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शहर की सूरत बदलने के वादे संग मांग रहे वोट

Fri, 24 Nov 2017 01:59 AM IST
ब्यूूराे, अमर उजाला, अलीगढ़।
ब्यूूराे, अमर उजाला, अलीगढ़। Updated Fri, 24 Nov 2017 01:59 AM IST
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Demand votes with promises of change in city
कंकड़ वाली गली में जनसंपर्क करते मो. फुरकान। - फोटो : Amar Ujala
बसपा के  मेयर पद के प्रत्याशी मो. फुरकान का चुनाव कार्यालय भी उनके निवास पर ही है। सुबह सात बजे से ही कार्यालय व निवास पर बसपाइयों व उनके समर्थकों का जमावड़ा लगना शुरू हो जाता है। उनके काफिलों की गाड़ियों को भी चालक साफ कर तैयार कर लेते हैं। 
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सुबह करीब साढ़े आठ बजे सफेद कुर्ता-पजामा व बादामी रंग की जवाहर कट पहनकर जब फुरकान समर्थकों के बीच में आते हैं तो पार्षद पद के कई प्रत्याशी उनसे मांग करते हैं कि वह उनके इलाके में आकर चुनावी सभा करें। फुरकान भरोसा दिलाते हैं कि वह खुद जाकर उनके लिए वोट मांगेंगे। उनका जनसंपर्क व सभाएं कहां-कहां होेनी हैं, यह एक दिन पहले यानी बुधवार रात को ही तय हो चुका था। उसके बाद फुरकान अपनी सफारी गाड़ी संख्या यूपी 81 ए एक्स-8243 में बैठते हैं। दो अन्य गाड़ियां उनके काफिले में शामिल हो जाती हैं। चालक राहुल गाड़ी पर तैयार है, चुनावी कामकाज देख रहा फैजान उन्हें तयशुदा कार्यक्रम बता देता है।  
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उनका काफिला यहां से आजाद नगर पहुंचता है। वहां वह अपने समर्थकों के साथ डोर टू डोर जाकर विकास के नाम पर वोट मांगते हैं। कहते हैं कि उन्हें मौका दें, वह शहर की सूरत बदल देंगे और भाईचारे के साथ सभी को साथ लेकर विकास करेंगे। उसके बाद वह पहुंचते हैं मुस्ताक नगर। वहां भी यही सिलसिला जारी रहता है। बसपाई मो. फुरकान जिंदाबाद, बहुजन समाज पार्टी जिंदाबाद, बहन कु. मायावती जिंदाबाद, चढ़ गुंडों की छाती पर-वोट पड़ेगा हाथी पर, जीतेगा भाई जीतेगा-हाथी वाला जीतेगा, जैसे नारे लगाना शुरू कर देते हैं। इसके बाद फुरकान फिर अपने चुनाव कार्यालय आ जाते है। वहां थोड़ी देर समर्थकों के साथ सुस्ताते हैं और चाय की चुस्कियां लेते हैं। समर्थकों व चुनावी सलाहकारों के साथ मंत्रणा करते हैं। यहां से काफिला लाल डिग्गी में वार्ड नंबर 39 पहुंचता है। वहां बसपा वार्ड प्रत्याशी मुनीश अहमद समर्थकों के साथ मौजूद हैं। फुरकान वहां डोर टू डोर जाकर वोट मांगते हैं। लाग डिग्गी की गलियों में सन्नाटा है, लेकिन जब फुरकान के समर्थन में नारे लगते हैं तो लोग घरों से बाहर आ जाते हैं। एक गली में वह वोट मांगने के दौरान राजकीय ठेकेदार वाकिर अली को अपने साथ लेते हैं। वोटर फुरकान से वोट देने का वादा करते हैं। 
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मो. फुरकान पान वाली कोठी क्षेत्र में वार्ड नंबर 39 से सपा से पार्षद का चुनाव लड़ रहे रिजवान (मिंटो) के चुनाव कार्यालय जाते हैं और वहां पहुंचकर भी वोट मांगते हैं। सामने ही सपा मेयर प्रत्याशी मुजाहिद किदवई का घर भी उन्हें नजर आता है, लेकिन फुरकान वहां नहीं जाते। निकट ही एक ताला फैक्ट्री स्वामी हाजी इब्राहिम की फैक्ट्री पर जाते हैं, लेकिन वे उन्हें नहीं मिलते। उनका लड़का फोन पर हाजी इब्राहिम से उनकी बात कराता है। फुरकान उनसे सपोर्ट मांगते हैं और मिलने का समय पूछते हैं। इसके बाद काफिला वोट मांगता हुआ आगे निकल जाता है। 

यहां फुरकान समर्थकों के साथ एसएस मार्केट दोदपुर रोड पहुंचे। वहां दुकानदारों से वोट मांगते हैं और वादा करते हैं कि यदि उन्हें मेयर बनाया तो वह शहर को गंदगी, जलभराव, अतिक्रमण, जाम, दुर्गंध से निजात दिला देंगे। यहीं एक दुकान के बाहर वह कुछ देर पुत्तन भाई व नूर मोहम्मद के  साथ-साथ इलाके के अन्य लोगों से बातचीत करते हैं। यह भी लोग उन्हें भरोसा दिलाते हैं कि उन्हें ही वोट मिलेगा। शाम को अंबेडकर नगर व उसके बाद रात आठ बजे के बाद ऊपरकोट टनटनपाड़ा में सभाओं में फुरकान बसपा सुप्रीमो मायावती के शासनकाल की याद दिलाते हुए और विकास के वादे के साथ वोट मांगते हैं। देर रात तक सभाओं और संपर्क के बाद वह घर लौट गए।


ख्वाजा हलीम को पहनाई माला, मांगा सपोर्ट
जनसंपर्क के दौरान मो. फुरकान पैदल एसएस मार्केट दोदपुर रोड पर पहुंचते हैं, तो वहां निकट ही सपा के वरिष्ठ नेता व सपा सरकार में मंत्री रहे ख्वाजा हलीम का घर है। एक कार्यकर्ता उन्हें बताता है कि ख्वाजा हलीम साहब घर पर हैं, लेकिन अभी नहा रहे हैं। इस पर करीब 20 मिनट तक फुरकान समर्थकों के साथ बैठे रहते हैं। कुछ देर बाद वह गाड़ी में सवार होकर ख्वाजा हलीम के घर के बाहर पहुंचते हैं। उनके काफिले में चल रही दो अन्य गाड़ियां भी वहां पहुंच जाती हैं। फुरकान व उनके चंद समर्थक ख्वाजा हलीम के घर में घुसते हैं। एकाएक ख्वाजा हलीम वहां आ जाते हैं। मो. फुरकान एक समर्थक से माला मंगाते हैं और ख्वाजा हलीम को पहना देते हैं और उनसे आशीर्वाद मांगते हैं। जब फोटोग्राफर फोटो खींचने की कोशिश करता है, तो ख्वाजा हलीम उसे मना कर देते हैं और सभी को कमरे से जाने के लिए कहते हैं। बंद कमरे में ख्वाजा हलीम और फुरकान के बीच करीब पांच मिनट तक गुफ्तगू होेती है। बाहर निकलने पर फुरकान से पूछा गया, तो कहते हैं कि वोट मांगने तोे मैं कहीं भी जा सकता हूं। यहां भी वोट मांगने ही आया था।  
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