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रामजस कॉलेज का विवादः एबीवीपी के खिलाफ एएमयू छात्रों का मार्च
अमर उजाला ब्यूूराे
Updated Wed, 01 Mar 2017 02:49 AM IST
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दिल्ली यूनिवर्सिटी के रामजस कॉलेज में छात्रों एवं शिक्षकों की बर्बरता से पिटाई की चिंगारी एएमयू में पहुंच गई है। छात्र-शिक्षकों द्वारा जनसभा का आयोजन कर कैंपस में विरोध मार्च निकाला गया। इस दौरान एबीवीपी एवं फांसीवादी ताकतों के खिलाफ खूब नारे भी लगे।
आर्ट फैकल्टी लाउंज में आयोजित जनसभा में प्रसिद्ध इतिहासकार प्रो. इरफान हबीब ने भाजपा एवं एबीवीपी पर तीखा हमला बोला और कहा कि राष्ट्रीयता का पाठ पढ़ाने वाले यह जान ले कि कानून हाथ में लेने वाले एंटी नेशनल होते हैं। उन्होंने एबीवीपी का विरोध करने वाली डीयू की छात्रा एवं शहीद की पुत्री गुरमेहर कौर की जमकर तारीफ की और कहा कि कन्हैया, उमर और शहला राशिद युवाओं के रोल मॉडल हैं। उन्होंने हिटलर का उदाहरण देते हुए आगाह किया कि देश फांसीवादी की तरफ बढ़ रहा है।
अभिव्यक्ति पर हमला हो रहा है। बिना नाम लिए प्रधानमंत्री की ओर इशारा किया कि जो लोग शमशान घाट एवं कब्रिस्तान में फर्क बताते हैं, क्या वह नेशनलिस्ट हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कहा था कि जितनी मोहब्बत भारत से है, उतनी ही पाकिस्तान से। क्या आज उन्हें भी भाजपा वाले राष्ट्र विरोधी करार दे देंगे। राजा राममोहन राय, ईश्वर चंद्र विद्यासागर, सर सैयद अहमद खान ने भी बदलाव की बात उठाई। उसे तो अंग्रेजों ने भी नहीं दबाया।
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बाद में छात्र एवं शिक्षकों द्वारा हाथ में बैनर-पोस्टर लेकर आर्ट फैकल्टी लाउंज से बाब-ए-सैयद तक विरोध मार्च निकाला गया। वक्ताओं ने कहा कि फांसीवादी ताकतों को मुंहतोड़ जवाब देना जरूरी है।
हैदराबाद यूनिवर्सिटी, जेएनयू एवं डीयू की घटनाओं के बाद भी हम चुप बैठे रहे तो अनर्थ हो जाएगा। अभिव्यक्ति की आजादी के सवाल को हमलोग मरने नहीं देंगे। कार्यक्रम को अमुटा सचिव मुस्तफा जैदी, पूर्व अमुटा सचिव प्रो. आफताब आलम, प्रो. वसी हैदर, डॉ. तरूशिखा, मो. आसिफ आदि ने संबोधित किया। इस अवसर पर डॉ. शादाब बानो, डॉ. अली नदीम रिजवी, डॉ. गुलफिशां खान, लुबना इरफान, इमरान गाजी आदि मौजूद थे।
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आर्ट फैकल्टी लाउंज में आयोजित जनसभा में प्रसिद्ध इतिहासकार प्रो. इरफान हबीब ने भाजपा एवं एबीवीपी पर तीखा हमला बोला और कहा कि राष्ट्रीयता का पाठ पढ़ाने वाले यह जान ले कि कानून हाथ में लेने वाले एंटी नेशनल होते हैं। उन्होंने एबीवीपी का विरोध करने वाली डीयू की छात्रा एवं शहीद की पुत्री गुरमेहर कौर की जमकर तारीफ की और कहा कि कन्हैया, उमर और शहला राशिद युवाओं के रोल मॉडल हैं। उन्होंने हिटलर का उदाहरण देते हुए आगाह किया कि देश फांसीवादी की तरफ बढ़ रहा है।
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अभिव्यक्ति पर हमला हो रहा है। बिना नाम लिए प्रधानमंत्री की ओर इशारा किया कि जो लोग शमशान घाट एवं कब्रिस्तान में फर्क बताते हैं, क्या वह नेशनलिस्ट हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कहा था कि जितनी मोहब्बत भारत से है, उतनी ही पाकिस्तान से। क्या आज उन्हें भी भाजपा वाले राष्ट्र विरोधी करार दे देंगे। राजा राममोहन राय, ईश्वर चंद्र विद्यासागर, सर सैयद अहमद खान ने भी बदलाव की बात उठाई। उसे तो अंग्रेजों ने भी नहीं दबाया।
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बाद में छात्र एवं शिक्षकों द्वारा हाथ में बैनर-पोस्टर लेकर आर्ट फैकल्टी लाउंज से बाब-ए-सैयद तक विरोध मार्च निकाला गया। वक्ताओं ने कहा कि फांसीवादी ताकतों को मुंहतोड़ जवाब देना जरूरी है।
हैदराबाद यूनिवर्सिटी, जेएनयू एवं डीयू की घटनाओं के बाद भी हम चुप बैठे रहे तो अनर्थ हो जाएगा। अभिव्यक्ति की आजादी के सवाल को हमलोग मरने नहीं देंगे। कार्यक्रम को अमुटा सचिव मुस्तफा जैदी, पूर्व अमुटा सचिव प्रो. आफताब आलम, प्रो. वसी हैदर, डॉ. तरूशिखा, मो. आसिफ आदि ने संबोधित किया। इस अवसर पर डॉ. शादाब बानो, डॉ. अली नदीम रिजवी, डॉ. गुलफिशां खान, लुबना इरफान, इमरान गाजी आदि मौजूद थे।