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ईसी की बैठकः पैनल बनने की संभावना कम
अलीगढ़/ब्यूरो
Updated Sat, 19 Mar 2016 02:24 AM IST
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एएमयू
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नए कुलपति की नियुक्ति एवं पैनल से संबंधित प्रक्रिया पर विचार करने के लिए एएमयू एग्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठक शनिवार को होने जा रही है। इसमें यूजीसी अधिनियम 2010 की चर्चा होने की पूरी संभावना है।
भरोसे मंद सूत्रों पर विश्वास करे तो नए कुलपति का पैनल बनने की संभावना नगण्य है। कुछ ईसी सदस्यों का कहना है कि बैठक में यूजीसी अधिनियम 2010 पर चर्चा होगी। दरअसल यूजीसी अधिनियम 2010 के अनुसार एएमयू या किसी भी केंद्रीय विश्वविद्यालय का कुलपति वहीं व्यक्ति बन सकता है, जिसके पास प्रोफेसर के रूप में दस वर्ष का अनुभव है। एएमयू प्रशासन का कहना है कि अभी तक एएमयू द्वारा इस अधिनियम को स्वीकार नहीं किया गया है।
यूजीसी अधिनियम को नजरअंदाज कर पैनल बनता है तो वैसे लोगों को भी शामिल किया जा सकता है, जिनके पास प्रोफेसर का दस वर्ष का अनुभव नहीं है। चर्चा पर भरोसा करे तो पीवीसी सैयद अहमद अली का नाम इसी आधार पर उछाला जा रहा है। कुछ लोग तो यह भी समझाने का प्रयास कर रहे है कि एएमयू ने यूजीसी अधिनियम 2010 स्वीकार कर लिया तो यूनिवर्सिटी हाथ से निकल जाएगी। वहीं कुछ लोग यूजीसी अधिनियम को स्वीकार नहीं किए जाने के दावे को विरोधाभासी मानते है।
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शिक्षकों का एक बड़ा वर्ग यूजीसी अधिनियम को स्वीकार करने के पक्ष में है और इसे शिक्षकों के सम्मान के साथ जोड़कर देखा जा रहा है। ऐसे लोगों का कहना है कि यूजीसी अधिनियम 2010 के अनुसार ही कुलपति का पैनल बनना चाहिए और इससे यूनिवर्सिटी को कोई खतरा नहीं है। वर्तमान कुलपति जमीरउद्दीन शाह की नियुक्ति को इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है और मामला विचाराधीन है।
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भरोसे मंद सूत्रों पर विश्वास करे तो नए कुलपति का पैनल बनने की संभावना नगण्य है। कुछ ईसी सदस्यों का कहना है कि बैठक में यूजीसी अधिनियम 2010 पर चर्चा होगी। दरअसल यूजीसी अधिनियम 2010 के अनुसार एएमयू या किसी भी केंद्रीय विश्वविद्यालय का कुलपति वहीं व्यक्ति बन सकता है, जिसके पास प्रोफेसर के रूप में दस वर्ष का अनुभव है। एएमयू प्रशासन का कहना है कि अभी तक एएमयू द्वारा इस अधिनियम को स्वीकार नहीं किया गया है।
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यूजीसी अधिनियम को नजरअंदाज कर पैनल बनता है तो वैसे लोगों को भी शामिल किया जा सकता है, जिनके पास प्रोफेसर का दस वर्ष का अनुभव नहीं है। चर्चा पर भरोसा करे तो पीवीसी सैयद अहमद अली का नाम इसी आधार पर उछाला जा रहा है। कुछ लोग तो यह भी समझाने का प्रयास कर रहे है कि एएमयू ने यूजीसी अधिनियम 2010 स्वीकार कर लिया तो यूनिवर्सिटी हाथ से निकल जाएगी। वहीं कुछ लोग यूजीसी अधिनियम को स्वीकार नहीं किए जाने के दावे को विरोधाभासी मानते है।
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शिक्षकों का एक बड़ा वर्ग यूजीसी अधिनियम को स्वीकार करने के पक्ष में है और इसे शिक्षकों के सम्मान के साथ जोड़कर देखा जा रहा है। ऐसे लोगों का कहना है कि यूजीसी अधिनियम 2010 के अनुसार ही कुलपति का पैनल बनना चाहिए और इससे यूनिवर्सिटी को कोई खतरा नहीं है। वर्तमान कुलपति जमीरउद्दीन शाह की नियुक्ति को इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है और मामला विचाराधीन है।