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Aligarh News: इतिहास के शिक्षकों के हाथ थमा दीं अर्थशास्त्र की कॉपियां

Thu, 19 Mar 2026 03:19 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 19 Mar 2026 03:19 AM IST
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Economics copies were handed over to history teachers
डीएवी इंटर कॉलेज में केंद्र व्यवस्थापक डॉ. विपिन वार्ष्णेय को समस्याओं के बारे में जानकारी देते - फोटो : Amar ujala
यूपी बोर्ड की कॉपियों का मूल्यांकन बुधवार से शुरू हुआ, लेकिन पहले ही दिन व्यवस्था की परतें खुलती नजर आईं। कहीं विषय बदले हुए थे, तो कहीं जिम्मेदारियों से बचने की कोशिश करते शिक्षकों की भीड़ दिखी। कुल मिलाकर केंद्रों पर अजीबोगरीब तस्वीर देखने को मिली। सबसे चौंकाने वाला मामला तब सामने आया, जब अर्थशास्त्र की कॉपियां जांचने के लिए इतिहास के परीक्षकों को थमा दी गईं। कॉपियां खोलते ही शिक्षक हैरान रह गए। मामला तुरंत केंद्र व्यवस्थापक तक पहुंचा और सुधार के लिए प्रार्थना पत्र लिए गए।
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दरअसल, यूपी बोर्ड के हाईस्कूल और इंटर की कॉपियों का मूल्यांकन 18 मार्च से शुरू हुआ। अलीगढ़ जिले में कुल 3.50 लाख कॉपियों का मूल्यांकन होना है जिसके लिए मंगलवार देर शाम तक 50 हजार कॉपियां जांचने के लिए अलग अलग केंद्रों पर पहुंची गईं। कॉपियों को जांचने के लिए विभाग ने करीब एक हजार शिक्षकों की ड्यूटी लगाई है। इसलिए पहले ही दिन केंद्रों पर शिक्षकों की भीड़ उमड़ पड़ी। कोई डीएचई की कुर्सी से बचने की जुगत में था, तो कोई अपनी ड्यूटी बदलवाने के लिए व्यवस्थापक कार्यालय के बाहर डटा रहा। दोपहर तक कुछ विषयों की कॉपियां केंद्र पर नहीं पहुंचने की सूचना भी मिली।
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बदल गईं कॉपियां, आंखों में बताया मोतियाबिंद

हाईस्कूल के सामाजिक विज्ञान के दो भागों में कॉपियों का आवंटन उलट गया। भाग-2 (भूगोल-अर्थशास्त्र) की कॉपियां इतिहास-नागरिक शास्त्र के परीक्षकों को और भाग-1 (इतिहास-नागरिक शास्त्र) की कॉपियां भूगोल-अर्थशास्त्र वालों को मिल गईं। इधर, केंद्र पर एक और मानवीय पहलू भी सामने आया। आंखों में मोतियाबिंद से जूझ रहे एक शिक्षक ने उप प्रधान परीक्षक (डीएचई) की जिम्मेदारी लेने से इन्कार कर दिया, लेकिन परीक्षक के रूप में काम करने को तैयार हो गए। रघुवीर सहाय इंटर कॉलेज केंद्र के प्रधानाचार्य डॉ. विपिन कुमार वार्ष्णेय ने बताया कि विषय गड़बड़ी की जानकारी बोर्ड को भेज दी गई है।
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दो महीने की बच्ची और जिम्मेदारी के बीच उलझी मां

मूल्यांकन केंद्र से एक भावुक तस्वीर भी सामने आई। एक महिला शिक्षिका ने अपनी दो महीने की बच्ची का हवाला देते हुए डीएचई की जिम्मेदारी लेने से इन्कार कर दिया। उन्होंने कहा, बच्ची अभी बहुत छोटी है, उसे मेरी जरूरत है। हालांकि, वह परीक्षक के रूप में कॉपियां जांचने के लिए तैयार हो गईं।
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