्छरों का दम

Sun, 14 Jul 2024 09:44 AM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Sun, 14 Jul 2024 09:44 AM IST
सार

बारिश के बाद शहर में खासकर उन इलाकों में हालत खराब है, जहां जलभराव की समस्या है। वहां मच्छरों की संख्या बढ़ रही है। यहां फागिंग कराने की जिम्मेदारी नगर निगम की है। मगर नाले-नालियों के ऊपर दिन भर मच्छर भिनभिनाते दिखेंगे। शाम को घरों में लोगों को परेशान करते हैं।

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Even after 7 lakh months, no reduction in mosquitoes
मच्छर - फोटो : एएनआई

विस्तार

बारिश के मौसम में लोगों को डेंगू-मलेरिया जैसे गंभीर मच्छरजनित रोगों से बचाव के लिए संचारी रोग नियंत्रण अभियान चलाया जा रहा है। शहरी क्षेत्र में मासिक सात लाख रुपये से अधिक खर्च का दावा नगर निगम प्रशासन कर रहा है। मगर शहरवासी मच्छरों की समस्या से जूझ रहे हैं। हालात यह हैं कि पॉश व वीआईपी इलाकों में जरूर फागिंग होती दिखती है। लेकिन शहर के मुहल्लों की अनदेखी की जा रही है।

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बारिश के बाद शहर में खासकर उन इलाकों में हालत खराब है, जहां जलभराव की समस्या है। वहां मच्छरों की संख्या बढ़ रही है। यहां फागिंग कराने की जिम्मेदारी नगर निगम की है। मगर नाले-नालियों के ऊपर दिन भर मच्छर भिनभिनाते दिखेंगे। शाम को घरों में लोगों को परेशान करते हैं। कहने को अलीगढ़ शहर के 60 मोहल्ले और देहात क्षेत्र के 140 गांव डेंगू और मलेरिया के लिए अति संवेदनशील घोषित हैं। इन इलाकों में मच्छरों का सर्वाधिक प्रकोप है। 
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स्वास्थ्य विभाग के स्तर से इनकी सूची नगर निगम, जिला पंचायतराज अधिकारी को भेजकर यहां जलजमाव खत्म कराने से लेकर साफ-सफाई और फॉगिंग की सिफारिश कर दी गई है। लेकिन उस पर पूरी तरह अमल होता नहीं दिख रहा है। ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा है कि अभी तो शुरुआत है। आने वाले समय में मच्छरों से कैसे लड़ा जाएगा। शासन के निर्देश के अनुसार, गांवों में प्रधानों द्वारा और शहरी क्षेत्र में नगर निगम द्वारा साफ-सफाई व एंटी लार्वा दवा का छिड़काव किया जाना है।

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नगर निगम की यह है व्यवस्था

- 17 मशीनों से प्रतिदिन शाम को शहर में फागिंग का दावा
- 15 लीटर डीजल हर मशीन को प्रतिदिन दिया जाता है
- 1.50 लीटर पेट्रोल प्रति मशीन को प्रतिदिन दिया जाता है
- 1 लीटर मेलाथियान दवा प्रति 20 लीटर पानी में मिलाई जाती है
रेलवे स्टेशन से सेंटर प्वाइंट चौराहा की ओर जा रहे नाले में भिनभिनाते मच्छर
रोज का औसत खर्च 
नगर निगम के दावे के अनुसार, प्रतिदिन 255 लीटर डीजल, 25 से 26 लीटर पेट्रोल और 12 लीटर कीटनाशक खर्च होता है। औसत खर्च प्रतिदिन 22950 रुपये डीजल पर, 2397 रुपये पेट्रोल पर और 480 रुपये कीटनाशक पर खर्च होते हैं। इस तरह कुल 25827 रुपये प्रतिदिन खर्च होते हैं। मासिक औसत खर्च 7 लाख 74 हजार 810 रुपये बैठता है। इस तरह बारिश व गर्मी के छह माह में फागिंग कराने पर यह खर्च करीब 45 लाख के आसपास होगा।

इन इलाकों में हालात बेहद खराब
शहर के गोविंदनगर, संजय गांधी कॉलोनी, शाहजमाल, भुजपुरा, नगला माली, नगला मान सिंह, नौरंगाबाद, नगला मेहताब, जीवनगढ़, धौर्रा, कुलदीप विहार, देवी नगला, रावणटीला, सराय हकीम, नई बस्ती, लच्छिमपुर, सारसौल, सासनी गेट, आगरा रोड, मथुरा रोड, प्रतिभा कालोनी, बरौला आदि इलाकों में मच्छरों ने जीना दूभर कर रखा है। इन इलाकों में फागिंग न होने की शिकायतें हैं।

इन इलाकों पर विशेष ध्यान

सिविल लाइंस में एएमयू के आसपास, सरकारी दफ्तरों और अधिकारियों के आसपास का इलाका, विद्या नगर, सुरेंद्र नगर, किशोर नगर में जनप्रतिनिधियों के आवास वाले इलाकों में जरूर फागिंग होती दिखाई देती है।

खेल की आशंका
कई इलाकों में फॉगिंग न होना लेकिन रोज इतने बड़े खर्च से शंका पैदा होती है कि कहीं तेल में खेल तो नहीं चल रहा।

अभी तक नहीं मिली किसी गांव में फागिंग की सूचना
जिला मलेरिया अधिकारी डा. राहुल कुलश्रेष्ठ कहते हैं कि हमारे स्तर से पूर्व में सूचना भिजवा दी गई थी। शासन से भी निर्देश जारी हुए हैं। हमारी टीमें जिन गांवों में जा रही हैं, वहां अभी तक फागिंग होती नहीं पाई गई है। शहर में कुछ इलाके बेहद संवेदनशील हैं, वहां विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

मच्छरों से हाल बेहाल है। लोग बीमार पड़ रहे हैं। हमने अपने इलाके में कभी फागिंग होते नहीं देखी। - संजीव भारद्वाज, रेलवे स्टेशन रोड।
शहर में फागिंग के नाम पर सिर्फ फोटो खिंचवाने का काम होते देखा है। मगर मच्छर नहीं मर रहे। -अतुल मित्तल, श्याम नगर
हमने अपने इलाके में अभी तक फागिंग होते नहीं देखी है। मच्छरों से जीवन मुश्किल है। - सुनीता रानी, सराय हकीम।
दिन में भी मच्छर भिनभिनाते रहते हैं। रात को बुरा हाल हो जाता है। मच्छरों के काटने से बीमारियां हो रही हैं। फागिंग नहीं होती है। - संचिता गुप्ता, सराय हकीम
गांवों में संचारी रोगों की रोकथाम के लिए नियमित रूप से साफ-सफाई कराई जा रही है, कीटनाशक दवाओं का भी छिड़काव कराया जा रहा है। इसके लिए अभियान चलाया जा रहा है।- धनंजय जायसवाल, जिला पंचायतराज अधिकारी।
शहरी क्षेत्र में नगर निगम द्वारा लगातार फागिंग कराई जा रही है। एंटी लार्वा दवा छिड़की जा रही है। सभी आठ स्वच्छता वार्डों में कुल 16 मशीनों व बैगपैक स्प्रे मशीनों से छिड़काव कराया जाता है। इसका रोस्टर बना है, जहां शिकायत मिलती है, वहां टीम भेजी जाती है। फिर भी अगर कहीं शिकायत है तो इसकी समीक्षा की जाएगी। - राकेश यादव, अपर नगर आयुक्त।

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