{"_id":"5b26b5124f1c1b2b428b564b","slug":"do-not-get-even-after-drought-wait","type":"story","status":"publish","title_hn":"दुत्कार-इंतजार के बाद भी नहीं मिला मोदी की योजना में कर्ज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दुत्कार-इंतजार के बाद भी नहीं मिला मोदी की योजना में कर्ज
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
Updated Mon, 18 Jun 2018 01:03 AM IST
विज्ञापन
दुत्कार-इंतजार के बाद भी नहीं मिला मोदी की योजना में कर्ज
- फोटो : Dig Vishal
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
साहब, गरीब आदमी के लिए क्या बैंक में लोन के लिए आवेदन करना पाप है। बैंकों से क्या नीरव मोदी, विजय माल्या, मेहुल चौकसी, ललित मोदी, विक्रम कोठारी जैसों को ही लोन मिलता है। मुद्रा लोन से गरीबों का सहारा बनने का जोर शोर से प्रचार करने वाली मोदी सरकार के राज में हमें तो स्वीकृति के दो माह बाद भी लोन तो मिला नहीं, बैंक के उच्चाधिकारियों की फटकार मिली अलग से। ऊपर से हमारी आर्थिक स्थिति तो और भी खराब हो गई। आर्थिक विपन्नता की असल तस्वीर सार्वजनिक होने के बाद पहले जो काम मिल रहा था, वह भी बंद हो गया है। इससे हमारे और हमारे परिवार के सामने भुखमरी की स्थिति आ गई है। यह पीड़ा है सासनी गेट के कृष्णापुरी मठिया गली नंबर छह निवासी दंपती सुलेखा वर्मा व उनके पति मनोज वर्मा की, जो उन्होंने बैंक लोकपाल को लिखे पत्र में व्यक्त की। इस दंपती को नौ माह से कर्ज के लिए दौड़ा रहे बैंक मैनेजर का कहना है कि ऐसी कोई योजना ही नहीं है।
यह है मामला
कृष्णापुरी मठिया गली नंबर छह निवासी सुलेखा वर्मा व उनके पति मनोज वर्मा सोने चांदी के जेवर बनाने के पुश्तैनी कारीगर हैं। वर्तमान में वह भाड़े पर यही काम करते हैं। उन्होंने बताया कि हमारे तीन बेटियां क्रमश: 10, 7 और 3 साल की हैं। हम उन्हें उच्च शिक्षा दिलाना चाहते हैं। इसके लिए व्यापार बढ़ाने की गरज से हमने केनरा बैंक सासनीगेट शाखा में काम बढ़ाने के लिए आठ लाख के इस्टीमेट सहित मुद्रा योजना में लोन के लिए आवेदन किया था। साथ में पूरे परिवार का आधार कार्ड, जन्मतिथि के लिए हाईस्कूल के प्रमाणपत्र समेत अन्य सभी आवश्यक प्रमाणपत्र लगाए थे, लेकिन बैंक के मैनेजर पहले तो कल आना या परसों आना कहकर टालते रहे। पिछले दिनों यह कहकर चलता कर दिया कि ऐसी कोई योजना ही नहीं है।
स्वीकृत होने के बाद भी मिला नहीं कर्ज
मामले की जानकारी मिलने पर दैनिक अमर उजाला के अप्रैल के अंक में उनकी पीड़ा संबंधी खबर प्रकाशित हुई। उन्होंने बताया कि खबर के बाद डीएम हरकत में आए और लीड बैंक मैनेजर को मामला देखने के आदेश दिए। इसके परिणामस्वरूप केनरा बैंक की सासनी गेट शाखा द्वारा हमारा ऋण आवेदन स्वीकार कर लिया गया। हम संतुष्ट थे कि अब लोन मिल जाएगा। लीड बैंक मैनेजर की सलाह पर हम बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक से मिले तो उन्होंने ‘अमर उजाला’ के पास जाने पर जमकर फटकार लगाई। एक अन्य अफसर के पास भेजा तो उन्होंने ने भी नहीं बख्शा। इस सबके बावजूद हम आशान्वित थे कि लोन मिल जाएगा। सासनीगेट शाखा प्रबंधक ने दोबारा से सारे कागज मांगे। इसके बाद 12 जून को उन्होंने मिलने के लिए बुलाया। बोले कि मेरा 30 जून को रिटायरमेंट है। अब मेरे हाथ में कुछ नहीं है। अब तो आपका मामला आने वाले साहब ही देखेंगे। इसके बाद लोन की आशा पूरी तरह समाप्त हो गई। उन्होंने लोकपाल से इस प्रकरण में दोषी बैंक शाखा के सभी जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
विज्ञापन
क्या है मुद्रा योजना
आठ अप्रैल 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुद्रा बैंक का शुभारंभ किया था। इस योजना को तीन हिस्सों में बांटा गया-
1. व्यापार शुरू करने वाले यानी कि शिशु वर्ग-इसके दायरे में 50 हजार रुपये तक के कर्ज आते हैं
2. मध्यम स्थित में कर्ज तलाशने वाले यानी कि किशोर वर्ग-इसके दायरे में 50 हजार से पांच लाख रुपये तक के लोन
3. विकास के अगले स्तर पर जाने की चाहत रखने वाले यानी कि तरुण वर्ग-इसके दायरे में पांच से दस लाख तक के लोन
विज्ञापन
यह है मामला
कृष्णापुरी मठिया गली नंबर छह निवासी सुलेखा वर्मा व उनके पति मनोज वर्मा सोने चांदी के जेवर बनाने के पुश्तैनी कारीगर हैं। वर्तमान में वह भाड़े पर यही काम करते हैं। उन्होंने बताया कि हमारे तीन बेटियां क्रमश: 10, 7 और 3 साल की हैं। हम उन्हें उच्च शिक्षा दिलाना चाहते हैं। इसके लिए व्यापार बढ़ाने की गरज से हमने केनरा बैंक सासनीगेट शाखा में काम बढ़ाने के लिए आठ लाख के इस्टीमेट सहित मुद्रा योजना में लोन के लिए आवेदन किया था। साथ में पूरे परिवार का आधार कार्ड, जन्मतिथि के लिए हाईस्कूल के प्रमाणपत्र समेत अन्य सभी आवश्यक प्रमाणपत्र लगाए थे, लेकिन बैंक के मैनेजर पहले तो कल आना या परसों आना कहकर टालते रहे। पिछले दिनों यह कहकर चलता कर दिया कि ऐसी कोई योजना ही नहीं है।
विज्ञापन
स्वीकृत होने के बाद भी मिला नहीं कर्ज
मामले की जानकारी मिलने पर दैनिक अमर उजाला के अप्रैल के अंक में उनकी पीड़ा संबंधी खबर प्रकाशित हुई। उन्होंने बताया कि खबर के बाद डीएम हरकत में आए और लीड बैंक मैनेजर को मामला देखने के आदेश दिए। इसके परिणामस्वरूप केनरा बैंक की सासनी गेट शाखा द्वारा हमारा ऋण आवेदन स्वीकार कर लिया गया। हम संतुष्ट थे कि अब लोन मिल जाएगा। लीड बैंक मैनेजर की सलाह पर हम बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक से मिले तो उन्होंने ‘अमर उजाला’ के पास जाने पर जमकर फटकार लगाई। एक अन्य अफसर के पास भेजा तो उन्होंने ने भी नहीं बख्शा। इस सबके बावजूद हम आशान्वित थे कि लोन मिल जाएगा। सासनीगेट शाखा प्रबंधक ने दोबारा से सारे कागज मांगे। इसके बाद 12 जून को उन्होंने मिलने के लिए बुलाया। बोले कि मेरा 30 जून को रिटायरमेंट है। अब मेरे हाथ में कुछ नहीं है। अब तो आपका मामला आने वाले साहब ही देखेंगे। इसके बाद लोन की आशा पूरी तरह समाप्त हो गई। उन्होंने लोकपाल से इस प्रकरण में दोषी बैंक शाखा के सभी जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
विज्ञापन
क्या है मुद्रा योजना
आठ अप्रैल 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुद्रा बैंक का शुभारंभ किया था। इस योजना को तीन हिस्सों में बांटा गया-
1. व्यापार शुरू करने वाले यानी कि शिशु वर्ग-इसके दायरे में 50 हजार रुपये तक के कर्ज आते हैं
2. मध्यम स्थित में कर्ज तलाशने वाले यानी कि किशोर वर्ग-इसके दायरे में 50 हजार से पांच लाख रुपये तक के लोन
3. विकास के अगले स्तर पर जाने की चाहत रखने वाले यानी कि तरुण वर्ग-इसके दायरे में पांच से दस लाख तक के लोन