Lok Adalat: गुस्से में छूटी नौकरी, एमबीए पत्नी व बेटा भी छूटे...छह साल बाद हुए साथ
परिवार न्यायालयों ने कुल 48 जोड़ों का अलीगढ़ में लगी लोक अदालत के दौरान मिलन कराया। लोक अदालत में कुल 141704 वादों का निस्तारण कर 58 करोड़ 97 हजार 37 रुपये धनराशि तय की गई। जिसमें सभी न्यायालयों में सुलह समझौते के आधार पर 44075 वादों का निस्तारण कर 4 करोड़ 20 लाख 61 हजार 268 रुपये जुर्माना वसूला गया।
विस्तार
कैलिफोर्निया में नौकरी कर रहे हैदराबाद के आईआईटी इंजीनियर को अपने गुस्से का अहसास छह साल बाद हुआ। इन छह वर्षों में पत्नी व बेटे से दूरी के साथ-साथ विदेशी नौकरी तक छूट गई। पत्नी के खिलाफ तलाक की लड़ाई लड़ने भी उसे हैदराबाद से हवाई यात्रा कर अलीगढ़ आना पड़ता था। जब अदालत में चली काउंसिलिंग के बीच गुस्सा शांत हुआ तो पत्नी बेटे को साथ ले जाने को राजी हो गया। अलीगढ़ में लगी लोक अदालत में 13 दिसंबर को 48 जोड़ों को हंसी खुशी साथ भेजा गया।
हैदराबाद के रहने वाले इंजीनियर की शादी 2011 में अलीगढ़ की एमबीए शिक्षित युवती से हुई थी। इस बीच एक बेटा भी हुआ, जो अब 12 वर्ष का है। मगर पारिवारिक विवाद से जुड़े गुस्से में 2019 में दोनों में विवाद शुरू हो गया। कुछ दिन बाद ही पत्नी बेटे को लेकर मायके आ गई। इंजीनियर ने हैदराबाद में पत्नी के खिलाफ तलाक दायर कर दिया। मगर उसकी पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट की शरण ली। जिसके आदेश पर तलाक संबंधी मुकदमा हैदराबाद से अलीगढ़ परिवार न्यायालय भेज दिया गया। यहां करीब 15 तारीखों पर वह हवाई यात्रा कर हैदराबाद से अलीगढ़ आया। इस कानूनी लड़ाई के चलते उसकी जॉब छूट गई। मजबूरी में हैदराबाद आकर दूसरी जॉब शुरू कर दी। मगर यहां आने पर हुईं काउंसिलिंग में उसे अपनी गलती का अहसास हुआ व पत्नी बेटे को साथ ले जाने को राजी हो गया। इस तरह से परिवार न्यायालयों ने कुल 48 जोड़ों का शनिवार को लोक अदालत में मिलन कराया।
इससे पहले जिला जज पंकज कुमार अग्रवाल, वाणिज्यिक न्यायालय के पीठासीन अधिकारी रणधीर सिंह, एमएसीटी के पीठासीन अधिकारी जयसिंह पुंढीर व व सचिव विधिक सेवा प्राधिकरण नितिन श्रीवास्तव ने संयुक्त रूप से लोक अदालत का शुभारंभ किया। जिला जज पंकज कुमार अग्रवाल ने कहा कि लोक अदालत में आपसी समझौते के आधार पर मामलों का निपटारा होता है। यह ऐसा प्लेटफार्म है, जहां समझौते के आधार पर दोनों पक्ष विजयी होते हैं। यह जानकारी देते हुए प्राधिकरण सचिव नितिन श्रीवास्तव ने सभी का आभार व्यक्त किया।
ये निपटाए गए कुल वाद
इस दौरान लोक अदालत में कुल 141704 वादों का निस्तारण कर 58 करोड़ 97 हजार 37 रुपये धनराशि तय की गई। जिसमें सभी न्यायालयों में सुलह समझौते के आधार पर 44075 वादों का निस्तारण कर 4 करोड़ 20 लाख 61 हजार 268 रुपये जुर्माना वसूला गया। वहीं बैंक व प्रशासन द्वारा प्री-लिटिगेशन व अन्य माध्यमों से 97146 वादों का निस्तारण कर 279508769 रुपये प्रतिकर राशि तय की गई। वहीं स्थायी लोक अदालत अलीगढ़ द्वारा 29 वाद का निस्तारण कर 6715737 रुपये धनराशि तय की गई। साथ में उपभोक्ता विवाद परितोष आयोग ने 15 वाद का निस्तारण कर 505942 रुपये की धनराशि तय की गई।
ये रहे मौजूद
प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय संजीव फौजदार, उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष न्यायाधीश हसनैन कुरैशी, स्थायी लोक अदालत अध्यक्ष शंकरलाल, सदस्य सत्यदेव उपाध्याय, आरती, एडीजे प्रतिभा सक्सेना, अपर न्यायाधीश परिवार न्यायालय ललिता गुप्ता, ज्ञानेन्द्र सिंह, रचना, एडीजे राकेश वशिष्ठ, संजय कुमार यादव, अभिषेक कुमार बागडिय़ा, पारूल अत्री, रवीश अत्री, नवल किशोर सिंह, प्रदीप कुमार राम, अनिल कुमार, विनय तिवारी, अमित कुमार तिवारी, अंजू राजपूत, सीजेएम शिवम कुमार, रेलवे मजिस्ट्रेट शिवांक सिंह, दि अलीगढ़ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष शैलेन्द्र सिंह, सचिव दीपक बंसल, दि सिविल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सुधीर कुमार वाष्र्णेय सचिव संजीव कुमार शर्मा, विद्युत अधिवक्ता प्रमोद कुलश्रेष्ठ, परिवार न्यायालय काउंसलर योगेश सारस्वत आदि प्रमुख रूप से रहे।
मुंबई से आकर निपटाया 70 हजार रुपये का मुकदमा
इस लोक अदालत में मुंबई के एक कारोबारी ने खुद पर चल रहे 70 हजार रुपये का मुकदमा भी सुलहनामे के आधार पर निपटाया। यह मुकदमा 2018 में सासनी गेट के हार्डवेयर सप्लायर ने कराया था। जिसमें चेक दिए जाने के बाद भी भुगतान न होने का आरोप था। जिसे इस लोक अदालत में मुंबई से आकर निपटाया गया।