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खामी : ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक ऐसा किया तैयार कि कोई भी नहीं होगा फेल

Wed, 30 Mar 2022 12:09 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 30 Mar 2022 12:09 AM IST
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Drawback: Driving test track prepared in such a way that no one will fail
सेंसर या ब्रिक्स के बिना तैयार हुआ मंडलीय ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट का टेस्टिंग ट्रैक। - फोटो : CITY OFFICE
राजा तिवारी
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पांच करोड़ रुपये की लागत से मंडलीय ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (डीटीआई) बनकर तैयार हो गया है। हैंडओवर होने से पहले परिवहन विभाग की टीम निरीक्षण करने पहुंची तो कई खामियां उजागर हुईं। ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक पर न तो सेंसर लगाए गए हैं और न ही ब्रिक्स लगी हैं, जबकि इसकी चौड़ाई भी मानक से अधिक है। यह स्थिति देखकर टीम ने पूछा कि क्या इस ट्रैक पर कोई आवेदक फेल होगा?। इसके बाद कार्यदायी संस्था और अधिकारियों ने खामियों को दूर करने के लिए मंथन शुरू कर दिया है।
वर्ष 2018 में मंडलीय ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट का प्रस्ताव पास हुआ था। इसके बाद चार साल में पांच करोड़ दो लाख रुपये से यह इंस्टीट्यूट आईटीआई परिसर में बनकर तैयार हो गया है। इसका निर्माण कार्यदायी संस्था सीएनडीएस जल निगम ने किया है। परिवहन विभाग के उच्चाधिकारियों का प्रयास है कि 31 मार्च से पहले इसे हैंडओवर करा लिया जाए। इसी क्रम में मंगलवार को एआरटीओ रंजीत सिंह, आरआई चंपा लाल निगम, प्रधान सहायक उपेंद्र सिंह, डीबीए शुभम जैसवाल डीटीआई का निरीक्षण करने पहुंचे। अधिकारियों ने सबसे पहले टेस्टिंग ट्रैक पर अपनी गाड़ी दौड़ाई। पार्किंग व्यवस्था देखी। इसके बाद कार्यालय की इमारत देखी। इस दौरान कई खामियां मिलीं। इस पर कार्यदायी संस्था से अधिकारियों ने पूछा कि अगर ट्रैक पर ड्राइविंग टेस्ट शुरू हो जाएं तो कोई भी आवेदक फेल ही नहीं होगा, क्योंकि ट्रैक की सड़क काफी चौड़ी है। किनारों पर न तो सेंसर लगाए गए हैं और न ही ब्रिक्स लगाई गई हैं। इस पर कार्यदायी संस्था के अधिकारियों ने जवाब मिला कि मौजूदा बजट में यह कार्य दर्ज नहीं था।
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प्रोजेक्ट में 91 लाख रुपये कम हुए थे स्वीकृत
सेंसर युक्त मंडलीय डीटीआई (ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट) के निर्माण के लिए कार्यदायी संस्था सीएनडीएस जल निगम ने शासन को पांच करोड़ 93 लाख रुपये का प्रस्ताव बनाकर भेजा था। शासन ने पांच करोड़ दो लाख रुपये के प्रस्ताव को स्वीकृत किया था। एआरटीओ रंजीत सिंह ने बताया कि 84 लाख रुपये के सेंसर लगने थे लेकिन बजट में कटौती होने के कारण सेंसर नहीं लग सके।
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टेस्टिंग ट्रैक पर सेंसर और ब्रिक्स का कार्य नहीं हुआ है। जानकारी मिली है कि निर्माणाधीन बजट में यह कार्य शामिल नहीं है। यह बात भी सही है कि अगर टेस्ट हो जाए तो कोई आवेदक फेल नहीं होगा। इस पर मंथन शुरू कर दिया है। जल्द ही कोई न कोई व्यवस्था की जाएगी। - रंजीत सिंह, एआरटीओ प्रशासन।
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