Aligarh: बुजुर्ग महिला के हाथ-पांव बांधे, मुंह में कपड़ा ठूंसा, बेड पर पटका, पांच लाख लूट बदमाश भागे
बदमाश घर के अंदर मुश्किल से 8 से दस मिनट तक रुके। इसके बाद वे महावीर पार्क की गलियों में ही घूमते हुए निकले हैं। देर शाम तक पुलिस ने 50 से अधिक सीसीटीवी देखे। मगर वे गलियों से बाहर आते नहीं दिखे।
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अलीगढ़ की पॉश कालोनी महावीर पार्क में मैरिज होम संचालक के घर में घुसे बदमाशों ने बुजुर्ग महिला को बंधक बनाकर पांच लाख की लूट को अंजाम दे डाला। 30 अगस्त दोपहर इस घटना को उस समय अंजाम दिया गया जब मैरिज होम संचालक की मां घर के निचले हिस्से में अकेली थीं। हेलमेट के अंदर मास्क लगाकर आए बाइक सवार दो बदमाशों ने उन्हें हाथ-पांव बांधकर मुंह में कपड़ा ठूंस कर बेड पर पटक दिया। फिर लूटपाट कर भाग गए।
क्वार्सी क्षेत्र की महावीर पार्क कालोनी के कुलदीप वार्ष्णेय तीन मंजिला मकान नंबर एम-8 राज हाउस में रहते हैं। उनका गोंडा रोड पर मैरिज होम है। घर के निचले हिस्से में 67 वर्षीय मां राजकुमारी गुप्ता, कुलदीप के बड़े अविवाहित दिव्यांग भाई पंकज गुप्ता रहते हैं। खुद कुलदीप अपनी पत्नी इंदू संग पहले माले पर रहते हैं, जबकि दूसरी मंजिल पर चार किरायेदार हैं।
30 अगस्त दोपहर करीब 11 बजे कुलदीप व्यापारिक सिलसिले में घर से चले गए। दिव्यांग भाई भी घूमते हुए किसी काम से बाहर निकल गए। इंदू पहली मंजिल पर थीं। मां नीचे अकेली थीं। तभी 11:30 बजे बाइक पर दो बदमाश मुख्य द्वार खोलकर अंदर घुस गए। अंदर पहुंचते ही उन्होंने रामकुमारी से बस इतना पूछा कि कहां हैं वो। महिला कुछ समझ पाती कि बदमाशों ने उनके हाथ पांव दुपट्टे से बांध दिए। फिर मुंह में कपड़ा ठूंस कर बेड पर पटक दिया। इसके बाद तमंचा दिखाकर शांत रहने का इशारा करते हुए कमरे का दरवाजा बंद कर दिया।
इसके बाद दूसरे कमरे में बदमाशों ने अलमारी से करीब 50 हजार रुपये नकदी, करीब चार लाख रुपये कीमत के जेवरात निकाले और भाग गए। बदमाशों के जाने के बाद महिला ने किसी तरह खुद को बंधनमुक्त कर शोर मचाया। तब बहू इंदू नीचे आईं। बाद में शोर पर आसपास के लोग आ गए। खबर पर पुलिस व कुलदीप आदि भी पहुंच गए। करीब दो घंटे तक चली जांच के बाद पुलिस ने तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज किया। घर से लूटे गए माल की कीमत चार से पांच लाख रुपये बताई जा रही है।
इस वारदात में सीसीटीवी देखने के साथ-साथ बदमाशों को चिह्नित करने के लिए कुल चार टीमें लगाई गई हैं। परिवार की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। जल्द बामशों को पकड़ा जाएगा। परिवार से जुड़े कर्मचारियों व किरायेदारों को भी निगरानी में रखा जा रहा है।-सर्वम सिंह, सीओ तृतीय
दस मिनट में वारदात, सेंटर प्वाइंट की ओर गए
इस घटना की जांच में पुलिस ने पाया कि बदमाश घर के अंदर मुश्किल से 8 से दस मिनट तक रुके। इसके बाद वे महावीर पार्क की गलियों में ही घूमते हुए निकले हैं। देर शाम तक पुलिस ने 50 से अधिक सीसीटीवी देखे। मगर वे गलियों से बाहर आते नहीं दिखे। मगर इतना जरूर अंदेशा है कि जिस तरह बदमाश गलियों से घूमते दिखे। उससे वे सेंटर प्वाइंट की ओर जाते दिखे हैं। अब पुलिस रात में सेंटर प्वाइंट के सीसीटीवी भी देखेगी। इधर, घर में लगे सीसीटीवी का डीवीआर खराब मिला है।
साथ में दुपट्टा लाए थे बदमाश
इस घटना में बदमाश जो दुपट्टा लाए थे। उसे यूं ही महिला के हाथ पांव बांधने के चलते छोड़ गए। उस दुपट्टे को लेकर परिवार ने कहा कि ये हमारा नहीं है। इससे अंदेशा लगाया गया है कि बदमाश खुद ही अपना दुपट्टा साथ लेकर आए थे। साथ में जिस तरह उन्होंने आते ही अंदर महिला को धक्का देकर बंधक बनाया। उससे यह अंदेशा लगाया जा रहा है कि उन्हें महिला के अकेले होने की भनक थी। इसीलिए वे चंद मिनट में वारदात को अंजाम देकर भाग गए।
महावीर पार्क में पहले भी हुईं वारदात
महावीर पार्क इलाका शहर का पॉश इलाका कहा जाता है। यहां तमाम कारोबारी, सरकारी व निजी क्षेत्र के अफसरों के आवास हैं। इस इलाके में लूट व चोरी की कई संगीन वारदात पिछले कुछ वर्षों में हुई हैं।
कहीं फेरी लगाने वाले तो नहीं हुए सक्रिय
पिछले दिनों शहर में बदमाशों के दिन में सक्रिय होने की अफवाह उड़ी थी। उनके विषय में लोगों ने कहा था कि वे दिन में ऐसे घरों को चिह्नित करते हैं, जिनमें या तो बुजुर्ग लोग अकेले रहते हैं। या फिर घरों में ताले लगे रहते हैं। उन घरों की तांक झांक कर पूरी जानकारी जुटाने के बाद वे वारदात करते हैं। इसे लेकर अंदेशा है लगाया जा रहा है कि कहीं वही गिरोह तो इस घटना को अंजाम नहीं दे गया।
घंटों तक बदहवाश रही बुजुर्ग महिला, कुछ न बोल पाई
इस वारदात के बाद कुलदीप की मां राजकुमारी की हालत सबसे ज्यादा खराब रही। पुलिस, परिजनों व रिश्तेदारों के आने के घंटों बाद तक भी वह इतनी डरी रही कि खुद को संभाल नहीं पा रही थी। बदमाशों ने जिस अंदाज में उसे आते ही अंदर धकेल कर बंधक बनाया। फिर तमंचा ताना। उससे वह इतनी डर गई थी कि वह बाल-बाल बच गई।