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डॉक्टर हड़ताल पर अडिग, मरीज बेहाल

Wed, 26 Apr 2017 01:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूूराे
अमर उजाला ब्यूूराे Updated Wed, 26 Apr 2017 01:28 AM IST
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Doctor stabbed on strike, patient unhealthy
जेएन मेडिकल कालेज में बिना इलाज लौटते मरीज। - फोटो : Amar Ujala
जेएन मेडिकल कॉलेज के रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन की अघोषित हड़ताल में दो सदस्य शामिल नहीं है। मंगलवार को आरडीए पदाधिकारियों ने दो रेजीडेंट डॉक्टरों को काम करते हुए देख लिया। मामला आरडीए की जनरल बॉडी मीटिंग तक पहुंच गया। आरडीए सदस्यों ने दोनो के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्णय लिया। हालांकि क्या कार्रवाई की जाएगी, यह अभी स्पष्ट नहीं हुआ है। 
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मंगलवार को आरडीए के पदाधिकारियों ने गुपचुप तरीके से मेडिकल कॉलेज का भ्रमण किया। इस दौरान एनेस्थेसिया के डॉ. हसान (जेआर-2) और गायनी की डॉ. श्रुति (जेआर-2) काम करती नजर आए। इसकी सूचना पहुंचने के बाद आरडीए में खलबली मच र्गई। रात्रि नौ बजे की जीबीएम में इस मसले को जोर-शोर से उठाया गया और दोनो सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई का निर्णय लिया गया।
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हालांकि इस संबंध में पूछे जाने पर आरडीए अध्यक्ष डॉ. एम अब्दुल्ला ने बताया कि दोनो को समझा दिया गया है। अघोषित हड़ताल के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि वह पूर्व की तरह जारी है, क्योंकि अभी तक एएमयू प्रशासन द्वारा उनकी एक भी मांग नहीं मानी गई है। आरडीए सदस्य डॉक्टरों के साथ मारपीट करने वाले युवकों की गिरफ्तारी की मांग कर रहे है। 
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अन्य अस्पतालों में बढ़ी भीड़
एएमयू के जेएन मेडिकल कालेज में चल रही डाक्टरों की हड़ताल के चलते मलखान सिंह जिला अस्पताल, दीन दयाल संयुक्त अस्पताल और मोहन लाल गौतम जिला महिला अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ गई है। इन अस्पतालों में गंभीर रोगियों को उपचार नहीं मिल पा रहा है। मेडिकल कालेज में डाक्टरों की हड़ताल के चलते मरीज जिला अस्पताल का रुख कर रहे हैं, लेकिन उन्हें ज्यादा फायदा नहीं मिल पा रहा है। दीन दयाल संयुक्त अस्पताल में आपरेशन की भी व्यवस्था नहीं है। अपर निदेशक चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ. गीता प्रधान ने बताया कि मेडिकल कालेज से उनके यहां डिलीवरी केस रैफर किए जा रहे हैं। मरीजों की संख्या भी बढ़ गई है। स्थिति से निपटने के लिए डाक्टरों को अलर्ट कर दिया गया है। जो भी संसाधन और दवाएं उपलब्ध हैं। उनमें बेहतर से बेहतर इलाज करने का प्रयास किया जाएगा। हड़ताल की वजह से सबसे ज्यादा परेशानी बाहर से आने वाले रोगियों को हो रही है।

युवक की मौत, लौटाए जा रहे गंभीर मरीज
एएमयू के जेएन मेडिकल कॉलेज में रेजीडेंट डॉक्टरों की अघोषित हड़ताल लगातार तीसरे दिन भी जारी रही। इसकी वजह से निर्धन मरीजों के ऊपर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है। 
हड़ताल के कारण सर्वाधिक प्रभाव इमरजेंसी एवं वार्ड में देखा जा रहा है। एएमयू के छात्र एवं कर्मचारियों को छोड़कर अन्य गंभीर मरीजों को वापस लौटाया जा रहा है। सासनी गेट स्थित एक नर्सिंग होम से तालशपुर निवासी मकबुल नामक गंभीर मरीज को मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। यहां पहुंचने पर मरीज को भर्ती नहीं किया गया। परिजन के आंखों से आंसू निकल पड़े। वहीं जमालपुर के फजलुर्रहमान भाग्यशाली निकले। कार दुर्घटना में बच्चे के साथ घायल हुए फजलुर्रहमान को इमरजेंसी में चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई। सूत्रों की माने तो इमरजेंसी में दो ऑपरेशन हुए, जिसमें एक एएमयू छात्र है। यमुना एक्सप्रेस वे पर दुर्घटना के बाद मेडिकल में भर्ती कराया गया था। वहीं मेडिसन एवं आर्थोपेडिक समेत कई विभागों के ओपीडी में जबर्दस्त भीड़ रही। तीन बजे और उसके बाद तक सीनियर कंसलटेंट मरीजों को देखते रहे। अधिकारियों की माने तो ओपीडी में मंगलवार को करीब 1700 मरीजों को देखा गया। वहीं कई दिनों से मेडिकल में भर्ती धर्मेंद्र नामक युवक की मौत हो गई। एक दुर्घटना में उसके सिर में गंभीर चोट लगी थी। चिकित्सकों की माने तो मेडिकल में औसतन दस मरीजों की रोज मृत्यु होती है। मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक प्रो. एम हैरिस खान ने बताया कि मरीजों की परेशानी कम से कम हो, इसके लिए सारे इंतजाम किए जा रहे हैं। सीनियर कंसलटेंट पूरी मेहनत से मरीजों की सेवा कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि एएमयू छात्रों एवं डॉक्टरों की भिड़ंत के बाद रेजीडेंट डॉक्टर पिछले तीन दिन से अघोषित हड़ताल पर हैं।

एएमयू हड़ताल खत्म कराए, नहीं तो केंद्र से करेंगे बात  
एएमयू के जेएन मेडिकल कॉलेज के डाक्टरों की हड़ताल का मुद्दा अब केंद्र सरकार तक पहुंचाने की तैयारी हो रही है। मंडलायुक्त सुभाष चंद्र शर्मा ने दो टूक कह दिया है कि अगर स्थानीय स्तर से एएमयू इंतजामिया इस मामले का हल नहीं कर पाई तो मानव संसाधन विकास मंत्रालय और केंद्र सरकार को इससे अवगत कराया जाएगा। ताकि केंद्र सरकार के हस्तक्षेप से हड़ताल को खत्म कराया जा सके। उन्होंने कहा कि वह सीधे तौर पर एएमयू के प्रबंधन में दखल नहीं दे सकते, लेकिन चुपचाप बैठकर तमाशा भी नहीं देखा जाएगा। आए दिन डाक्टरों की हड़ताल मरीजों के लिए बहुत घातक है।  
कमिश्नर ने जिलाधिकारी से कहा है कि वह एएमयू कुलपति जमीरउद्दीन शाह से बात करें और हर हाल में जल्द से जल्द डाक्टरों की हड़ताल खत्म कराएं। क्योंकि इससे मरीजों को बेहद परेशानी हो रही है। मेडिकल कालेज में उपचार नहीं मिलने से मरीजों की बड़ी संख्या सरकारी अस्पतालों में बढ़ती जा रही है। कहा कि सरकारी ओपीडी में एक एक डाक्टर 400-400 मरीज देख रहे हैं। ऐसे में अब और मरीजों की संख्या बढ़ी तो स्थिति बदहाल हो सकती है। इसलिए अब मेडिकल कालेज के डाक्टरों की हठधर्मिता को अनदेखा नहीं किया जा सकता है। एएमयू इंतजामिया इस मामले में अतिशीघ्र कार्रवाई करे और हड़ताल को खत्म कराए नहीं तो केंद्र सरकार को पत्र लिखा जाएगा। 


नहीं हुई जांच पूरी, रिपोर्ट आज सौंपे जाने की उम्मीद 
एएमयू के जेएन मेडिकल कॉलेज में छात्रों एवं रेजीडेंट डॉक्टरों के बीच मारपीट मामले की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय कमेटी द्वारा मंगलवार को रिपोर्ट नहीं सौंपी गई है। सूत्रों का कहना है कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है और रिपोर्ट बुधवार तक कुलपति को सौंपे जाने की उम्मीद है। उल्लेखनीय है कि एएमयू वीसी ने इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर रिपोर्ट मंगलवार शाम पांच बजे तक देने का निर्देश दिया था। कमेटी द्वारा जांच शुरू कर दी गई है, लेकिन निर्धारित समय के अंदर पूरी नहीं हो सकी। सबसे बड़ा सवाल है कि क्या कमेटी अपनी रिपोर्ट में छात्र संघ उपाध्यक्ष नदीम अंसारी का नाम शामिल करेगी।
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