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उजड़ी फसलें नहीं देख सके कर्ज में डूबे राम प्रसाद

Wed, 16 Mar 2016 02:01 AM IST
अलीगढ़/ब्यूरो
अलीगढ़/ब्यूरो Updated Wed, 16 Mar 2016 02:01 AM IST
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Crops could not desolate in debt Ram Prasad
किसान - फोटो : अलीगढ़/ब्यूरो
शुक्रवार-शनिवार को अचानक बेमौसम ओलावृष्टि के बाद बिछी हुई सरसों की फसल देख कर रविवार रात को किसान रामप्रसाद की सदमे से मौत हो गई। सोमवार को रामप्रसाद का अंतिम संस्कार किया गया। मंगलवार को भी घर पर मजमा लगा रहा। इस मौत से गां में हलचल मची है। हर कोई रामप्रसाद के घर पहुंच कर दिलासा देने लगा है लेकिन खुद अपनी फसल बर्बाद होने की चिंता भी सबके माथे पर है।
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मंगलवार को रामप्रसाद के बेटे राजवीर, वीरपाल, रामकुमार, राम गोपाल ने बताया कि परिवार की तंगहाली और उस पर फसलों की बर्बादी का सदमा ही उनके पिता की मौत का कारण बना। वीरपाल ने बताया कि पिता ने रविवार रात को सीने में दर्द होने की बात कही थी। इससे पहले वह बर्बाद फसल देख कर खाना पीना भी छोड़ चुके थे। शुक्रवार और शनिवार को दो दिन तक फसलों पर ओलावृष्टि होने से वह अंदर तक हिल गए थे। जिसकी वजह से ज्यादा किसी बात भी नहीं हो रही थी। यही बातें उनके दर्द की वजह बनी। घर में कुल 18 बीघा खेती है जिसमें 6 बीघा सरसों, 2 बीघा जौ और 10 बीघा गेहूं बोया गया है। सरसों पूरी तरह बिछ गई है, जौ और गेहूं भी खराब हो गया है।  
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वीरपाल ने कहा कि चार बेटों के परिवार में 13 पोते पोतियां हैं। उनकी बहन ओमवत्ती की शादी हो चुकी है। लेकिन अब परिवार के बड़े लड़कों और लड़कियाें की शादी होनी है।
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फसल खराब होने से पूरे घर का काम बिगड़ गया है। अगली सहालग में किसी की भी शादी नहीं हो पाएगी। हाल ही में मां रामवती का निधन हुआ तो 21 फरवरी को उनकी तेरहवीं हुई है। घर की माली स्थिति ठीक नहीं है, लगभग डेढ़ लाख रुपये का कर्ज है। ऐसे में तेरहवीं में भी कुछ और कर्ज हो गया है। रामप्रसाद का इलाज कराने में भी दिक्कत हुई, पैसे होते तो किसी बड़े अस्पताल में ले जाते हैं। निरक्षर होने के कारण पिता जी का किसान क्रेडिट कार्ड या जनधन योजना में खाता नहीं खुला। अगर खाता खुल जाता तो बैंक से आसानी से कर्ज मिल जाता लेकिन अफसरों ने कभी मदद नहीं की।

चारों बेटों ने कहा कि दो दिन गुजर जाने के बाद भी कोई भी नेता या अधिकारी उनके घर नहीं पहुंचा। सपाई नेता अपनी सरकार के    चार साल पूरे होने का जश्न मना रहे थे तो अफसर सरकार की उपलब्धियां गिनाने में व्यस्त रहे। भाजपा, रालोद और बसपा के साथ कांग्रेस ने भी इस मौत को कोई तवज्जो नहीं दी। ब्राह्मण बाहुल्य इस गांव में किसान की मौत के बाद नेताओं और अफसरों के बेहद निंदनीय रवैये के खिलाफ जबरदस्त आक्रोश है।
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