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भूकंप: जापान को भेजा अलीगढ़ी मॉडल
आशीष निगम
Updated Fri, 22 Apr 2016 01:52 AM IST
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भूकंप
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भौतिक विज्ञानी और सिंघानिया यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति प्रो.आर स्वरूप ने भूकंप के कंपनों से बिजली पैदा करने वाले अपने प्रोजेक्ट को जापान के प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंचा दिया है। जापानी सरकार से सकारात्मक जवाब मिलने से वह बेहद उत्साहित हैं। हाल में जापान में आये भूकंप के बाद प्रो. स्वरूप ने इसकी फिर से पहल की थी, लगभग 10 साल से वह इस संबंध में जापान के सरकारी महकमों में भूकंप से बचने के अपने शोध पत्र और उपाय भेज रहे हैं।
गौर हो कि प्रो. स्वरूप ने एक क्रियाशील मॉडल बनाया है। जिसमें भूकंप के बिना ही धरती के गर्भ में होने वाले साधारण कंपनों से निकलने वाली ध्वनि तरंगों को यांत्रिकी उपकरणों के माध्यम से विद्युतीय ऊर्जा में बदलने का सार्थक काम संभव हुआ है।
प्रो. स्वरूप ने खुद इसे मिनी वोल्ट, माइक्रो एंपियर करंट के रूप में कंप्यूटर में दर्ज किया है। वह इस मॉडल के साथ एक बड़े स्तर के मॉडल को जापान की सीमाओं पर लगा कर भूकंप के प्रभावों को कम करने, उसकी तीव्रता को घटाने, भूकंपीय ऊर्जा को विद्युतीय ऊर्जा में बदलने की सिफारिश करते रहे हैं। इस प्रस्ताव को उन्होंने जापानी सरकार को भेजा है। जिससे विनाशकारी ऊर्जा विकासशील ऊर्जा में बदली हो सकेगा।
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उन्होंने इस संबंध में अपना शोध पत्र भी वहां भेजा है। खास बात यह है कि जापानी प्रधानमंत्री शिंजे अबी के कार्यालय से उनको इसका ईमेल से जवाब मिला है। जिसमें कहा गया है कि वह अपने मॉडल और शोध की एक समीक्षात्मक रिपोर्ट दो हजार शब्दों में भेजें। इसके बाद प्रो. ने ये रिपोर्ट वहां भेज दी। इससे पहले उन्होंने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय को भी इस घटनाक्रम से अवगत कराया है, ताकि वैश्विक स्तर पर भारत की इस पहल का सार्थक असर हो सके।
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गौर हो कि प्रो. स्वरूप ने एक क्रियाशील मॉडल बनाया है। जिसमें भूकंप के बिना ही धरती के गर्भ में होने वाले साधारण कंपनों से निकलने वाली ध्वनि तरंगों को यांत्रिकी उपकरणों के माध्यम से विद्युतीय ऊर्जा में बदलने का सार्थक काम संभव हुआ है।
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प्रो. स्वरूप ने खुद इसे मिनी वोल्ट, माइक्रो एंपियर करंट के रूप में कंप्यूटर में दर्ज किया है। वह इस मॉडल के साथ एक बड़े स्तर के मॉडल को जापान की सीमाओं पर लगा कर भूकंप के प्रभावों को कम करने, उसकी तीव्रता को घटाने, भूकंपीय ऊर्जा को विद्युतीय ऊर्जा में बदलने की सिफारिश करते रहे हैं। इस प्रस्ताव को उन्होंने जापानी सरकार को भेजा है। जिससे विनाशकारी ऊर्जा विकासशील ऊर्जा में बदली हो सकेगा।
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उन्होंने इस संबंध में अपना शोध पत्र भी वहां भेजा है। खास बात यह है कि जापानी प्रधानमंत्री शिंजे अबी के कार्यालय से उनको इसका ईमेल से जवाब मिला है। जिसमें कहा गया है कि वह अपने मॉडल और शोध की एक समीक्षात्मक रिपोर्ट दो हजार शब्दों में भेजें। इसके बाद प्रो. ने ये रिपोर्ट वहां भेज दी। इससे पहले उन्होंने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय को भी इस घटनाक्रम से अवगत कराया है, ताकि वैश्विक स्तर पर भारत की इस पहल का सार्थक असर हो सके।