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बड़ी कार्रवाई: इंदौर में साइबर ठगी के लिए म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराने वाले गिरोह का पर्दाफाश, छह आरोपी गिरफ्तार

Tue, 08 Sep 2026 05:56 PM IST
इंदौर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: इंदौर ब्यूरो Updated Tue, 08 Sep 2026 05:56 PM IST
सार

इंदौर में ऑपरेशन मैट्रिक्स के तहत एरोड्रम पुलिस ने साइबर ठगी के लिए म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया। छह आरोपी गिरफ्तार हुए, एक फरार है। खातों में करोड़ों का ट्रांजेक्शन मिला और 200 साइबर फ्रॉड सामने आए।

 

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'Operation Matrix': Mule account gang busted; six accused arrested.
आरोपी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

साइबर ठगी के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन मैट्रिक्स के तहत एरोड्रम थाना पुलिस ने साइबर ठगी के लिए म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराने वाले संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मामले में छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक आरोपी फरार बताया जा रहा है। पुलिस के मुताबिक आरोपियों के बैंक खातों में करोड़ों रुपये का ट्रांजेक्शन हुआ है। इन्हीं खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम के लेनदेन के लिए किया जा रहा था।

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एरोड्रम थाने में एक लाख 44 हजार रुपये की साइबर ठगी की FIR दर्ज हुई थी। जांच के दौरान ठगी की रकम जिन बैंक खातों में पहुंची, उनमें सूरज जेसवाल और अमन चौहान के खाते सामने आए। बैंक डिटेल और KYC की जांच में सूरज जेसवाल के खाते में करीब 3 करोड़ 42 लाख रुपये, जबकि अमन चौहान के खाते में करीब साढ़े 17 लाख रुपये के ट्रांजेक्शन मिले। इसके बाद पुलिस ने सूरज जेसवाल को गिरफ्तार कर पूछताछ की। पूछताछ में एक संगठित गिरोह का खुलासा हुआ। इसके बाद पुलिस ने MIG क्षेत्र में दबिश देकर अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया।
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पुलिस के मुताबिक इस गिरोह का मास्टरमाइंड हर्ष है। वह अलग-अलग लोगों से चार से पांच हजार रुपये में बैंक खाते किराए पर लेता था। इसके बाद इन खातों की चेकबुक, ATM कार्ड और सिम का इस्तेमाल साइबर ठगी के लिए किया जाता था। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सूरज जेसवाल, हर्ष, संदीप उर्फ सौरभ, उमन उर्फ पवन, हरिओम और आयुष के रूप में हुई है। वहीं, अमन चौहान फरार बताया गया है।
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पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से अलग-अलग बैंकों के 34 ATM/डेबिट कार्ड, 12 पासबुक, 24 चेकबुक, एक वाई-फाई राउटर, 8 मोबाइल फोन, 1 लाख 8 हजार रुपये नकद और एक डायरी जब्त की है। पुलिस के मुताबिक जांच में इन बैंक खातों से जुड़े करीब 200 साइबर फ्रॉड के मामले सामने आए हैं। इन खातों के खिलाफ देशभर में करीब 200 FIR दर्ज होने की जानकारी भी पुलिस को मिली है।


अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि करोड़ों रुपये की रकम किन राज्यों और किन लोगों से आई और आगे किन खातों में ट्रांसफर हुई। इसके साथ ही पूरे नेटवर्क के पीछे जुड़े अन्य मास्टरमाइंड की भी तलाश की जा रही है। मामले में संगठित अपराध की धारा 112 BNS भी बढ़ाई गई है। पुलिस अब बैंक कर्मचारियों की भूमिका और बैंकिंग सिस्टम के जरिए हुए करोड़ों रुपये के ट्रांजेक्शन की भी जांच करेगी।

पुलिस के मुताबिक यह केवल बैंक खाते उपलब्ध कराने वाला नेटवर्क नहीं है, बल्कि साइबर ठगी के लिए म्यूल अकाउंट तैयार करने वाला संगठित गिरोह है। फिलहाल आरोपियों से पूछताछ जारी है। पुलिस को उम्मीद है कि फाइनेंशियल इन्वेस्टिगेशन के जरिए साइबर ठगी के इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों और इसकी अगली कड़ी तक पहुंचा जा सकेगा।

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