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मंडल रेल प्रबंधक को कारण बताओ नोटिस जारी
Fri, 27 Nov 2020 08:49 PM IST
राजेश सिंह
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
Published by: राजेश सिंह
Updated Fri, 27 Nov 2020 08:49 PM IST
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सेवानिवृत्त रेलवे खलासी की पत्नी के भरण पोषण के मुकदमे में न्यायालय के आदेश की अवहेलना मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) उत्तर मध्य रेलवे को भारी पड़ गई। परिवार न्यायालय ने इस मामले में डीआरएम को कारण बताओ नोटिस जारी कर 2 दिसंबर को व्यक्तिगत रूप से तलब कर लिया। इस नोटिस के जारी होते ही रेलवे में हड़कंप मच गया। आनन-फानन भुगतान की औपचारिकताएं पूरी कर रेलवे अधिवक्ता की ओर से न्यायालय में जवाब दाखिल किया गया है। देरी पर खेद भी व्यक्त किया गया है।
रेलवे अधिवक्ता सत्यदेव के अनुसार, बेबी पत्नी रामकिशन निवासी रेलवे लोको कालोनी सिविल लाइंस, अलीगढ़ ने पति के खिलाफ भरण पोषण याचिका 10 जनवरी 2014 को प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय के समक्ष दाखिल की।
इस पर न्यायालय ने 25 अगस्त 2018 को अंतरिम व 21 फरवरी 2019 को अंतिम आदेश दिया, जिसमें पति रामकिशन निवासी कच्ची झोपड़ी 845 फेथफुलगंज, छावनी कानपुर को महिला व उसके बेटे को प्रतिमाह 9 हजार रुपये भरण-पोषण देने के लिए कहा। मगर इस आदेश के बाद भी पीड़ित को भुगतान न हुआ तो पीड़ित महिला ने परिवार न्यायालय में यह अपील की कि आरोपी के पेंशन खाते से भुगतान कराने का आदेश डीआरएम रेलवे को दिया जाए।
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इस पर परिवार न्यायालय ने 5 फरवरी 2020 को डीआरएम को आदेश दिए कि आरोपी के पेंशन खाते से पीड़ित महिला के बैंक खाते में भरण पोषण की राशि ट्रांसफर कराई जाए। इस आदेश के बाद भी कोई प्रतिक्रिया न होने पर 3 नवंबर 2020 को अपर प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय कोर्ट संख्या-4 के न्यायाधीश ने डीआरएम को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए 2 दिसंबर को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में तलब कर लिया। जिसमें कहा गया कि आपके द्वारा जानबूझकर न्यायालय के आदेश की अवहेलना की जा रही है।
रेलवे अधिवक्ता सत्यदेव के अनुसार नोटिस मिलने पर उनकी ओर से 26 नवंबर को न्यायालय में जवाब दाखिल किया गया है, जिसमें बताया गया कि न्यायालय का आदेश 11 जून 2020 को कोरोना काल में लाकडाउन के कारण विलंब से प्राप्त हुआ, जिस कारण आदेश के पालन में विलंब हुआ है। अब न्यायालय के आदेश पर महिला के बैंक खाते में अब तक के देय 2 लाख 2 हजार का भुगतान रामकिशन के बैंक खाते से 19 नवंबर को कर दिया गया है।
साथ में प्रतिमाह 9 हजार रुपये भुगतान की व्यवस्था भी बैंक के जरिये सुनिश्चित करा दी गई है। जवाब के अंत में विलंब के लिए खेद व्यक्त किया है। साथ ही नोटिस को निरस्त करने का अनुरोध किया है। जिस पर 3 दिसंबर को फैसला होगा।
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रेलवे अधिवक्ता सत्यदेव के अनुसार, बेबी पत्नी रामकिशन निवासी रेलवे लोको कालोनी सिविल लाइंस, अलीगढ़ ने पति के खिलाफ भरण पोषण याचिका 10 जनवरी 2014 को प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय के समक्ष दाखिल की।
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इस पर न्यायालय ने 25 अगस्त 2018 को अंतरिम व 21 फरवरी 2019 को अंतिम आदेश दिया, जिसमें पति रामकिशन निवासी कच्ची झोपड़ी 845 फेथफुलगंज, छावनी कानपुर को महिला व उसके बेटे को प्रतिमाह 9 हजार रुपये भरण-पोषण देने के लिए कहा। मगर इस आदेश के बाद भी पीड़ित को भुगतान न हुआ तो पीड़ित महिला ने परिवार न्यायालय में यह अपील की कि आरोपी के पेंशन खाते से भुगतान कराने का आदेश डीआरएम रेलवे को दिया जाए।
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इस पर परिवार न्यायालय ने 5 फरवरी 2020 को डीआरएम को आदेश दिए कि आरोपी के पेंशन खाते से पीड़ित महिला के बैंक खाते में भरण पोषण की राशि ट्रांसफर कराई जाए। इस आदेश के बाद भी कोई प्रतिक्रिया न होने पर 3 नवंबर 2020 को अपर प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय कोर्ट संख्या-4 के न्यायाधीश ने डीआरएम को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए 2 दिसंबर को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में तलब कर लिया। जिसमें कहा गया कि आपके द्वारा जानबूझकर न्यायालय के आदेश की अवहेलना की जा रही है।
रेलवे अधिवक्ता सत्यदेव के अनुसार नोटिस मिलने पर उनकी ओर से 26 नवंबर को न्यायालय में जवाब दाखिल किया गया है, जिसमें बताया गया कि न्यायालय का आदेश 11 जून 2020 को कोरोना काल में लाकडाउन के कारण विलंब से प्राप्त हुआ, जिस कारण आदेश के पालन में विलंब हुआ है। अब न्यायालय के आदेश पर महिला के बैंक खाते में अब तक के देय 2 लाख 2 हजार का भुगतान रामकिशन के बैंक खाते से 19 नवंबर को कर दिया गया है।
साथ में प्रतिमाह 9 हजार रुपये भुगतान की व्यवस्था भी बैंक के जरिये सुनिश्चित करा दी गई है। जवाब के अंत में विलंब के लिए खेद व्यक्त किया है। साथ ही नोटिस को निरस्त करने का अनुरोध किया है। जिस पर 3 दिसंबर को फैसला होगा।