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उच्च शिक्षित मन्नान बन सकता है बड़ा सिरदर्द
अभिषेक शर्मा, क्राइम न्यूूज डेस्क, अमर उजाला
Updated Thu, 11 Jan 2018 01:48 AM IST
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mannan vani
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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के भूगर्भ विज्ञान विभाग से पीएचडी कर रहा मन्नान वानी अब जेहाद की डिग्री लेने की ओर बढ़ गया है। हिजबुल द्वारा जिस तरह से एक उच्च शिक्षित कश्मीरी युवा को अपने खेमे में शामिल किया गया है, उससे जांच एजेंसियों का सिरदर्द अधिक बढ़ा हुआ है। एजेंसियों को अंदेशा है कि पढ़े लिखे मन्नान को आने वाले समय में कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।
इसी अंदेशे पर काम करते हुए एजेंसियों ने अब तक जो इनपुट जुटाया है, उसके अनुसार उस पर कश्मीर से आतंकियों की नजर थी और उसे एंट्री देवबंद के रहने वाले कुछ फरार आतंकियों के जरिये दिलाई गई है। यही वजह है कि एजेंसियों का जितना ज्यादा फोकस अलीगढ़ पर है, उतना ही फोकस देवबंद पर है। जब एजेंसियों को मन्नान की शिकायतें मिली थीं, उसी समय टीमें देवबंद पहुंच गईं थीं। मगर वहां कुछ न मिलने पर वापस लौटी थीं। दूसरी ओर मन्नान भी तब तक अलीगढ़ से निकल चुका था।
परिवार के सहारे वापसी की कोशिश
चूंकि शिक्षित युवा बड़ी परेशानी पैदा कर सकता है। इस अंदेशे से चिंतित एजेंसियों का प्रयास है कि परिवार के सहारे उसे वापस लाया जाए। इसके लिए परिवार के माध्यम से ही प्रयास किए जा रहे हैं। एजेंसियों के स्तर से उसके करीबियों, परिचितों और खास लोगों को भी खोजा जा रहा है।
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अब एजेंसियों को मिल रहे इनपुट
जिस तरह से मन्नान वानी की शिकायत पहले दिल्ली पहुंची और एजेंसियां हरकत में आईं। एजेंसियों के हरकत में आते ही अचानक मन्नान गायब हो गया। इसी बीच इनपुट मिला कि वह देवबंद में किसी के संपर्क में था। इसलिए यह अंदेशा जताया जा रहा है कि कश्मीर में बैठे आकाओं ने मन्नान को प्रेरित करने में पश्चिमी यूपी से ही किसी को लगाया होगा। जब वह पूरी तरह तैयार हो गया तो उसकी अचानक ज्वाइनिंग करा दी गई।
एएमयू में बुरहान के पोस्टर बांटे थे मन्नान ने
वर्ष 2012 में एएमयू में दाखिला लेने वाले मन्नान के विषय में इनपुट है कि पश्चिमी यूपी में हिजबुल के फरार चल रहे आतंकियों के माध्यम से उसका संपर्क कश्मीर में बैठे संगठन के आकाओं से हुआ। इसके बाद वह करीब एक साल से साथियों के बीच इस तरह की बातें करता था। जब बुरहान वानी एन्काउंटर में मारा गया तो कश्मीर में हुए विरोध के बीच एएमयू में बुरहान के समर्थन में पोस्टर बांटे गए थे। उन पोस्टरों को बांटने में भी मन्नान का नाम सामने आया था। उस समय हुई चर्चाएं कुछ दिन की जांच के बाद थम गई थीं। एएमयू इंतजामिया ने भी उस घटना को गंभीरता से नहीं लिया था।
आखिर कौन रहा स्थानीय मॉटीवेटर
एजेंसियों के स्तर यह बड़ा सवाल जानने की कोशिश की जा रही है कि वर्ष 2012 में एएमयू में आए कश्मीर के इस युवा को स्थानीय स्तर पर कोई न कोई तो मॉटीवेटर मिला होगा। यह मॉटीवेटर कौन हो सकता है। देवबंद से लेकर अलीगढ़ तक इस खोज पर काम चल रहा है। अगर वह कोई फरार आतंकी है तो यह बड़ा सवाल है कि उसकी कब कहां और किसके माध्यम से मुलाकातें हुईं। अगर वह आतंकी नहीं तो फिर कौन है। इन पहलुओं पर जांच करते हुए एजेंसियों ने पूरी कुंडली खोजने का काम शुरू कर दिया है।
पश्चिमी यूपी में सभी कश्मीरी युवा रडार पर
एएमयू सहित पश्चिमी यूपी के अन्य केंद्रों पर मौजूद कश्मीर का एक-एक युवा इस घटनाक्रम के बाद एजेंसियों के रडार पर है। उसके मन्नान या अन्य संदिग्धों से कनेक्शन तो नहीं, इस पर काम हो रहा है। एजेंसियों ने मुखबिरों का जाल इस कदर फैलाया है कि किसी भी सूचना को बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है। हालांकि अभी तक एजेंसियों को कोई इनपुट नहीं मिला है।
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इसी अंदेशे पर काम करते हुए एजेंसियों ने अब तक जो इनपुट जुटाया है, उसके अनुसार उस पर कश्मीर से आतंकियों की नजर थी और उसे एंट्री देवबंद के रहने वाले कुछ फरार आतंकियों के जरिये दिलाई गई है। यही वजह है कि एजेंसियों का जितना ज्यादा फोकस अलीगढ़ पर है, उतना ही फोकस देवबंद पर है। जब एजेंसियों को मन्नान की शिकायतें मिली थीं, उसी समय टीमें देवबंद पहुंच गईं थीं। मगर वहां कुछ न मिलने पर वापस लौटी थीं। दूसरी ओर मन्नान भी तब तक अलीगढ़ से निकल चुका था।
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परिवार के सहारे वापसी की कोशिश
चूंकि शिक्षित युवा बड़ी परेशानी पैदा कर सकता है। इस अंदेशे से चिंतित एजेंसियों का प्रयास है कि परिवार के सहारे उसे वापस लाया जाए। इसके लिए परिवार के माध्यम से ही प्रयास किए जा रहे हैं। एजेंसियों के स्तर से उसके करीबियों, परिचितों और खास लोगों को भी खोजा जा रहा है।
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अब एजेंसियों को मिल रहे इनपुट
जिस तरह से मन्नान वानी की शिकायत पहले दिल्ली पहुंची और एजेंसियां हरकत में आईं। एजेंसियों के हरकत में आते ही अचानक मन्नान गायब हो गया। इसी बीच इनपुट मिला कि वह देवबंद में किसी के संपर्क में था। इसलिए यह अंदेशा जताया जा रहा है कि कश्मीर में बैठे आकाओं ने मन्नान को प्रेरित करने में पश्चिमी यूपी से ही किसी को लगाया होगा। जब वह पूरी तरह तैयार हो गया तो उसकी अचानक ज्वाइनिंग करा दी गई।
एएमयू में बुरहान के पोस्टर बांटे थे मन्नान ने
वर्ष 2012 में एएमयू में दाखिला लेने वाले मन्नान के विषय में इनपुट है कि पश्चिमी यूपी में हिजबुल के फरार चल रहे आतंकियों के माध्यम से उसका संपर्क कश्मीर में बैठे संगठन के आकाओं से हुआ। इसके बाद वह करीब एक साल से साथियों के बीच इस तरह की बातें करता था। जब बुरहान वानी एन्काउंटर में मारा गया तो कश्मीर में हुए विरोध के बीच एएमयू में बुरहान के समर्थन में पोस्टर बांटे गए थे। उन पोस्टरों को बांटने में भी मन्नान का नाम सामने आया था। उस समय हुई चर्चाएं कुछ दिन की जांच के बाद थम गई थीं। एएमयू इंतजामिया ने भी उस घटना को गंभीरता से नहीं लिया था।
आखिर कौन रहा स्थानीय मॉटीवेटर
एजेंसियों के स्तर यह बड़ा सवाल जानने की कोशिश की जा रही है कि वर्ष 2012 में एएमयू में आए कश्मीर के इस युवा को स्थानीय स्तर पर कोई न कोई तो मॉटीवेटर मिला होगा। यह मॉटीवेटर कौन हो सकता है। देवबंद से लेकर अलीगढ़ तक इस खोज पर काम चल रहा है। अगर वह कोई फरार आतंकी है तो यह बड़ा सवाल है कि उसकी कब कहां और किसके माध्यम से मुलाकातें हुईं। अगर वह आतंकी नहीं तो फिर कौन है। इन पहलुओं पर जांच करते हुए एजेंसियों ने पूरी कुंडली खोजने का काम शुरू कर दिया है।
पश्चिमी यूपी में सभी कश्मीरी युवा रडार पर
एएमयू सहित पश्चिमी यूपी के अन्य केंद्रों पर मौजूद कश्मीर का एक-एक युवा इस घटनाक्रम के बाद एजेंसियों के रडार पर है। उसके मन्नान या अन्य संदिग्धों से कनेक्शन तो नहीं, इस पर काम हो रहा है। एजेंसियों ने मुखबिरों का जाल इस कदर फैलाया है कि किसी भी सूचना को बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है। हालांकि अभी तक एजेंसियों को कोई इनपुट नहीं मिला है।