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लिफ्ट, एस्केलेटर, ट्रॉली बैग ने कुलियों को स्टेशन से धकेला

Sat, 17 Sep 2022 12:54 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 17 Sep 2022 12:54 AM IST
सार

दरअसल, रेलवे स्टेशन पर लिफ्ट व एस्केलेटर की सुविधा शुरू होने और पहियों वाले ब्रीफकेस (ट्रॉली बैग) के चलन के कारण उनको काम मिलना काफी कम हो गया है। इस फिल्म ने पहली बार रेल यात्रियों का बोझ उठाने वाले इस तबके के संघर्ष को सबके सामने रखा, लेकिन इतने सालों बाद भी कुलियों की जिंदगी नहीं बदल सकी है। पहले जहां दिन में 500 से 700 रुपये कमा लेते थे, अब बमुश्किल 100-200 रुपये ही कमा रहे हैं, आर्थिक स्थिति गड़बड़ाने लगी है।

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Elevators, escalators, trolley bags pushed Coolie from the station
दिलीप । कुली - फोटो : CITY OFFICE

विस्तार

लाल शर्ट, बाजू पर बंधा तांबे का बिल्ला और ट्रेन के आते ही सिर पर सामान रखकर प्लेटफार्म पर दौड़ लगाने वाले कुलियों की आर्थिक स्थिति अब गड़बड़ा रही है। दरअसल, रेलवे स्टेशन पर लिफ्ट व एस्केलेटर की सुविधा शुरू होने और पहियों वाले ब्रीफकेस (ट्रॉली बैग) के चलन के कारण उनको काम मिलना काफी कम हो गया है। 500-700 रुपये प्रतिदिन कमाने वाले कुली वर्तमान में बमुश्किल 100-200 रुपये ही कमा पाते हैं। काम की कमी के कारण कुली परेशान हैं।
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अलीगढ़ रेलवे स्टेशन पर 60 कुली हैं। स्टेशन पर 60 यात्री ट्रेनों का ठहराव होता है। इसके बावजूद कुलियों के पास उतना काम नहीं मिल रहा है, जितना उनको पहले मिलता था। कुलियों का कहना है कि रेलवे जंक्शन पर लिफ्ट, एस्केलेटर की सुविधा शुरू होने और ट्रॉली बैग की वजह से हमारा काम खत्म सा हो गया है। अब केवल भारी भरकम सामान लाने वाले यात्रियों के भरोसे उनकी रोजी-रोटी चल रही है।
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याद आती है कुली फिल्म
‘सारी दुनिया का बोझ हम उठाते हैं, लोग आते हैं, लोग जाते हैं, हम यहीं पे खड़े रह जाते हैं’। कुलियों का जिक्र होते ही वर्ष 1983 में आई अमिताभ बच्चन अभिनीत फिल्म कुली का यह गाना बरबस ही याद आ जाता है। इस फिल्म ने पहली बार रेल यात्रियों का बोझ उठाने वाले इस तबके के संघर्ष को सबके सामने रखा, लेकिन इतने सालों बाद भी कुलियों की जिंदगी नहीं बदल सकी है। एक समय पर रेलवे जंक्शन पर 100 से अधिक कुली काम करते थे। वर्तमान में 12-12 घंटे की दो शिफ्टों में 60 कुली लोगों का बोझ उठा रहे हैं। काम न मिलने से अब इन कुलियों के सामने खाने का संकट हो गया है। वह आर्थिक तंगी का सामना कर रहे है। कई बार तो उनकी बोहनी तक नहीं होती है और उन्हें खाली हाथ घर लौटना पड़ता है।
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कुलियों की पीड़ा...
हम रोज मेहनत करते हैं, लेकिन सड़कों पर भीख नहीं मांग सकते। हम काम और सरकार से चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की नौकरी चाहते हैं। लंबे समय से मांग करते आ रहे हैं। - मोहम्मद दिलशाद
स्टेशन पर अब काम कम मिल रहा है। पहले जहां दिन में 500 से 700 रुपये कमा लेते थे, अब बमुश्किल 100-200 रुपये ही कमा रहे हैं, आर्थिक स्थिति गड़बड़ाने लगी है। - दिलीप कुमार
स्टेशन पर अब काम नहीं मिल रहा है। इसकी वजह ट्रॉली बैग हैं। कोरोना संक्रमण के बाद से तो कामकाज पूरी तरह से ठप हो चुका है। इससे भी हमारे काम पर भी असर पड़ा है। - सत्यपाल

पहले से ही काम कम था, लेकिन कोरोना काल के बाद से यात्रियों ने दूरी बनानी शुरू कर दी है। यात्री अपने सामान खुद ही उठा लेते हैं, जिससे कुलियों को काम नहीं मिल रहा है। - धूरपाल सिंह

मोहम्मद दिलशाद। कुली।

मोहम्मद दिलशाद। कुली।- फोटो : CITY OFFICE

सत्यपाल । कुली

सत्यपाल । कुली- फोटो : CITY OFFICE

धूरपाल सिंह। कुली

धूरपाल सिंह। कुली- फोटो : CITY OFFICE

रेलवे स्टेशन पर यात्रियों का सामान लेकर जाता कुली।

रेलवे स्टेशन पर यात्रियों का सामान लेकर जाता कुली।- फोटो : CITY OFFICE

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