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अलीगढ़ : अप्रैल, मई, जून की फीस जबरन वसूल की तो होगी कार्रवाई
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लॉकडाउन के चलते सब काम धंधे बंद है। लोग घरों में बैठे है, कमाई भी ठंडी पड़ी है। ऐसे में हजारों अभिभावकों को राहत देने के लिए जिला प्रशासन ने सोमवार को एक बड़ा फैसला किया है। इसके तहत अब कोई भी स्कूल संचालक या शैक्षणिक संस्थान तीन महीने की फीस वर्तमान में जमा कराने के लिए बाध्य नहीं कर पाएगा। ये तीन महीने अप्रैल, मई और जून के होंगे। ये नियम सभी संस्थाओं, स्कूलों पर एक सामान लागू होगा, चाहे वह किसी भी बोर्ड के हों।
कोरोना की आपदा अवधि समाप्त होने पर अप्रैल, मई, जून की फीस आगामी महीनों में समायोजित (एडजस्ट) होगी। इसकी सूचना अभी से अभिभावकों को दी जाएगी, ताकि वह बेवजह परेशान न हों। उक्त आदेश का उल्लंघन राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम-2005 की धारा-51 के अंतर्गत दंडनीय होगा। उक्त आदेश का अनुपालन कड़ाई से किया जाए। इस संबंध में जिलाधिकारी/जिला मजिस्ट्रेट चंद्र भूषण सिंह ने सोमवार को आदेश पत्र जारी किया है। डीएम ने कहा है कि कोई भी शैक्षणिक संस्थान अगर अप्रैल, मई, जून की फीस जमा कराने को बाध्य करेगा तो उसके खिलाफ आपदा अधिनियम की धाराओं में कार्रवाई होगी। इस आदेश की प्रति उत्तर प्रदेश शिक्षा निदेशक लखनऊ, एसएसपी अलीगढ़, डीआईओएस अलीगढ़, बीएसए अलीगढ़ को भेज दी गई है। जिससे कहीं भी शिकायत आने पर संबंधित अधिकारी छात्र छात्राओं और अभिभावकों को राहत पहुंचा सके।
4.70 लाख विद्यार्थियों को बड़ी राहत
जिलाधिकारी के एक आदेश के बाद लगभग चार लाख सत्तर हजार विद्यार्थियों और उनके परिजनों की अप्रैल, मई और जून की एडवांस फीस जमा करने में बड़ी राहत मिली है। सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड के स्कूलों में एक विद्यार्थी की तीन महीने की औसतन फीस लगभग 8 से 10 हजार रुपये तक होती है। इसी तरह यूपी बोर्ड के स्कूलों की तीन महीने की एक विद्यार्थी की फीस लगभग एक हजार रुपये तक है। ऐसे में लाखों विद्यार्थी और उनके परिजन राहत की सांस ले रहे हैं। हां, एएमयू के स्कूलों में मई जून की फीस नहीं ली जाती है।
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एएमयू के पीआरओ जीशान अहमद ने बताया कि इस अवधि की फीस एएमयू से संचालित स्कूलों में नहीं ली जाती है। जब जुलाई में नया सत्र शुरू होगा तो फीस ली जाएगी। यूपी बोर्ड से संचालित जिले के सबसे पुरातन नौरंगीलाल राजकीय इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य शीलेंद्र कुमार ने बताया कि जिला प्रशासन के आदेश का पालन होगा और नये आदेशों के क्रम में इस अवधि की फीस नियमानुसार आगे समायोजित की जाएगी। इस फैसले से लगभग तीन लाख विद्यार्थियों को बड़ी राहत मिलेगी।
पब्लिक स्कूल डेवलेपमेंट सोसाइटी के अध्यक्ष प्रवीन अग्रवाल ने कहा कि जिलाधिकारी के आदेश का पालन होगा। अभिभावक व स्कूल प्रबंधन में सामंजस्य स्थापित करने का प्रयास सराहनीय है। अप्रैल, मई व जून की फीस अगले तीन तिमाही में समायोजित की जाएगी ताकि अभिभावक की जेब पर बोझ न पड़े। ट्रांसपोर्ट का किराया ट्रांसपोर्ट के शुरू होने पर लिया जाएगा। अलीगढ़ अभिभावक एसोसिएशन के चेयरमेन सौरभ अग्रवाल सिक्ससंस ने कहा कि जिला प्रशासन का फैसला सराहनीय है। अगर स्कूल प्रबंधन को सुविधा हो तो अप्रैल, मई व जून महीने की फीस में सम्मानजनक डिस्काउंट भी दें, जिससे अभिभावकों को राहत मिल सके। अगर स्कूल वाले कमजोर हैं और फीस माफ करने की क्षमता नहीं रखते हैं तो यह फीस अगले तीन तिमाही में समायोजित कर दी जाए।
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कोरोना की आपदा अवधि समाप्त होने पर अप्रैल, मई, जून की फीस आगामी महीनों में समायोजित (एडजस्ट) होगी। इसकी सूचना अभी से अभिभावकों को दी जाएगी, ताकि वह बेवजह परेशान न हों। उक्त आदेश का उल्लंघन राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम-2005 की धारा-51 के अंतर्गत दंडनीय होगा। उक्त आदेश का अनुपालन कड़ाई से किया जाए। इस संबंध में जिलाधिकारी/जिला मजिस्ट्रेट चंद्र भूषण सिंह ने सोमवार को आदेश पत्र जारी किया है। डीएम ने कहा है कि कोई भी शैक्षणिक संस्थान अगर अप्रैल, मई, जून की फीस जमा कराने को बाध्य करेगा तो उसके खिलाफ आपदा अधिनियम की धाराओं में कार्रवाई होगी। इस आदेश की प्रति उत्तर प्रदेश शिक्षा निदेशक लखनऊ, एसएसपी अलीगढ़, डीआईओएस अलीगढ़, बीएसए अलीगढ़ को भेज दी गई है। जिससे कहीं भी शिकायत आने पर संबंधित अधिकारी छात्र छात्राओं और अभिभावकों को राहत पहुंचा सके।
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4.70 लाख विद्यार्थियों को बड़ी राहत
जिलाधिकारी के एक आदेश के बाद लगभग चार लाख सत्तर हजार विद्यार्थियों और उनके परिजनों की अप्रैल, मई और जून की एडवांस फीस जमा करने में बड़ी राहत मिली है। सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड के स्कूलों में एक विद्यार्थी की तीन महीने की औसतन फीस लगभग 8 से 10 हजार रुपये तक होती है। इसी तरह यूपी बोर्ड के स्कूलों की तीन महीने की एक विद्यार्थी की फीस लगभग एक हजार रुपये तक है। ऐसे में लाखों विद्यार्थी और उनके परिजन राहत की सांस ले रहे हैं। हां, एएमयू के स्कूलों में मई जून की फीस नहीं ली जाती है।
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एएमयू के पीआरओ जीशान अहमद ने बताया कि इस अवधि की फीस एएमयू से संचालित स्कूलों में नहीं ली जाती है। जब जुलाई में नया सत्र शुरू होगा तो फीस ली जाएगी। यूपी बोर्ड से संचालित जिले के सबसे पुरातन नौरंगीलाल राजकीय इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य शीलेंद्र कुमार ने बताया कि जिला प्रशासन के आदेश का पालन होगा और नये आदेशों के क्रम में इस अवधि की फीस नियमानुसार आगे समायोजित की जाएगी। इस फैसले से लगभग तीन लाख विद्यार्थियों को बड़ी राहत मिलेगी।
पब्लिक स्कूल डेवलेपमेंट सोसाइटी के अध्यक्ष प्रवीन अग्रवाल ने कहा कि जिलाधिकारी के आदेश का पालन होगा। अभिभावक व स्कूल प्रबंधन में सामंजस्य स्थापित करने का प्रयास सराहनीय है। अप्रैल, मई व जून की फीस अगले तीन तिमाही में समायोजित की जाएगी ताकि अभिभावक की जेब पर बोझ न पड़े। ट्रांसपोर्ट का किराया ट्रांसपोर्ट के शुरू होने पर लिया जाएगा। अलीगढ़ अभिभावक एसोसिएशन के चेयरमेन सौरभ अग्रवाल सिक्ससंस ने कहा कि जिला प्रशासन का फैसला सराहनीय है। अगर स्कूल प्रबंधन को सुविधा हो तो अप्रैल, मई व जून महीने की फीस में सम्मानजनक डिस्काउंट भी दें, जिससे अभिभावकों को राहत मिल सके। अगर स्कूल वाले कमजोर हैं और फीस माफ करने की क्षमता नहीं रखते हैं तो यह फीस अगले तीन तिमाही में समायोजित कर दी जाए।