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आर्थिक तंगी भी नहीं रोक सकी कोमल के कदम

Sun, 28 Apr 2019 01:58 AM IST
राजेश सिंह न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़। Published by: राजेश सिंह Updated Sun, 28 Apr 2019 01:58 AM IST
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Economic stagnation can not stop even soft steps
कोमल वार्ष्णेय - फोटो : Rupesh
कहते हैं जब हौसले बुलंद हों और अपना काम ईमानदारी से करते चलो तो कामयाबी मिल ही जाती है। एक फिल्मी डायलॉग भी कामयाब बनो, कामयाबी अपने आप तुम्हारे पीछे चली आएगी। यह डायलॉग जयगंज बजरिया निवासी कोमल वार्ष्णेय पर सटीक बैठते हैं। कोमल कामयाब बनीं, कामयाबी अपने आप पीछे चली आई। कोमल के परिवार की आर्थिक तंगी भी कोमल के कदम टॉपर बनने से नहीं रोक सकी। 
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बता दें कि कोमल वार्ष्णेय ने जिले में हाई स्कूल परीक्षा में दूसरा स्थान पाया है। कोमल का परिवार  आर्थिक रूप से कमजोर है। पिता चंद्रशेखर वार्ष्णेय स्प्रे पेंटर हैं। मजदूरी कर महीने में साढ़े पांच हजार से लेकर साढ़े छह हजार तक कमा ही लेते हैं। कोमल की फीस 800 रुपये प्रति महीने है। 400 रुपये के लगभग प्रति महीने कापी, स्टेशनरी आदि पर आ जाता है। कपड़े, ड्रेस आदि का खर्च अलग। कोमल की बड़ी बहन रश्मि वार्ष्णेय बीएससी फाइनल कर चुकी हैं। जबकि बड़े भाई ने बीए के पेपर दिए हैं। कोमल की मदद के लिए उनकी बड़ी बहन हमेशा से आगे रहती हैं। 
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बड़ी बहन होम ट्यूशन के जरिए कमाए हुए लगभग तीन हजार रुपये प्रतिमाह में से आधे से ज्यादा रकम कोमल की पढ़ाई पर लगा देती हैं। कोमल ने बताया कि सासनीगेट पर गणित की कोचिंग पढ़ाने वाले जीतू शर्मा व भुजपुरा में साइंस की कोचिंग चलाने वाले दिगंबर सिंह उनके परिवार की हालात देखकर फीस नहीं लेते थे। कई बार कोमल को आर्थिक तंगी ने परेशान किया। लेकिन बाद में सब ठीक हो जाता।
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किराए के मकान में रहते हैं, पढ़ाई को नहीं किया नजरअंदाज
मां विमलेश वार्ष्णेय ने बताया कि वह गृहणी हैं। वह भले पांच पास थीं। लेकिन कभी बच्चों को पढ़ाई से अछूता नहीं रहने दिया। विमलेश ने बताया कि जिस घर में वह रहते हैं, किराए का है। मां ने बताया कि भले ही उन्होंने व उनके पति ने छोटी छोटी खुशियों को नजर अंदाज कर दिया। लेकिन बच्चों की पढ़ाई को कभी नजर अंदाज नहीं किया। अपनी पढ़ी लिखी सहेलियों के सहारे वह बच्चों की पढ़ाई का अंदाजा लगा लेती थीं कि बच्चे पढ़ रहे हैं कि नहीं। 
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