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Aligarh News: जट्टारी में पोखर से दशकों पुराने अस्थायी अतिक्रमण ध्वस्त

Wed, 01 Jul 2026 01:35 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 01 Jul 2026 01:35 AM IST
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Decades-old temporary encroachments on a pond in Jattari demolished
अतिक्रमण को ध्वस्त करती जेसीबी। - फोटो : samvad
जट्टारी कस्बे के आंधरी पट्टी स्थित भूडरा पोखर पर करीब 30 साल से चले आ रहे अस्थायी अवैध कब्जों को बुलडोजर से मंगलवार को ढहा दिया। तहसील प्रशासन और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने करीब पौने दो बीघा जमीन को कब्जा मुक्त कराया है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब पांच करोड़ रुपये बताई जा रही है।
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नायब तहसीलदार प्रियंका शर्मा के नेतृत्व में टीम दोपहर करीब एक बजे मौके पर पहुंची। टीम ने जेसीबी ने अवैध निर्माणों को गिराना शुरू कर दिया। कार्रवाई के दौरान कुछ लोगों ने विरोध किया, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई। पुलिस ने सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में पांच तुरंत युवकों को हिरासत में लिया। इनमें ललित, रामेश्वर, शिवम, मधुर और पिंटू शामिल हैं, जिनके खिलाफ शांतिभंग की कार्रवाई की गई है। नायब तहसीलदार ने स्पष्ट किया कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे बर्दाश्त नहीं होंगे और अभियान जारी रहेगा।
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ज्ञात रहे प्रशासन ने पहले सभी लोगों को नोटिस देकर जगह खाली करने के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज होने के बाद प्रशासन हरकत में आया। टीम में कानूनगो बनी सिंह, लेखपाल राहुल कुमार, सत्यप्रकाश यादव,थाना प्रभारी नरेंद्र कुमार शर्मा पुलिस बल के साथ मौजूद रहे।
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वर्जन
अस्थायी अतिक्रमण हटा दिया गया है। स्थायी अतिक्रमण के खिलाफ धारा 67 के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए नोटिस जारी किए जाएंगे और पोखर की पैमाइश भी की गई है। शिशिर कुमार सिंह, एसडीएम खैर



अतिक्रमण हटाने में एकतरफा कार्रवाई का आरोप
कस्बे में सरकारी पोखर की भूमि से अतिक्रमण हटाए जाने में टीम पर पक्षपात के आरोप लगाए हैं। बेघर हुए लोगों ने गरीबों को उजाड़ने और रसूखदारों को बख्शने का आरोप है।

प्रभावित लोगों ने प्रशासन की कार्यशैली को एकतरफा बताया। दिव्यांग गुलशन ने रोते हुए बताया कि उनके पशुओं का टिनशेड गिरा दिया गया है। पशु भीषण गर्मी में खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं, उन्हें कोई पूर्व नोटिस नहीं दिया गया। स्थानीय निवासी वृद्धा सावित्री ने कहा कि 25 बीघा पोखर में केवल गरीबों के आशियाने तोड़े गए। रसूखदारों के कब्जे क्यों नहीं हटाए गए। लोगों का कहना है कि बिना चेतावनी उनके वर्षों पुराने घर तोड़ दिए गए। इससे उनके सिर से छत छिन गई है।
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