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Aligarh: बिना जरूरत चढ़ा दीं प्लेटलेट्स, आंखों से आया खून, चली गई आंखों की रोशनी, हॉस्पीटल पर 30 लाख जुर्माना
Sat, 26 Aug 2023 09:51 PM IST
चमन शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: चमन शर्मा
Updated Sat, 26 Aug 2023 09:51 PM IST
सार
न्यायाधीश हसनैन कुरैशी व सदस्य आलोक उपाध्याय ने माना है कि 53 वर्ष की महिला का जीवन अभी कम से कम 20 वर्ष और है। महिला को नेत्र सुख नहीं वापस किया जा सकता। मगर एक लाख रुपये प्रति वर्ष हर्जाना के हिसाब से बीस वर्ष के जीवन काल के लिए बीस लाख रुपये, पांच लाख रुपये मानसिक संताप, पांच लाख रुपये जुर्माना व दस हजार रुपये वाद व्यय दिया जाए।
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जिला उपभोक्ता फोरम
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अलीगढ़ में छेरत के पृथ्वी राज हॉस्पिटल में दो वर्ष पहले डेंगू पीडि़त महिला के बिना जरूरत प्लेटलेट्स चढ़ा दी गई, जिससे महिला की आंखों में खून उतर आया। कुछ दिन बाद उसकी आंखों की रोशनी चली गई। इस मामले में परिवार की ओर से जिला उपभोक्ता आयोग में दायर अर्जी पर आयोग ने अस्पताल के संचालक डॉक्टर पर तीस लाख रुपये का जुर्माना ठोका है। साथ में आदेश दिया है कि वाद दायर करने के दिन से नौ फीसदी ब्याज दर के साथ यह जुर्माना 45 दिन में देना होगा।
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घटनाक्रम के अनुसार अतरौली तहसील के हरदुआगंज के गांव नारौली निवासी एटा में तैनात पुलिसकर्मी सचिन की 53 वर्षीय मां मिथलेश देवी को बुखार की शिकायत हुई। उन्हें छह नवंबर 2021 को छेरत के पृथ्वीराज हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। जहां डेंगू की पुष्टि हुई और डॉ.मलखान सिंह ने पहले 46 हजार और फिर 74 हजार प्लेटलेट्स बताते हुए दो घंटे में चार पैकेट प्लेटलेट्स चढ़ा दी।
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आरोप है कि कुछ देर बाद उनकी आंखों से खून बहने लगा और रोशनी चली गई। हालत बिगड़ती देख उन्हें मेडिकल कालेज रेफर किया गया। यहां से उन्हें एम्स रवाना कर दिया गया। वहां सीटी स्कैन व अन्य जांच में पाया गया कि गैर जरूरी होने के बावजूद प्लेटलेट्स चढ़ाने पर ऐसा हुआ है। डॉक्टरों ने कहा कि अब अगर दस दिन में इनकी आंखें नहीं निकलवाईं तो दिक्कत हो जाएगी। उस समय परिजन उन्हें घर ले आए और बाद में आंखों को निकलवाया गया। तब से महिला दृष्टिहीन हैं।
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मामले में महिला की ओर से आयोग में अर्जी दायर की गई। जिसकी सुनवाई करते हुए आयोग के अध्यक्ष न्यायाधीश हसनैन कुरैशी व सदस्य आलोक उपाध्याय ने माना है कि 53 वर्ष की महिला का जीवन अभी कम से कम 20 वर्ष और है। महिला को नेत्र सुख नहीं वापस किया जा सकता। मगर एक लाख रुपये प्रति वर्ष हर्जाना के हिसाब से बीस वर्ष के जीवन काल के लिए बीस लाख रुपये, पांच लाख रुपये मानसिक संताप, पांच लाख रुपये जुर्माना व दस हजार रुपये वाद व्यय दिया जाए।
हॉस्पिटल संचालक को जिम्मेदार मानते हुए वाद दाखिल होने के दिन से 45 दिन में ब्याज सहित इस भुगतान के आदेश दिए हैं। इस विषय में महिला के पति कल्याण सिंह व पुत्र सचिन का कहना है कि उन्हें नहीं पता था कि मां के साथ ऐसा होगा। वरना वे कभी इस अस्पताल में नहीं जाते।