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सिपाही की ‘शह’ पर चल रहा था वसूली गैंग ?
Mon, 06 May 2019 02:08 AM IST
राजेश सिंह
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
Published by: राजेश सिंह
Updated Mon, 06 May 2019 02:08 AM IST
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हरिदासपुर में मामा भांजे के अपहरण में पकड़े गये आरोपी ।
- फोटो : Rupesh
कहते हैं कि अपराध की जड़ें बेहद कमजोर और कानून के हाथ बेहद लंबे होते हैं। लोधा क्षेत्र के गांव हरिदासपुर से मामा-भांजे के अपहरण में कुछ ऐसा ही तथ्य उजागर हुआ है। शहर में फर्जी एसओजी वालों का एक ऐसा वसूली गैंग चल रहा था, जो गलत धंधे करने वालों को उठाकर उन्हें धमकाता था और उन्हें फिर वसूली कर छोड़ देता था।
इसी गैंग ने वसूली के लिए मामा-भांजे को अगवा किया था, क्योंकि इनमें से मामा नशीले पदार्थ की बिक्री करता था और पूर्व में वह देहली गेट से जेल भी जा चुका है। मगर इस बार यह गैंग पुलिस के चंगुल में फंस गया और गैंग के दो साथी हत्थे चढ़ गए, जबकि दो भागने में सफल रहे।
मगर खास बात यह है कि घटना के बाद रात 9 बजे तक इस गैंग के सदस्य के मोबाइल पर महानगर पुलिस का एक सिपाही का बार-बार फोन कर रहा था। ऐसे में यह संदेश पैदा कर रहा है कि कहीं यह सब उसी सिपाही की ‘शह’ पर तो नहीं चल रहा था। इस तथ्य पर अधिकारी जांच की बात कह रहे हैं।
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आईपीएल के सटोरियों से भी कर चुके वसूलीः पुलिस पूछताछ में यह बात भी सामने आई है कि एएमयू कांड में जेल से छूटकर आने के बाद यह लोग कुछ पुलिसकर्मियों के लिए मुखबिरी करने लग गए थे। ताकि खुद पुलिस से बचे रहें। इसी बीच इनके दिमाग में धन कमाने का यह उपाय आया और एसओजी वाला बनकर यह धंधा शुरू कर दिया। यह गैंग अब से पहले इसी तरह कई लोगों से वसूली कर चुका है।
पूर्व में आईपीएल के सटोरियों को भी इसी तरह उठाकर उनसे रकम ऐंठ चुका है और फिर उन्हें छोड़ चुका है। इधर, पुलिस के विश्वस्त सूत्र बता रहे हैं कि जिस समय पुलिस टीमें इनके पीछे लगी हुई थीं। उस समय रात 9 बजे तक एक सिपाही का फोन रजत के मोबाइल पर आ रहा था। वह सिपाही बराबर रजत के संपर्क में था। इसलिए इस सिपाही की भूमिका पर भी अंदरखाने सवाल उठ रहे हैं और कहा जा रहा है कि हो न हो यह सब उस सिपाही की ‘शह’ पर ही कर रहे थे। हो सकता है कि गलत धंधे वालों के विषय में वही सिपाही इन्हें इनपुट देता रहा हो।
गिरफ्तारी के दौरान ट्रेन में सवार होकर भागा एक अपराधी
एसपी सिटी अभिषेक ने रविवार को प्रेसवार्ता में बताया कि शनिवार शाम लोधा के गांव हरिदासपुर निवासी किसान जितेंद्र सिंह के तीन बेटों में सबसे बड़े प्रशांत उर्फ पंकज (25) व उसके नगला मसानी निवासी मामा मनोज पुत्र गोपाल (30) को सफेद रंग की स्कार्पियो सवार चार बदमाश आए अगवा कर ले गए थे। इससे पहले दोनों को तलाशी ली और मनोज की जेब से गांजे की पुड़िया मिलने पर यह कहकर ले गए कि तुम तस्करी करते हो। चलो हम एसओजी वाले हैं।
इस दौरान एक बदमाश मनोज की स्कूटी लेकर अलग गया, जबकि तीन बदमाश उन्हें कार में ले गए। इस खबर पर जब पंकज के पिता ने बदमाशों का पीछा किया तो उससे और मनोज के ही नंबर से उसकी बीवी के नंबर पर फोन कर दोनों परिवारों से दो दो लाख रुपये की फिरौती मांगी गई। इस बीच बदमाशों ने अपनी गाड़ी बदली और वह स्कार्पियो के बजाय काले रंग की ब्रीजा नंबर यूपी 81 बीजेड 0024 में आ गए।
उन्होंने परिवार को कभी गभाना टोल, कभी बरौली, कभी मसूदाबाद, कभी मीनाक्षी पुल तो कभी तस्वीर महल पर रकम देकर छोड़ने के लिए बुलाया गया। इसी बीच पूर्व मेयर शकुंतला भारती की एंट्री हुई और पुलिस हरकत में आई। इसके बाद मोबाइल लोकेशन के आधार पर पुलिस ने ब्रीजा सवार बदमाशों को पोस्टमार्टम केंद्र के पास लोको कॉलोनी में घेर लिया, जहां रास्ता आगे बंद होने के कारण दो बदमाश दबोचे और अगवा मामा बरामद कर लिए लिए गए, जबकि एक बदमाश दिल्ली की ओर जाती ट्रेन में दौड़कर सवार हो गया।
इस दौरान लोधा थाने का सिपाही उत्तम सिंह उसके पीछे भागा, मगर गिरने के कारण जख्मी हो गया। इस मौके पर सीओ गभाना सुरेंद्र सिंह, सीओ तृतीय अनिल समानिया, इंस्पेक्टर सिविल लाइंस अमित कुमार, एसओ लोधा प्रेमपाल सिंह, सर्विलांस प्रभारी अभय शर्मा मौजूद रहे।
एएमयू के चर्चित गोली इम्प्लांट कांड में जेल गए थे दो
एसओजी और लोधा पुलिस के संयुक्त ऑपरेशन में गिरफ्तारी के बाद लोधा थाने ले जाकर जब गिरफ्तार बदमाशों ने अपने नाम रजत सिंह पुत्र पुष्पेंद्र निवासी वैष्णो कॉलोनी सुरेंद्र नगर व अंकित कुमार सिंह उर्फ अंशुल पुत्र धर्मेंद्र निवासी रावण टीला संगम विहार क्वार्सी, ट्रेन में बैठकर फरार हुए साथी का नाम दीपांशु उर्फ डॉलर निवासी लोको कॉलोनी सिविल लाइंस बताया।
जबकि मौके से स्कूटी लेकर गए साथी का नाम कुनाल पुत्र अनिल सिंह निवासी साकेत कालोनी चंपा विहार क्वार्सी बताया। पूछताछ में उन्होंने स्वीकारा कि गिरफ्तार बदमाशों में से रजत व उनका गैंग लीडर दीपांशु उर्फ डॉलर क्वार्सी के वर्ष 2018 के पुलिस मुठभेड़ के मुकदमे में वांछित चल रहे हैं, जबकि वह इससे पहले 2017 में एएमयू के बहुचर्चित गोली इम्प्लांट कांड में जेल गए थे।
उस समय उन पर व उनके गैंग लीडर फैसल मुस्तफा पर एएमयू के अंदर व बाहर के आधा दर्जन से अधिक गोली कांड पुलिस ने खोले थे। रजत एएमयू से बीटेक पास आउट है और दिल्ली से एलएंडटी कंपनी से जॉब भी छोड़कर आया है। बरामद हुई ब्रीजा कार उसकी बूआ के नाम से पंजीकृत है। वही कार को इस खेल के लिए लेकर गया था।
एएमयू के एसएस नार्थ में छिपाई स्कूटी
चूंकि इस गैंग के दो सदस्य पूर्व में एएमयू से जुड़े कांड में जेल जा चुके हैं और उनका एएमयू से जुड़े अपराधियों से रिश्ता है। इसके चलते पुलिस को खबर लगी है कि कुनाल मौके से स्कूटी लेकर सीधे एसएस नार्थ में छिपाई है। रात में इस खबर पर एसओजी टीम ने नार्थ में जाकर स्कूटी के विषय में पड़ताल भी की। मगर सही जानकारी नहीं हो सकी।
लोधा के अपहरण कांड में फिलहाल दो बदमाश गिरफ्तार कर अपहृतों को सकुशल बरामद कर उनसे कार व तीन मोबाइल बरामद किए गए हैं। बाकी पहलुओं पर जांच की जा रही है। जिला पुलिस के ही सिपाही की भूमिका की जांच भी कराई जाएगी। अगर उसका किसी तरह का सहयोग प्रकाश में आएगा तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होगी।
अभिषेक, पुलिस अधीक्षक नगर
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इसी गैंग ने वसूली के लिए मामा-भांजे को अगवा किया था, क्योंकि इनमें से मामा नशीले पदार्थ की बिक्री करता था और पूर्व में वह देहली गेट से जेल भी जा चुका है। मगर इस बार यह गैंग पुलिस के चंगुल में फंस गया और गैंग के दो साथी हत्थे चढ़ गए, जबकि दो भागने में सफल रहे।
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मगर खास बात यह है कि घटना के बाद रात 9 बजे तक इस गैंग के सदस्य के मोबाइल पर महानगर पुलिस का एक सिपाही का बार-बार फोन कर रहा था। ऐसे में यह संदेश पैदा कर रहा है कि कहीं यह सब उसी सिपाही की ‘शह’ पर तो नहीं चल रहा था। इस तथ्य पर अधिकारी जांच की बात कह रहे हैं।
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आईपीएल के सटोरियों से भी कर चुके वसूलीः पुलिस पूछताछ में यह बात भी सामने आई है कि एएमयू कांड में जेल से छूटकर आने के बाद यह लोग कुछ पुलिसकर्मियों के लिए मुखबिरी करने लग गए थे। ताकि खुद पुलिस से बचे रहें। इसी बीच इनके दिमाग में धन कमाने का यह उपाय आया और एसओजी वाला बनकर यह धंधा शुरू कर दिया। यह गैंग अब से पहले इसी तरह कई लोगों से वसूली कर चुका है।
पूर्व में आईपीएल के सटोरियों को भी इसी तरह उठाकर उनसे रकम ऐंठ चुका है और फिर उन्हें छोड़ चुका है। इधर, पुलिस के विश्वस्त सूत्र बता रहे हैं कि जिस समय पुलिस टीमें इनके पीछे लगी हुई थीं। उस समय रात 9 बजे तक एक सिपाही का फोन रजत के मोबाइल पर आ रहा था। वह सिपाही बराबर रजत के संपर्क में था। इसलिए इस सिपाही की भूमिका पर भी अंदरखाने सवाल उठ रहे हैं और कहा जा रहा है कि हो न हो यह सब उस सिपाही की ‘शह’ पर ही कर रहे थे। हो सकता है कि गलत धंधे वालों के विषय में वही सिपाही इन्हें इनपुट देता रहा हो।
गिरफ्तारी के दौरान ट्रेन में सवार होकर भागा एक अपराधी
एसपी सिटी अभिषेक ने रविवार को प्रेसवार्ता में बताया कि शनिवार शाम लोधा के गांव हरिदासपुर निवासी किसान जितेंद्र सिंह के तीन बेटों में सबसे बड़े प्रशांत उर्फ पंकज (25) व उसके नगला मसानी निवासी मामा मनोज पुत्र गोपाल (30) को सफेद रंग की स्कार्पियो सवार चार बदमाश आए अगवा कर ले गए थे। इससे पहले दोनों को तलाशी ली और मनोज की जेब से गांजे की पुड़िया मिलने पर यह कहकर ले गए कि तुम तस्करी करते हो। चलो हम एसओजी वाले हैं।
इस दौरान एक बदमाश मनोज की स्कूटी लेकर अलग गया, जबकि तीन बदमाश उन्हें कार में ले गए। इस खबर पर जब पंकज के पिता ने बदमाशों का पीछा किया तो उससे और मनोज के ही नंबर से उसकी बीवी के नंबर पर फोन कर दोनों परिवारों से दो दो लाख रुपये की फिरौती मांगी गई। इस बीच बदमाशों ने अपनी गाड़ी बदली और वह स्कार्पियो के बजाय काले रंग की ब्रीजा नंबर यूपी 81 बीजेड 0024 में आ गए।
उन्होंने परिवार को कभी गभाना टोल, कभी बरौली, कभी मसूदाबाद, कभी मीनाक्षी पुल तो कभी तस्वीर महल पर रकम देकर छोड़ने के लिए बुलाया गया। इसी बीच पूर्व मेयर शकुंतला भारती की एंट्री हुई और पुलिस हरकत में आई। इसके बाद मोबाइल लोकेशन के आधार पर पुलिस ने ब्रीजा सवार बदमाशों को पोस्टमार्टम केंद्र के पास लोको कॉलोनी में घेर लिया, जहां रास्ता आगे बंद होने के कारण दो बदमाश दबोचे और अगवा मामा बरामद कर लिए लिए गए, जबकि एक बदमाश दिल्ली की ओर जाती ट्रेन में दौड़कर सवार हो गया।
इस दौरान लोधा थाने का सिपाही उत्तम सिंह उसके पीछे भागा, मगर गिरने के कारण जख्मी हो गया। इस मौके पर सीओ गभाना सुरेंद्र सिंह, सीओ तृतीय अनिल समानिया, इंस्पेक्टर सिविल लाइंस अमित कुमार, एसओ लोधा प्रेमपाल सिंह, सर्विलांस प्रभारी अभय शर्मा मौजूद रहे।
एएमयू के चर्चित गोली इम्प्लांट कांड में जेल गए थे दो
एसओजी और लोधा पुलिस के संयुक्त ऑपरेशन में गिरफ्तारी के बाद लोधा थाने ले जाकर जब गिरफ्तार बदमाशों ने अपने नाम रजत सिंह पुत्र पुष्पेंद्र निवासी वैष्णो कॉलोनी सुरेंद्र नगर व अंकित कुमार सिंह उर्फ अंशुल पुत्र धर्मेंद्र निवासी रावण टीला संगम विहार क्वार्सी, ट्रेन में बैठकर फरार हुए साथी का नाम दीपांशु उर्फ डॉलर निवासी लोको कॉलोनी सिविल लाइंस बताया।
जबकि मौके से स्कूटी लेकर गए साथी का नाम कुनाल पुत्र अनिल सिंह निवासी साकेत कालोनी चंपा विहार क्वार्सी बताया। पूछताछ में उन्होंने स्वीकारा कि गिरफ्तार बदमाशों में से रजत व उनका गैंग लीडर दीपांशु उर्फ डॉलर क्वार्सी के वर्ष 2018 के पुलिस मुठभेड़ के मुकदमे में वांछित चल रहे हैं, जबकि वह इससे पहले 2017 में एएमयू के बहुचर्चित गोली इम्प्लांट कांड में जेल गए थे।
उस समय उन पर व उनके गैंग लीडर फैसल मुस्तफा पर एएमयू के अंदर व बाहर के आधा दर्जन से अधिक गोली कांड पुलिस ने खोले थे। रजत एएमयू से बीटेक पास आउट है और दिल्ली से एलएंडटी कंपनी से जॉब भी छोड़कर आया है। बरामद हुई ब्रीजा कार उसकी बूआ के नाम से पंजीकृत है। वही कार को इस खेल के लिए लेकर गया था।
एएमयू के एसएस नार्थ में छिपाई स्कूटी
चूंकि इस गैंग के दो सदस्य पूर्व में एएमयू से जुड़े कांड में जेल जा चुके हैं और उनका एएमयू से जुड़े अपराधियों से रिश्ता है। इसके चलते पुलिस को खबर लगी है कि कुनाल मौके से स्कूटी लेकर सीधे एसएस नार्थ में छिपाई है। रात में इस खबर पर एसओजी टीम ने नार्थ में जाकर स्कूटी के विषय में पड़ताल भी की। मगर सही जानकारी नहीं हो सकी।
लोधा के अपहरण कांड में फिलहाल दो बदमाश गिरफ्तार कर अपहृतों को सकुशल बरामद कर उनसे कार व तीन मोबाइल बरामद किए गए हैं। बाकी पहलुओं पर जांच की जा रही है। जिला पुलिस के ही सिपाही की भूमिका की जांच भी कराई जाएगी। अगर उसका किसी तरह का सहयोग प्रकाश में आएगा तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होगी।
अभिषेक, पुलिस अधीक्षक नगर