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स्क्रैप घोटाला: सेवा प्रबंधक समेत चार कर्मी निलंबित

Tue, 20 Jun 2017 01:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूूराे
अमर उजाला ब्यूूराे Updated Tue, 20 Jun 2017 01:47 AM IST
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Scrap scam: four employees suspended with service manager
demo pic - फोटो : अमर उजाला
स्क्रैप घोटाला प्रकरण की गाज रोडवेज परिक्षेत्र के सेवा प्रबंधक, सहायक लेखाधिकारी, स्टोर अधीक्षक और सहायक स्टोर कीपर पर गिर गई है। परिवहन आयुक्त के. रविंद्र नायक ने इनको निलंबित कर दिया है। 
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यह कार्रवाई जांच अधिकारी/ नोडल अधिकारी सत्य नारायण व क्षेत्रीय प्रबंधक अतुल त्रिपाठी की रिपोर्ट पर की गई है, जबकि जूनियर फोरमैन व  चौकीदार के खिलाफ कार्रवाई के लिए क्षेत्रीय प्रबंधक को निर्देशित किया गया है। यह कार्रवाई भी क्षेत्रीय प्रबंधक के अलीगढ़ लौटते ही तय मानी जा रही है। 
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बुधवार से शुरू हुए स्क्रैप घोटाला में रविवार को परिवहन आयुक्त ने जांच रिपोर्ट के साथ क्षेत्रीय प्रबंधक व नोडल अफसर को लखनऊ तलब किया था। सोमवार को दोनों अधिकारी पूरी जांच रिपोर्ट के साथ परिवहन आयुक्त से मिले। आयुक्त ने सेवा प्रबंधक केके सिंह, सहायक लेखाधिकारी रविकांत मल्ल, स्टोर अधीक्षक उदयवीर सिंह व स्टोर कीपर योगेश कुलश्रेष्ठ को निलंबित कर दिया।
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जूनियर फायरमैन विनोद कुमार व चौकीदार देवेंद्र सिंह के निलंबन के आदेश क्षेत्रीय प्रबंधक को दिए। लखनऊ से पुष्टि करते हुए क्षेत्रीय प्रबंधक अतुल त्रिपाठी ने बताया कि स्क्रैप नीलामी के लिए मुख्यालय से कमेटी का गठन होता है। जूनियर फोरमैन व चौकीदार उनके अधीन आते हैं, इसलिए लखनऊ से लौटकर उनका निलंबन वह स्वयं करेंगे।  चौकीदार प्राइवेट है, इसलिए उसकी सेवा समाप्त कर दी जाएगी। रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है। आगे पुलिस की कार्रवाई होगी। 

रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक अतुल त्रिपाठी को इस घोटाले के लिए जिम्मेदार मानकर उनके खिलाफ तहरीर देने वाले भाजपा नेता नितिन अरोरा, पार्षद पुष्पेंद्र सिंह जादौन, संजू बजाज आदि एसएसपी से मिले।

नितिन अरोरा ने कहा कि इस गोलमाल के लिए जब आरएम त्रिपाठी जिम्मेदार हैं तो उन पर मुकदमा होना चाहिए। बाकी तीन कर्मचारियों को गलत फंसाया गया है, उन्हें मुकदमे से बचाया जाए।


इस पर एसएसपी ने कहा कि एक मामले में दो मुकदमे नहीं हो सकते। हां, आपके द्वारा दिए जा रहे साक्ष्य मुकदमे में शामिल कर लिए जाएंगे। उसमें साक्ष्य के आधार पर जो दोषी है, वह फंसेगा और जो निर्दोष है, उसका नाम निकाल दिया जाएगा। इसके बाद साक्ष्यों की प्रति वह एसएसपी को दे आए। 
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