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मैं दिनकर का पांचजन्य भी गहन मौन में खोया हू, उन बेटों की याद की कहानी लिखते लिखते रोया हूं

Thu, 09 Jan 2020 11:48 PM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 09 Jan 2020 11:48 PM IST
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Dr. vishnu gupta poet conference.
कवि सम्मेलन में मौजूद अतिथि। - फोटो : SIKANDHRA RAHU
संवाद न्यूज एजेंसी, सिंकदराराऊ।
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कस्बा के हुमैरा गेस्ट हाउस में आयोजित डॉ. विष्णु सक्सेना गीत सम्मान समारोह के मौके पर आयोजित विराट अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में कवियों ने नगर के सैकड़ों श्रोताओं को पूरा रात काव्य गंगा में डुबकी लगाई। श्रोता कवि ओज के गीतों पर उत्तेजित नजर आए तो हास्य व्यंग के कविताओं पर ठहाके लगाते नजर आए। गीतों पर श्रोता झूमते नजर आए। पूरी रात गेस्ट हाउस तालियों की गड़गड़ाहट और वाह वाह की आवाज से गूंजता रहा।
सरस्वती वंदना के बाद देश के जाने माने ओज के कवि डॉ. हरीओम पवार ने अपने कविताओं से सीमा पर शहीद हुए सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने ... मैं दिनकर का पांचजन्य भी गहन मौन में खोया हूं, उन बेटों की याद कहानी लिखते लिखते रोया हूं, उन आंखों की दो बूंदों से सातों सागर हारे हैं, जब मेहंदी वाले हाथों ने मंगलसूत्र उतार हैं.. सुनाकर सबको भावुक कर दिया। इसके अलावा उन्होंने भूख के ऊपर कविताओं सुनाकर वहां मौजूद लोगों के दिलों को झकझोर दिया।
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डॉ. विष्णु सक्सेना ने प्रेम रंग बिखेरते हुए ... जब भी कहते हो आप हमसे कि अब चलते हैं, हमारी आंख से आंसू नहीं संभलते हैं, अब न कहना कि संग दिल कभी नहीं रोते, जितने दरिया हैं, पहाड़ों से ही निकलते हैं... गीत प्रस्तुत किए। सम्मानित गीतकार गजेंद्र प्रियांशु ने ... जब राजमहल के वैभव से कुटिया की छवि हो जाए बड़ी, समझो स्ता हिल रही अवश्यमभावी प्रलयंकारी घड़ी... गीत प्रस्तुत किए। जयपुर से पधारे अशोक चारण ने सीएए और एनआरसी के समर्थन ... बीज अगर ये मसल दिया तो फसल नीं बन पाएगा, देश धर्मशाला होगा तो महल नहीं बन पाएगा... गीत पेश किए।
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दिल्ली से पधारे हास्य व्यंग कवि डॉ. प्रवीण शुक्ल ने .. जाने कितने अनुभवों का है यहा बस सार अंतिम, तोड़ना मत मन के रिश्तों का कभी भी तार अंतिम... सुनाकर वाहवाही बटोरी। लखनऊ के कवि सर्वेश अस्थाना ने .. रिश्तों में तकरार बहुत है, लेकिन इनमें प्यार बहुत है, सारी दुनिया खुश रखने को बस अपना परिवार बहुत है.. के माध्यम से परिवार की महत्ता पर रोशनी डाली।

देश के साधु संतों के आचरण पर कटाक्ष करते हुए पद्म अलबेला हाथरस ने .. सजधज के गोरी चली, लेकर हरि का नाम, आशा की थी राम की, मिल गए आशा राम। कर्म उजागर हो रहे बाबा है भयभीत, हनीप्रीत की प्रीत में तड़प रहे गुरमीत। फिरोजाबाद के कवि प्रवीण कुमार पांडे प्रज्ञार्थू ने प्रणय का गीत कुछ इस प्रकार सुनाया.. दिल में बसा के मुझसे निकाला नहीं गया, जब से गए हो मुंह में निवाला नहीं गया, नाजुक थी आपकी कलाइयां बहुत प्रिय तुमसे पवित्र प्रेम संभाला नहीं गया। विशाखापट्टनम से पधारीं कवयित्री माया अग्रवाल का भी सम्मान किया गया।
कवि सम्मेलन के अंत में प्रसिद्ध हिंदी गीतकार किशन सरोज की मौत पर सभी कवि व श्रोताओं ने दो मिनट का मौन धारण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
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